अहमदाबाद, जेएनएन। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि आरक्षण नौकरी की गारंटी नहीं है, वहीं गुजरात में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हार्दिक पटेल ने गुजरात सरकार के समक्ष पाटीदारों को आर्थिक आधार पर आरक्षण तथा किसानों के कर्ज माफी की मांग रखी है। हार्दिक 25 अगस्त को आमरण उपवास शुरू करेंगे जिसके लिए ममता बैनर्जी, अखिलेश यादव व तेजस्वी यादव को न्यौता भेजा जाएगा।

पाटीदारों को ओबीसी कोटे में आरक्षण दिए जाने की मांग के साथ शुरू हुआ पाटीदार आंदोलन 25 अगस्त, 2015 को एक महारैली के साथ राज्यभर में फैल गया था। इसकी तीसरी वर्षगांठ पर एक बार फिर हार्दिक आंदोलन को तेज करने के लिए आमरण उपवास शुरू करने वाले हैं। पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के बैनर तले हार्दिक ने प्रदेश के करीब डेढ़ सौ गांव व शहर के समिति संयोजक, सहसंयोजक व समर्थकों की बैठक बुलाई, जिसमें उपवास की रणनीति पर चर्चा हुई। 25 अगस्त को पचास हजार युवाओं के साथ हार्दिक उपवास शुरू करेंगे। इसके बाद हर रोज पांच हजार लोग प्रतीक उपवास करेंगे।

हार्दिक ने उपवास आंदोलन को देशभर में चर्चा में लाने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी न्यौता देंगे। उधर, राज्य सरकार किसी भी कीमत पर हार्दिक के उपवास को रोेकने का प्रयास कर रही है। हार्दिक का मानना है कि सरकार उपवास की मंजूरी नहीं देगी तो हाईकोर्ट का सहारा लेंगे तथा सरकार की मंजूरी के बिना भी उपवास पर बैठेंगे। हार्दिक ने सरकारके समक्ष आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आर्थिक आधार पर लेकिन संवैधानिक रूप से आरक्षण की मांग रखी है, ताकि अदालत किसी भी तरह से उस पर रोक नहीं लगा सके। इसके अलावा किसानों की कर्ज माफी की मांग को भी हार्दिक अपने आंदोलन का मुख्य हथियार बना रहे हैं।

गौरतलब है कि जहां केंद्रीय मंत्री गडकरी पाटीदार व मराठा आंदोलनों के संदर्भ में कह रहे हैं कि नौकरियां है ही नहीं फिर आरक्षण की जरूरत क्या है, वहीं हार्दिक पाटीदार व आरक्षण से वंचित अन्य समुदायों को आरक्षण पर अड़े हैं।  

Posted By: Sachin Mishra