अहमदाबाद, जेएनएन। अहमदाबाद से मुंबई के बीच प्रस्‍तावित बुलेट ट्रेन के लिए राज्‍य सरकार की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को उच्‍च न्‍यायालय ने वैध बताते हुए इसका विरोध कर रहे एक हजार से अधिक किसानों की 59 याचिकाओं को खारिज कर दिया।

उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश अनंत एस दवे व न्‍यायाधीश बीरेन वैष्‍णव की खंडपीठ ने दक्षिण गुजरात के 192 गांवों के करीब 4000 किसानों की जमीन अधिग्रहण के मामले में दायर 59 याचिकाओं पर सुनवाई की। सभी किसानों ने एक एक पेज की याचिका दाखिल की थी। किसान जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया व मुआवजा राशि को लेकर विरोध कर रहे थे। किसानों का कहना है कि राज्य सरकार वर्ष 2011 के सरकारी भाव से मुआवजा देना चाहती है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से इससे पहले जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बाजार भाव से चार गुना देने का प्रावधान किया गया था। राज्‍य सरकार ने 2013 में इसमें संशोधन किया, जो इस पर लागू नहीं होता है। किसान बाजार भाव से जमीन का दाम चाहते हैं लेकिन राज्‍य सरकार उसके लिए भी तैयार नहीं है, हालांकि अदालत ने सरकार को मुआवजे राशि का फैसला सरकार पर छोड दिया है।

बुलेट ट्रेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट में से एक है। मोदी ने जापान के पीएम शिंजो आबे के साथ मिलकर अहमदाबाद में सितंबर, 2017 में इसका शिलान्‍यास किया था। अहमदाबाद से मुंबई तक करीब 508 किमी के बुलेट ट्रेन के ट्रेक के लिए राज्‍य सरकार जमीन अधिग्रहण कर रही है, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। आंदोलन कर रहे किसान हाईकोर्ट के फैसले का उच्‍चतम न्‍यायालय में चुनौती देंगे।

गौरतलब है कि अहमदाबाद से मुंबई के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन के विरोध में गुजरात के कई गांवों के किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर गुजरात के किसान काफी समय से विरोध कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार ने जमीन अधिग्रहण कानून में बदलाव कर दिया, जिससे उनको जमीन का वाजिब मुआवजा नहीं मिलेगा।

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