FIFA World Cup 2026 ने उड़ा दी दुनिया की आधी आबादी की नींद, भारत सहित इन देशों के फैंस चुका रहे 'सीक्रेट टैक्स'
फीफा वर्ल्ड कप 2026 अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में खेला जा रहा है। इस विश्व कप में दुनिया की लगभग आधी आबादी की नींद उड़ा दी है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 ने उड़ाई फैंस की नींद
HighLights
अमेरकिा, कनाडा और मेक्सिको में खेला जा रहा है फीफा वर्ल्ड कप
दुनिया की आधी आबादी को रही समस्या
फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले भी हो चुकी है परेशानी
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जा रहा है। फुटबॉल विश्व कप को दुनिया का सबसे बड़ा खेल उत्सव माना जाता है। हालांकि, इन तीन देशों में वर्ल्ड कप होने की वजह से लगभग आधी दुनिया की नींद खराब हो रही है। इसका कारण ये है कि विश्व कप के मुकाबले देर रात से शुरू हो रहे हैं।
विश्व कप की वजह से दुनिया की आधी आबादी की नींद खराब हो रही है। इससे सबसे अधिक भारत, चीन इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों के फैंस प्रभावित हो रहे हैं। ये पहली बार नहीं है, जब ऐसा हो रहा है। इससे पहले भी कई विश्व कप में हो चुका है, जब एशियाई फैंस को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा है। इसे 'टाइमजोन' टैक्स भी कहा जाता है।
फुटबॉल फैंस को क्यों होती है ये परेशानी?
जब यूरोप या अमेरिका में मैच दोपहर में होता है, तो भारत, चीन, इंडोनेशिया जैसे देशों में यह आधी रात या सुबह-सुबह हो जाता है। इसका नतीजा ये होता है कि लोग थकान के साथ मैच देखते हैं या फिर सो जाते हैं। इस बार भारत और चीन में फुटबॉल प्रेमियों को इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस बार के विश्व कप में लगभग 56 प्रतिशत दुनिया की आबादी अलग टाइम जोन होने की वजह से प्रभावित हो रही है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी परेशानी
1970 में मेक्सिको में 22 अरब लोगों यानी लगभग 58% आबादी पर असर पड़ा। उस वर्ल्ड कप का फाइनल मैच 12 बजे रात (भारतीय समय) शुरू हुआ। 1974 के वेस्ट जर्मनी विश्व कप में आबादी कम प्रभावित हुई लेकिन समय फिर भी असुविधाजनक था। 1982 में स्पेन, 1986 में मेक्सिको और 1990 में इटली में भी एशिया के करोड़ों फैंस को रातभर जागना पड़ा। 1994 अमेरिका विश्व कप में 35 अरब लोगों यानी 61% आबादी पर इसका असर था। 1998 में फ्रांस में हुए वर्ल्ड कप में भी यही देखने को मिला। इससे 60 प्रतिशत आबादी की नींद खराब हुई।
2002 में दक्षिण कोरिया-जापान की मेजबानी से एशिया के लोगों को थोड़ी राहत मिली। हालांकि, 2006 जर्मनी, 2010 दक्षिण अफ्रीका और 2014 ब्राजील में फिर पुरानी समस्या लौट आई। 2018 रूस और 2022 में कतर में विश्व कप का आयोजन हुआ इससे भी इंडोनेशिया, जापान, फिलीपींस जैसे देशों के फैंस को रात भर जागना पड़ा।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में भी समस्या बरकरार
अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में विश्व कप होने की वजह से एशियाई फैंस के लिए फिर से पुरानी समस्या लौट आई है। इस बार लगभग 56 प्रतिशत दुनिया की आबादी पर इसका असर पड़ रहा है। भारतीय समयानुसार मुकाबलों की शुरुआत रात के 12:30 बजे से हो रही है। ऐसे में अगर फैंस विश्व कप का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी नींद खराब करनी पड़ रही है। अब तक के सभी विश्व कप में होने वाली परेशानी एशियाई देशों को सबसे अधिक उठानी पड़ी है। इसमें भारत, इंडोनेशिया, चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं।
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