अहमदाबाद, जेएएनएन। दलितों को कानूनी सुरक्षा के लिए बने एट्रोसिटी एक्ट पर उच्चतम न्यायालय के सुझाव के बाद भारत बंद के साथ ही गुजरात में भाजपा दलितों से करीबी बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वहीं निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने भाजपा को डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा से दूर रखने का एलान कर पार्टी की मुसीबत बढ़ा दी है।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की खंडपीठ की ओर से एट्रोसिटी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी पर रोक के सुझाव के खिलाफ मेवाणी दलित समुदाय को एकजुट करने में लगे हुए हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने फैसले पर पुनर्विचार करने की अर्जी लगा दी है लेकिन गुजरात में भाजपा को दलित समाज की नाराजगी का आभास हो गया, जिसके चलते आगामी 14 अप्रैल को डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती को सरकार व संगठन ने जिला, तहसील व मंडल स्तर पर जोर शोर से लोकतंत्र के उत्सव के रूप में मनाने का एलान किया है।

उधर, निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने एट्रोसिटी एक्ट मामले में सारा दोष भाजपानीत केंद्र सरकार पर मढते हुए कहा है कि वे भाजपा नेताओं को डॉ अंबेडकर की प्रतिमा को छूने भी नहीं देंगे, इस दिन दलित समाज के युवा मानव श्रंखला बनाकर अंबेडकर प्रतिमा को घेरकर रखेंगे तथा भाजपा नेताओं को उनसे दूर रखेंगे।

विधायक मेवाणी उत्तर गुजरात के वडगाम क्षेत्र से कांग्रेस के समर्थन से विधायक चुने गए हैं तथा ऊना में दलित युवकों की पिटाई की घटना के बाद से ही वे चर्चा में आए हैं। ऊना में मृत गाय का चमड़ उतार रहे दलित युवकों को कुछ युवकों ने कार से बांधकर बुरी तरह पीटा था, उससे पहले पुलिस की गोली से उत्तर गुजरात के थानगढ़ में तीन दलित युवकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद अब उच्चतम न्यायालय के सुझाव से भाजपा खेमे में बैचेनी है।

गौरतलब है कि गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है और प्रदेश भाजपा संगठन आगामी चुनाव में इसी सफलता को दोहराना चाहता है, ताकि कांग्रेस गुजरात से एक भी सीट नहीं जीत सके लेकिन दलित व मुस्लिम गठजोड़ भाजपा के इस गणित को बिगाड़ सकता है, इसलिए भाजपा डॉ अंबेडकर की जयंती पर दलितों से करीबी बढ़ाने का प्रयास कर रही है।