गुजरात के सरकारी स्कूलों में बिना इजाजत नहीं होगी बाहरी लोगों की एंट्री, सरकार ने सख्त किए नियम
गुजरात सरकार ने स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्त नियम लागू किए हैं, जिसके तहत बिना प्रधानाचार्य की ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)
HighLights
बाहरी लोगों के प्रवेश के लिए लिखित अनुमति अनिवार्य।
छात्रों की सुरक्षा और निजता पर विशेष ध्यान।
अनाधिकृत प्रवेश पर पुलिस को सूचित करने का निर्देश।
डिजिटल डेस्क, गांधीनगर। गुजरात सरकार ने बुधवार को स्कूलों को निर्देश दिया कि वे अपने प्रवेश नियमों को सख्त करें और बाहरी लोगों को बिना पूर्व अनुमति के परिसर में आने से रोकें।
स्कूल आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी एक सर्कुलर में कहा गया है, “किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने के लिए प्रधानाचार्य या संस्थान के प्रमुख से पहले लिखित अनुमति लेनी होगी। केवल वे सरकारी अधिकारी, जिन्हें अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए विधिवत अधिकृत किया गया है, उन्हें इस नियम से छूट दी जाएगी।”
'विजिटर्स की एंट्री हो दर्ज'
इसमें कहा गया है कि आने वालों का विवरण विजिटर रजिस्टर में दर्ज किया जाना चाहिए। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रशासन को यह भी निर्देश दिया कि वे छात्रों की तस्वीरें, वीडियो और निजी जानकारी को इस तरह से इकट्ठा करने, प्रकाशित करने या फैलाने से रोकें, जिससे उनकी सुरक्षा, सम्मान या निजता को खतरा हो सकता है।
सर्कुलर में कहा गया है, "प्रिंसिपल की पूर्व लिखित अनुमति के बिना छात्रों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव-स्ट्रीमिंग नहीं की जा सकती। ऐसी गतिविधियों की अनुमति केवल वैध उद्देश्यों के लिए ही दी जा सकती है।"
इसमें कहा गया है, "कोई भी विजिटर प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना किसी बच्चे के बारे में जानकारी एकत्र नहीं करेगा और न ही उसकी पहचान या तस्वीर प्रकाशित करेगा। ऐसा विशेष रूप से तब लागू होता है जब यह गतिविधि बच्चे के हित में न हो और इससे उसकी सुरक्षा, गरिमा या निजता पर असर पड़ सकता हो।"
प्रिंसिपल को दिया गया अधिकार
कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, छात्रावासों, खेल के मैदानों, शौचालयों और उन जगहों तक पहुंचने के लिए जहां पर छात्रों की गतिविधियां होती हैं, पहले से लिखित अनुमति लेना आवश्यक होगा। ऐसी स्थितियों में आगंतुक के साथ प्रधानाचार्य, कोई शिक्षक या स्कूल का कोई अधिकृत अधिकारी मौजूद रहेगा।
इस परिपत्र (सर्कुलर) के तहत प्रधानाचार्यों को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे ऐसे आगंतुकों को प्रवेश देने से मना कर सकें, जिनकी उपस्थिति से स्कूल की सुरक्षा, अनुशासन, गोपनीयता या शैक्षणिक माहौल पर असर पड़ सकता है।
परिपत्र में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के परिसर में प्रवेश करता है, बाहर जाने से मना करता है, बिना अनुमति के फोटो या वीडियो लेने की कोशिश करता है या स्कूल की गतिविधियों में बाधा डालता है तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस और शिक्षा अधिकारियों को दी जानी चाहिए।
इसमें कहा गया है कि 'इन लोको पैरेंटिस' (यानी माता-पिता के समान जिम्मेदारी) के सिद्धांत के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों की सुरक्षा, गरिमा, निजता और कल्याण के लिए राज्य सरकार की एक विशेष जिम्मेदारी है।
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