अहमदाबाद, जागरण संवाददाता। दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कभी गुजरात में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ लंबी कानूनी जंग लड़ी थी। स्वभाव से योद्धा व सोच से वैज्ञानिक सक्सेना, पायलट की डिग्री लेने के बाद कानपुर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा हासिल की। राजस्थान में सहायक अधिकारी से कैरियर की शुरुआत करते हुए गुजरात में बंदरगाह के महाप्रबंधक बनकर आए। बाद में नेशनल काउंसिल फार सिविल लिबर्टीज के जरिये सामाजिक आंदोलन में उतर गए। सरदार सरोवर नर्मदा बांध का विरोध करने वाली नर्मदा बचाओ अभियान की अगुवा मेधा पाटकर के खिलाफ सक्सेना ने एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।

मेधा ने सक्सेना पर लगाया था ये आरोप

मेधा पाटकर ने विनय कुमार सक्सेना पर सरकारी योजनाओं से लाभ उठाने का आरोप लगाया तो सक्सेना ने उन पर मानहानि का केस दायर कर दिया था। पाटकर ने भी उनके खिलाफ केस दायर किया था,जिन्हें बाद में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था। दंगापीडि़तों के नाम पर विदेश से धन लेकर उसका गलत इस्तेमाल करने के मामले में सक्सेना ने मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ भी लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। सक्सेना हमेशा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रबल समर्थक रहे। 2015 में उन्हें केंद्र सरकार ने खादी व ग्रामोद्योग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। अपने इस कार्यकाल में सक्सेना ने खादी एवं गांधी विचार को खूब फलीभूत किया। वर्ष 2021-22 में खादी आयोग का कारोबार रिकार्ड एक लाख 15 करोड़ रुपये रहा। 2019 में उन्हें जेएनयू के मेंबर आफ यूनिवर्सिटी कोर्ट भी नामित किया गया था। कारपोरेट जगत में अच्छी पैठ होने के साथ अर्थशास्त्र के भी अच्छे जानकार हैं।

पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना हैं दोस्त

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना व दिल्ली के पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना अच्छे मित्र हैं। गुजरात में रहते दोनों में अच्छी मित्रता थी, अब वे दोनों दिल्ली में अहम ओहदों पर हैं।

महात्मा गांधी के लिए ब्रिटिश पीएम को लिखा था पत्र

महात्मा गांधी के विचार व खादी को देश-विदेश में एक अलग ढंग से प्रस्तुत करने वाले विनय कुमार सक्सेना ने 2008 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन को पत्र लिखकर महात्मा गांधी की प्रतिमा को मैडम तुसाद संग्रहालय की दूसरी मंजिल पर एक आइसक्रीम पार्लर के पास लगाने पर आपत्ति जताई थी। पत्र में सक्सेना ने प्रधानमंत्री को लिखा कि अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष कर दुनिया का ध्यान खींचने वाले तथा भारत को आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी का यह अपमान है। क्या यह भारत के ऐतिहासिक रोल माडल के खिलाफ नस्ली पूर्वाग्रह नहीं है। पत्र का संज्ञान लेते हुए गांधीजी की प्रतिमा को म्यूजियम में विश्व के नेताओं के साथ लगाया गया।

Edited By: Sachin Kumar Mishra