अहमदाबाद, जागरण संवाददाता। शाहरुख खान की आने वाली फिल्म पठान का विरोध करने पर कच्छ के एक संत को सर कलम करने की धमकी मिली है। हिंदू युवा वाहिनी गुजरात के पूर्व अध्यक्ष योगी देवनाथ बाबू को ट्विटर पर यह धमकी दी गई।

गौरतलब है कि ईशनिंदा जैसे मामलों को लेकर देश के विभिन्न शहरों में 4 से अधिक लोगों की हत्या तथा दर्जनों को सर कलम करने की धमकी मिलने के बाद गुजरात कच्छ के एक संत को टि्वटर पर पठान नामक फिल्म का विरोध करने को लेकर सर कलम करने की धमकी दी गई।

हिंदू युवा वाहिनी संगठन के गुजरात के पूर्व अध्यक्ष योगी देवनाथ बापू ने शाहरुख खान की फिल्म पठान को लेकर ट्विटर पर व अन्य इंटरनेट मीडिया माध्यम पर बहिष्कार करने का ऐलान किया था। अली नामक ट्विटर अकाउंट से संत को शाहरुख खान की फिल्म का विरोध करने पर सर कलम करने की धमकी दी गई। देवनाथ बापू ने पुलिस को इसकी शिकायत कर दी है जिला पुलिस मामले की जांच कर रही है। धमकी देने वाले की अभी पहचान नहीं हो पाई है अली नामक अकाउंट कहां से ऑपरेट किया जा रहा है तथा किस व्यक्ति का है और किस संगठन से जुड़ा है पुलिस अभी इस के तथ्य खंगाल रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले मुहम्मद पैगंबर को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाली भाजपा नेता नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर उदयपुर, हैदराबाद सहित अन्य कई शहरों में जहां कुछ लोगों का सर कलम कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी वही गुजरात के सूरत में लेखक युवराज पोखरणा वह अन्य को भी खुलेआम हत्या की धमकी दी गई थी।

गुजरात पुलिस मामले की जांच कर रही है। ट्विटर खाते से संत को धमकी दी गई है वह सलीम अली एसआरके फैन के नाम से बना है। पठान फिल्म का विरोध करने जैसी पोस्ट को लेकर सर कलम करने की धमकी देना अपने आप में कट्टरपंथी विचारधारा के दुष्प्रभाव का परिणाम नजर आता है। भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक देश में इस तरह की हत्या की धमकी देना अपने आप में कानून एवं न्याय व्यवस्था को सीधी चुनौती देना है।

गौरतलब है कि फेसबुक ट्विटर एवं यूट्यूब को लंबे समय से केंद्र सरकार जाति एवं धर्म विरोधी तथा देश में सांप्रदायिकता बढ़ाने वाली पोस्ट को हटाने के साथ विवादित एवं भड़काऊ पोस्ट करने वाले अकाउंट को ब्लॉक करने का भी निर्देश देती रही है। इंटरनेट मीडिया की ओर से पिछले कुछ माह से ऐसे अकाउंट को ब्लॉक भी किया गया है हाल ही ट्विटर ने लाखों अकाउंट को डिलीट भी कर दिया था लेकिन इसके बावजूद लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करने का सिलसिला नहीं रुक रहा है।

Edited By: Priti Jha