सूरत,  कई बार उचित मूल्य की दुकानों के मालिक नेटवर्क पाने के लिए एक टीले से दूसरे टीले पर जा-जाकर देखते हैं। वलसाड जिले के कपराडा तालुका में हर दूसरे उचित मूल्य की दुकान के मालिक को अपने कम्प्यूटर, प्रिंटर और फिंगर प्रिंट स्केनर के साथ पहाड़ी चढ़ना पड़ती है। उसके साथ में कुछ गांववाले होते हैं जो कि अपने राशन के कूपन लेने के लिए उनके साथ पहाड़ी चढ़ते हैं।

इस क्षेत्र के लोगों के लिए राशन लेना किसी पहाड़ के चढ़ने जैसी मशक्कत करने के बराबर है। उन्हें उचित मूल्य की सामग्री लेने के लिए मशीन पर अंगूठा लगाने के लिए ऊंची टीले पर चढ़ना पड़ता है, तब जाकर उन्हें राशन मिल पाता है।

सरकार की ओर से दी गई ये मशीन बिना नेटवर्क के गांव में नहीं चल पाती है, इसलिए टीले पर चढ़कर नेटवर्क में आकर ये काम करना पड़ रहा है। सब्सिडाइज्ड फूड के ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम के पेश होने के बाद से ही यह स्थिति करपडा के 10 गांव में पिछले पांच साल से है।

कई बार उचित मूल्य की दुकानों के मालिक नेटवर्क पाने के लिए एक टीले से दूसरे टीले पर जा-जाकर देखते हैं। एक बार कूपन इश्यू हो जाए तो ग्रामीण फिर नीचे आते हैं और उचित मूल्य की दुकानों से राशन लेते हैं।

वलसाड से 60 किलोमीटर के इन गांवों में 10 हजार लोग रहते हैं। करचोड गांव में एक अग्रणी मोबाइल सेवा प्रदाता का एक टॉवर है लेकिन अधिकांश समय कुछ नेटवर्क तकनीकी खराबी या बिजली गुल की समस्याएं रहती है।

उचित मूल्य की दुकान के मालिक किशन गोरखन के मुताबिक टीले पर अलग-अलग दिशा में तीन से चार स्पॉट्स हैं जहां 3जी और 4जी नेटवर्क मौजूद है। इसलिए हम लोकेशंस पर गांववालों को बुलाते हैं।

जीरो कनेक्टिविटी के कारण राशन पाना एक बड़ी समस्या है। इसके इलावा मेडिकल इमर्जेंसी में मदद पाना भी यहां बहुत कठिन है। ऐसी स्थिति में भी कई बार रात के अंधेरे में गांववालों को टीले पर चढ़ने के लिए दौड़ना पड़ता है। ताकि 108 इमर्जेंसी एम्बुलेंस को नेटवर्क में पहुंचकर कॉल किया जा सके।

Posted By: Preeti jha