शुभ के कारक भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाएं विसर्जित की गईं। सजी झाकियों में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने में कहीं ट्राली ट्रैक्टर तो कहीं पालकी का उपयोग किया गया। जुलूस की शक्ल में निकली यात्रा के सामने थिरकते युवकों ने गणेश का जयकारा लगाकर माहौल को श्रद्धा एवं भक्ति से सराबोर कर दिया। हर्ष उल्लास के बीच उड़ रहे रंग गुलाल से माहौल रंगीन रहा।

शहर में गणेश चुतर्थी के दिन लगभग कई स्थानों पर मूर्ति स्थापना की गई थी। तभी से माहौल भक्तिमय बना रहा। मंगलवार को दोपहर से ही विसर्जन की तैयारी में लगे लोगों ने इसके पूर्व विधि विधान पूर्वक पूजन किया। इस बीच महिलाओं एवं बच्चों ने गणेश की पूजा में बढ़ चढ़ कर भाग लिया। विघ्न विनाशक के भक्तों ने गणपति बप्पा मोरया का गगनभेदी जयघोष करते हुए प्रतिमा विसर्जन यात्रा शुरू की।

विसर्जन यात्रा में हाथी घोडे़ भी चल रहे थे। जिससे यात्रा की सुंदरता में चार चाद लग गया। लोगों ने रास्ते में जगह-जगह जुलूस रोक कर गणेश जी की आरती उतारी और प्रसाद लिया। मस्ती भरे माहौल में प्रतिमाओं को भ्रमण कराने के पश्चात देर रात अमहट घाट पर विसर्जित किया गया।

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