गोधरा, एजेंसी। गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान पंचमहल जिले की गोधरा सीट भी काफी चर्चा में है। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील गोधरा में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पूरे दमखम के साथ उतर रही है। बीते साल हुए निकाय चुनाव के नतीजों से उत्साहित एआईएमआईएम इस बार भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है। बता दें कि गोधरा में अभी भाजपा का ही विधायक है।

दरअसल, गोधरा में हुए नगर निकाय चुनाव में एआईएमआईएम ने सात सीटों पर कब्जा किया था। भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए उसने निर्दलीयों के साथ गठबंधन किया था। निर्दलीय उम्मीदवार संजय सोनी एआईएमआईएम के समर्थन से गोधरा नगर निकाय के अध्यक्ष बने, लेकिन उसी साल नवंबर में 44 सदस्यीय सदन में 18 सदस्यों वाली भाजपा का समर्थन मिलने के बाद एआईएमआईएम से नाता तोड़ लिया।

भाजपा से गोधरा सीट छीनने की कोशिश

इस बार के चुनाव में एआईएमआईएम भाजपा से गोधरा विधानसभा सीट छीनने की कोशिश कर रही है। गोधरा उन 14 सीटों में से एक है जहां एआईएमआईएम चुनाव लड़ रही है। पिछले हफ्ते एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने अपनी पार्टी के प्रत्याशी हसन शब्बीर कचबा के लिए चुनाव प्रचार किया था।

भाजपा ने किसे दिया मौका

भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक सी के राउलजी को इस सीट से मैदान में उतारा है। उनके खिलाफ कांग्रेस की रश्मिताबेन चौहान और आम आदमी पार्टी (आप) के राजेशभाई पटेल मैदान में हैं।

मुस्लिम इलाकों में नहीं हुआ विकास- एआईएमआईएम

एआईएमआईएम के पार्षदों का आरोप है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में विकास कार्य नहीं किए गए। आमतौर पर शहरवासियों को गड्ढों से भरी सड़कों, साफ-सफाई और पानी की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। एआईएमआईएम के एक समर्थक इशाक बोकदा ने कहा कि शहर के इस तरफ कोई बैंक, एटीएम, खेल के मैदान नहीं हैं, जबकि इसकी आबादी एक लाख से ज्यादा है।

एआईएमआईएम पार्षदों का ये भी आरोप है कि विकास कार्य सिर्फ 50 फीसदी हिस्से में ही हुए हैं। यह क्षेत्र हिंदू और अन्य समुदायों की आबादी वाला शहर रहा है।

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Edited By: Manish Negi

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