IRSS अधिकारी प्रेम शंकर झा की पुस्तक 'मॉडिफाइड गवर्नेंस' का हुआ लोकार्पण
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रेम शंकर झा की पुस्तक 'मॉडिफाइड गवर्नेंस' का वडनगर रेलवे स्टेशन पर लोकार्पण हुआ।
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आईआरएसएस अधिकारी प्रेम शंकर झा की पुस्तक ‘मॉडिफाइड गवर्नेंस’ का लोकार्पण
HighLights
वडनगर रेलवे स्टेशन पर 'मॉडिफाइड गवर्नेंस' पुस्तक का लोकार्पण।
लेखक प्रेम शंकर झा ने शासन को परिणाम-उन्मुख प्रक्रिया बताया।
चाय विक्रेताओं ने पुस्तक का विमोचन कर सम्मान बढ़ाया।
डिजिटल डेस्क, वडनगर। शासन केवल नीति बनाने का नहीं, उसे नागरिक तक पहुंचाने और उसके परिणाम देखने का नाम है। 'मॉडिफाइड गवर्नेंस' के लेखक एवं भारतीष रेलवे सेवा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (एडीआरएम) प्रेम शंकर झा ने बुधवार को वडनगर रेलवे स्टेशन पर पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर यह बात कही।
प्रेम शंकर झा ने कहा, 'शासन की असली सफलता इस बात में है कि आम नागरिक की समस्या को पहचानकर उसे नीति की प्राथमिकता बनाया जाए और उसका समाधान अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।'
'मॉडिफाइड गवर्नेंस' किताब का लोकार्पण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शासन-दृष्टि और प्रशासनिक कार्यशैली पर केंद्रित ‘मॉडिफाइड गवर्नेंस’ का वडनगर रेलवे स्टेशन पर लोकार्पण किया गया। आयोजन की खास बात यह रही कि वडनगर और आसपास के क्षेत्रों के चाय विक्रेताओं को मुख्य अतिथि बनाया गया और उन्हीं के हाथों पुस्तक का लोकार्पण कराया गया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नितिनभाई पटेल, सांसद हरिभाई पटेल, भाजपा प्रकोष्ठ संकुल के राष्ट्रीय संयोजक व सांसद वीडी शर्मा और अहमदाबाद मंडल के डीआरएम वेद प्रकाश, वरिष्ठ डीसीएम अन्नू त्यागी व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विद्यार्थी जीवन से जुड़े बीएन हाईस्कूल के तत्कालीन प्रधानाचार्य जितेंद्र मोदी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
प्रेम शंकर झा ने कहा कि वडनगर में ‘मॉडिफाइड गवर्नेंस’ का लोकार्पण मेरे लिए भावनात्मक क्षण है। यह उस स्थान पर लौटने जैसा है, जिसकी स्मृतियां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शुरुआती जीवन से जुड़ी हैं।
लेखक ने कहा कि रेलवे स्टेशन यात्राओं के साक्षी होते हैं और वडनगर का यह स्टेशन भी ऐसी यात्रा की स्मृतियों से जुड़ा है, जिसने आगे चलकर देश के शासन और प्रशासन को प्रभावित किया।

पुस्तक के चार भागों में पीएम मोदी की कहानी
प्रेम शंकर झा आगे ने कहा कि पुस्तक में शासन को केवल योजनाओं की घोषणा या नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रखा गया है। समस्या की पहचान, स्पष्ट दृष्टि, नीति निर्माण, क्रियान्वयन, फीडबैक और परिणामों की निगरानी को शासन की एक जुड़ी हुई प्रक्रिया के रूप में देखा गया है। पुस्तक में विभिन्न उदाहरणों और आंकड़ों के माध्यम से इस कार्यशैली को प्रशासनिक दृष्टि से समझने का प्रयास किया गया है।
लेखक ने बताया कि पुस्तक को चार हिस्सों में बांटा गया है।
- पहले भाग में भारतीय प्रशासन की नींव
- दूसरे में 1947 से 1991 तक का प्रशासनिक दौर
- तीसरे में 1991 से 2014 तक के सुधार
- चौथे में 2014 से वर्तमान तक की ‘माडिफाइड गवर्नेंस’ को केंद्र में रखा गया है
अंतिम भाग में नरेन्द्र मोदी के शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, अर्थव्यवस्था, डिजिटल तकनीक, सामाजिक कल्याण, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विभिन्न पहलुओं को अलग-अलग अध्यायों में रखा गया है।
चाय विक्रेताओं को बनाया मुख्य अतिथि
चाय विक्रेताओं को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर झा ने कहा कि वे समाज के उस सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो रोज बड़ी संख्या में लोगों से मिलता है, उनकी बातें सुनता है और समाज की बदलती आकांक्षाओं को करीब से देखता है।
लेखक ने स्पष्ट किया कि ‘मॉडिफाइड गवर्नेंस’ किसी व्यक्ति का राजनीतिक मूल्यांकन करने वाली पुस्तक नहीं है, बल्कि भारत की विकसित शासन-पद्धति को प्रशासनिक दृष्टि से समझने का प्रयास है। पुस्तक में समस्या, नीति, क्रियान्वयन और परिणाम के बीच बेहतर संबंध स्थापित कर शासन को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने पर ध्यान दिया गया है।
सांसद हरिभाई पटेल ने कहा कि वडनगर जैसे ऐतिहासिक स्थान पर पुस्तक का लोकार्पण आयोजन को विशेष महत्व देता है। उन्होंने कहा कि शासन में नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण और आम लोगों की भागीदारी को महत्व दिया जाना जरूरी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष नितिनभाई पटेल ने कहा कि पुस्तक में शासन की कार्यप्रणाली को प्रशासनिक नजरिये से समझने का प्रयास किया गया है। उन्होंने इसे शासन और नागरिक के बीच बेहतर संबंधों को समझने की दिशा में उपयोगी पहल बताया।
अहमदाबाद मंडल के डीआरएम वेद प्रकाश ने कहा कि रेलवे स्टेशन केवल यात्राओं के केंद्र नहीं होते, बल्कि लोगों की स्मृतियों और जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से भी जुड़े होते हैं। वडनगर स्टेशन पर पुस्तक का लोकार्पण इसी दृष्टि से विशेष अवसर है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक को शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
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