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पहले मां के गहने बेचे फिर कनाडा जाने के लिए पूरे घर को कर्ज में डूबोया, बेटे की बेरुखी से त्रस्‍त बूढे मां-बाप ने की खुदकशी

कनाडा जाकर बेटा माता-पिता को भूल गया कर्ज उठाकर पीयूष को कनाडा भेजने वाला परिवार पाई-पाई को मोहताज हो गया। अब बेटा ना फोन उठाता है और ना पैसा भेज रहा है। इधर कर्ज तले दबे माता-पिता ने बेटे के नाम एक चिट्ठी लिखकर आत्‍महत्‍या कर ली है। सूरत के सरथाणा क्षेत्र के मीरा ऐवन्‍यु में रहने वाले चुन्‍नी भाई गेढिया और मुक्‍ता बेन ने घर पर खुदकशी कर ली।

By Jagran News Edited By: Abhinav Atrey Fri, 10 May 2024 06:26 PM (IST)
पहले मां के गहने बेचे फिर कनाडा जाने के लिए पूरे घर को कर्ज में डूबोया, बेटे की बेरुखी से त्रस्‍त बूढे मां-बाप ने की खुदकशी
बेटे की बेरुखी से त्रस्‍त बूढे मां-बाप ने करली खुदकशी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शत्रुघ्‍न शर्मा, अहमदाबाद। कनाडा जाकर बेटा माता-पिता को भूल गया, कर्ज उठाकर पीयूष को कनाडा भेजने वाला परिवार पाई-पाई को मोहताज हो गया। अब बेटा ना फोन उठाता है और ना पैसा भेज रहा है। इधर कर्ज तले दबे माता-पिता ने बेटे के नाम एक चिट्ठी लिखकर आत्‍महत्‍या कर ली है।

सूरत के सरथाणा क्षेत्र के मीरा ऐवन्‍यु में रहने वाले 66 वर्षीय चुन्‍नी भाई गेढिया और 64 वर्षीय मुक्‍ता बेन ने घर पर खुदकशी कर ली। चार साल पहले बेटे पीयूष को कनाडा भेजने के लिए उन्‍होंने रिश्‍तेदारों से करीब 40 लाख रुपये का कर्ज लिया था। बेटा कनाडा चला गया और अपने कारोबार में डूब गया। माता-पिता व भाई संजय को उम्‍मीद थी कि पीयूष इस कर्ज को उतार देगा, लेकिन उसने रुपये भेजना और फोन करना तक बंद कर दिया। कर्ज के बोझ तले दबे मां-बाप ने मारे शर्म के खुदकशी कर ली।

पिता ने चिट्ठी में अपनी वेदना को व्‍यक्‍त की

बेटे के नाम लिखी एक चिट्ठी में अपनी वेदना को व्‍यक्‍त करते हुए चुन्‍नी भाई ने लिखा कि पहले फाइनेंस के कारोबार के लिए पीयूष ने अपनी मां के गहने बिकवा दिये और पिफर व्‍यापार में विफल रहा तो कनाडा जाने के लिए परिवार को कर्ज में दबा गया।

बेटे ने भाई व माता-पिता को सड़क पर ला दिया

पुत्र की बेवफाई और रिश्‍तेदारों के कर्ज में दबे इन बूढे मां-बाप ने अपनी वेदना पत्र के जरिए सार्वजनिक कर बताया कि पीयूष ने अपने भाई व माता-पिता को सड़क पर ला दिया, परिवार को कर्ज में दबाकर अब उसने संबंध तोड़ लिया।

कर्ज देने वाले सभी रिश्‍तेदार

हालांकि कर्ज देने वाले सभी रिश्‍तेदार हैं और उनकी ओर से कोई दबाव नहीं है लेकिन बूढे मां-बाप ने शर्म के मारे अपनी जीवन लीला को समाप्‍त करना ही बेहतर समझा। पत्र में वे लिखते हैं कि शायद उनकी ही कोई भूल हुई होगी, ऊपर वाले को भी शायद यही मंजूर होगा। हाथ जोड़कर इस दंपत्‍ती ने माफी मांगते हुए खुदकशी कर ली।

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