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सूरत: नरेंद्र मोदी के नाम पर रखा दिया फिश मार्केट का नाम, व्यापारियों के विरोध के बाद हटा बोर्ड

Published: Tue, 25 Aug 2026 03:04 PM (GMT+05:30)

सूरत में 3.90 करोड़ की लागत से बने नए फिश मार्केट का नाम 'श्री नरेंद्र मोदी होलसेल फिश मार्केट' रखने पर विवाद खड़ा हो गया

HighLights

  1. सूरत में नए फिश मार्केट का नाम पीएम मोदी पर रखा गया।

  2. व्यापारियों ने शाकाहारी प्रधानमंत्री के नाम के उपयोग पर आपत्ति जताई।

  3. महानगर पालिका की आधिकारिक मंजूरी के बिना लगाया गया था बोर्ड।

डिजिटल डेस्क, सूरत। गुजरात के सूरत शहर के नानपुरा-लक्कड़कोट इलाके में लगभग 3.90 करोड़ रुपये की लागत से बना एक नया फिश मार्केट गंभीर विवादों में घिर गया है।

सूरत महानगर पालिका (SMC) के किसी भी आधिकारिक प्रस्ताव के बिना ही इस मार्केट का नाम 'श्री नरेंद्र मोदी होलसेल फिश मार्केट' रखकर बोर्ड लगा दिया गया था। इसके बाद स्थानीय व्यापारी और प्रशासन आमने-सामने आ गए।

'प्रधानमंत्री के नाम का इस्तेमाल अनुचित'

फिश मार्केट के प्रमुख व्यापारी सुरेंद्र लश्करी ने इस नामकरण पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी हैं और उन्होंने कभी भी सी-फूड या मांस का सेवन नहीं किया है। ऐसे में एक मांसाहारी बाजार के साथ देश के प्रधानमंत्री का नाम जोड़ना किसी भी तरह से सही नहीं है।

इससे उनकी छवि धूमिल होने का खतरा है। व्यापारियों की स्पष्ट मांग है कि प्रधानमंत्री की गरिमा बनाए रखने के लिए इस नाम का बोर्ड तुरंत हटाया जाए। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि यह नामकरण एसोसिएशन के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने अपनी मनमानी से थोपा है।

व्यापारियों का सुझाव है कि यदि इस बाजार का नाम उनके 'कहार-माछी समाज' के नाम पर रखा जाए तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी।

एसोसिएशन अध्यक्ष ने नामकरण का किया बचाव

दूसरी ओर, सूरत फिश मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने इस विवादास्पद नामकरण का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने दलील दी कि पीएम मोदी ने देश के मछुआरों के लिए 'मत्स्य संपदा योजना' के तहत करोड़ों रुपये के आवंटन के साथ एक पूरी तरह से अलग मंत्रालय का गठन किया है। इसलिए, मार्केट पर प्रधानमंत्री के नाम को लेकर इस तरह का विवाद खड़ा करना पूरी तरह से अनुचित है।

उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने महानगर पालिका के नियमों के तहत 43 lakh रुपये की डिपॉजिट जमा की है और 6 महीने का अग्रिम किराया भी चुकाया है। भाजपा के स्थानीय नेताओं के सक्रिय प्रयासों से ही यह मार्केट तैयार हो पाया है, इसलिए वे इस बोर्ड को किसी भी परिस्थिति में हटने नहीं देंगे।

बिना SMC के आधिकारिक प्रस्ताव के लगा बोर्ड

नियमों के मुताबिक, सूरत महानगर पालिका द्वारा निर्मित किसी भी प्रोजेक्ट या मार्केट का आधिकारिक नामकरण करने के लिए महानगर पालिका की सांस्कृतिक समिति या सामान्य सभा में एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित करना अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में ऐसा कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था।

SMC सेंट्रल जोन के कार्यकारी अभियंता राजेश गांजावाला ने स्पष्ट किया कि बिना आधिकारिक मंजूरी के सीधे बोर्ड लगाए जाने की जानकारी मिलने पर महानगर पालिका की टीम इसे हटाने के लिए मौके पर पहुंची थी।

हालांकि, स्थानीय व्यापारियों द्वारा लिखित में यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि वे स्वयं इस बोर्ड को हटा लेंगे, SMC की टीम फिलहाल वापस लौट गई

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