अहमदाबाद, जेएनएन। Gujarati film critic. गुजराती फिल्मों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। सरकार ने इसके लिए गत चार नवंबर को गुजरात चलचित्र प्रोत्साहन समिति 2019 की घोषणा की है। इस समिति में गुजराती फिल्म समीक्षकों के तौर पर मृत व्यक्ति को नियुक्त किया है। गुजरात के सूचना व प्रसारण विभाग की इस बड़ी गलती के खिलाफ गुजराती फिल्म इंडस्ट्रीज ने ही इस पर सवाल खड़े किए हैं।

गुजराती फिल्म इंडस्ट्रीज का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से गुजराती फिल्म को सब्सिडी देने के लिए जो समिति बनाई गई है। उस समिति के मूल्याकंन के आधार पर ही फिल्म को सब्सिडी जी जाए या नहीं इस बारे में निर्णय किया जाता है। गुजराती फिल्म इंडस्ट्रीज का कहना है कि इस समिति में जिन लोगों को नियुक्त किया गया है, उन लोगों का गुजराती फिल्म इंडस्ट्रीज से कोई वास्ता ही नहीं है। सूची में सिनेमेटोग्राफी और वीएफएक्स विभाग में मशहूर कैमरामैन रणदेव भादुरी को शामिल किया गया है, जिनका कुछ समय पहले ही निधन हो गया है। गुजरात के सूचना व प्रसारण विभाग के अधिकारियों ने जानकारी हासिल किए बिना ही सूची तैयार कर विभिन्न केटेगरी में कुल 204 लोगों को नियुक्त कर दिया है, जबकि हर एक केटेगरी में केवल 10 लोगों की जरूरत होती है। इसके बाद भी इन केटेगरी में उन लोगों को शामिल किया गया है, जिन लोगों का फिल्मों से कुछ लेना-देना ही नहीं हैं। इस सूची में कई अनुभवी व सीनियर लोगों को शामिल ही नहीं किया गया है।

गुजराती फिल्म इंडस्ट्रीज के मुताबिक, इस समय गुजराती फिल्मों को गोल्डन समय चल रहा है। गौरतलब है कि गुजरात फिल्म इंडस्ट्रीज का पिछले तीन-चार साल से विकास हो रहा है। गुजराती में अच्छी फिल्में बन रही हैं। गुजराती फिल्म छेलो दिवस, हेल्लारों, गुजु भाई द ग्रेड , खिचड़ी सहित की फिल्मों ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। 

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Posted By: Sachin Mishra

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