राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। Gujarat Lion. गुजरात में बीते दो साल के दौरान 430 शेर, तेंदुओं व शावकों की मौत हुई है। इसमें शेर और शावकों की संख्या 261 है। शेर व तेंदुओं की मौत का कारण दुर्घटना और बीमारी को बताया गया है।

गुजरात के वन मंत्री गणपत वसावा ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक विक्रम माडम के सवाल के जवाब में बताया कि दो साल में 430 शेर व तेंदुओं की मौत हुई है। इनमें शेरों के 123 शावक और 138 शेर व शेरनी शामिल हैं। सर्वाधिक 69 शावकों की मौत 2019 में हुई। वसावा ने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के आधार पर प्राकृतिक और अप्राकृतिक मौत का निर्णय किया जाता है।

कांग्रेस विधायक विक्रम माडम ने जानना चाहा था कि राज्य में गत दो वर्षों में कितने शेर, शावकों व तेंदुओं की मौत हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अप्राकृतिक मौत के बारे में वनकर्मी स्थानीय किसानों को परेशान करते हैं। कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए किसानों को रिश्वत देना पड़ता हैं। इस प्रश्न के उत्तर में वन मंत्री गणपत वसावा ने कहा कि राज्य में गत दो वर्षों में शेर, शावक, तेंदुओं की अलग-अलग घटनाओं में मौत हुई हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान के रणथंभौर एवं सरिस्का सेंचुरी के साथ ही जयपुर स्थित झालाना नेचर पार्क के लिए ऑनलाइन बुकिंग सोमवार से फिर शुरू कर दी गई है । पिछले सप्ताह 15 दिन के लिए बुकिंग बंद कर दी गई थी, लेकिन वन्यजीव प्रेमियों एवं पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के दबाव के बाद इस निर्णय को बदल दिया गया है।

वन विभाग ने पिछले सप्ताह दो से 16 मार्च तक ऑनलाइन बुकिंग पर रोक लगा दी थी । अधिकारिक रूप से तो यह कहा गया था कि मार्च के दूसरे सप्ताह में जयपुर में वन एवं पर्यावरण से जु़ड़ी बड़ी कांफ्रेंस होने के कारण बड़ी संख्या में देशी-विदेशी प्रतिनिधि रणथंभौर व सरिस्का भ्रमण के लिए आएंगे, जिनके लिए वाहनों को आरक्षित रखना जरूरी होगा। वन विभाग प्रति पारी 36 वाहनों को भ्रमण की अनुमति देता है। ऐसे में इतने वाहनों की आवश्यकता तो अकेले प्रतिनिधियों के लिए ही होगी। इस कारण पर्यटकों को भ्रमण की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस वजह से ऑनलाइन बुकिंग पर रोक लगाई गई थी।

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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