Dupahiya के 'कुबेर' ने तीसरे सीजन पर दिया बड़ा अपडेट, अनिवाश ने बताया कैसे आया हिट सीरीज लिखने का आइडिया?
Dupahiya में 'कुबेर' का किरदार निभाने वाले अविनाश द्विवेदी ने इसके तीसरे सीजन पर बड़ा अपडेट शेयर किया है।
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अविनाश द्विवेदी ने 'दुपहिया 3' पर दिया अपडेट
HighLights
अविनाश द्विवेदी ने 'दुपहिया 3' पर दिया अपडेट
राइटर-एक्टर ने शेयर की अपनी जर्नी
'दुपहिया' में कुबेर के किरदार में नजर आए एक्टर
स्मिता श्रीवास्तव , मुंबई। दहेज में बाइक की चाह शादी के फैसले और गांव की सामाजिक सोच को कॉमेडी के अंदाज में पेश करने वाली वेब सीरीज ‘दुपहिया’ ने अपनी अलग पहचान बनाई है। बिहार के काल्पनिक गांव धड़कपुर की कहानी पर आधारित इस सीरीज के दूसरे सीजन में पेपर लीक, ग्रामीण जीवन की विडंबनाएं और रिश्तों की उलझनें सामने आती हैं।
गोरखपुर से ताल्लुक रखने वाले अविनाश द्विवेदी ने इसमें न सिर्फ कुबेर का किरदार निभाया है, बल्कि वे इसके लेखक भी हैं। दैनिक जागरण से उनकी खास बातचीत-
एक्टिंग में आने के बारे में कैसे सोचा?
सबसे पहले एक्टिंग में आने का कीड़ा फिल्म कहो ना प्यार है से आया, जब मैंने पहली बार ऋतिक रोशन का गाना देखा एक पल का जीना ...और वहां से डांस करना शुरू किया। उस वक्त बहुत ज्यादा ऐसी सोच थी कि अगर एक्टिंग करनी है तो आपको डांस तो आना ही चाहिए। फिर मैंने फिर सिखाना शुरू किया स्कूल्स में। अपना डांस स्टूडियो खोला, शोज करना शुरू किया, दिल्ली में वेडिंग शोज किए और उससे जो पैसे आते थे, उससे मैंने थिएटर वर्कशाप्स करना शुरू किया।
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साथ ही मार्शल आर्ट्स सीखा कि एक्शन आना चाहिए, फिर राइटिंग भी इसलिए शुरू की, क्योंकि जिस तरीके के रोल मैं करना चाहता हूं, उसके लिए मुझे दूसरे लोगों पर निर्भर रहना पड़ेगा। अपने लिए अवसर क्रिएट करने के लिए राइटिंग शुरू की। पहले मैं सिर्फ एक्टिंग करना चाहता था। आज मैं क्रिएटर, राइटर, डांसर, एक्टर भी हूं। तो उस जर्नी ने मुझे सब कुछ सिखा दिया।
आपने डांस रियलिटी जीते थे लेकिन उसके बाद भी काफी संघर्ष करना पड़ा ?
मुझे तो लगा था कि मैं अब रातों-रात स्टार बन गया हूं, अब मेरे घर पर ऑफर्स आएंगे, लेकिन वैसा कुछ भी नहीं हुआ। मुंबई आने पर वास्तविकता समझ आई कि रियलिटी शो में मेरी पहचान टीआरपी तक थी। इसके बाद अपने दम पर काम तलाशना पड़ा। काम था लेकिन हमारे काम में एक अनिश्चिता होती है, कभी कोई विज्ञापन मिला, लेकिन अब आपको अगले चार महीने तक कोई काम नहीं मिला तो गुजारा मुश्किल होगा।
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एपिसोडिक शोज होते थे वो किए। मैंने भोजपुरी सीरियल 'स से सरस्वती' दो साल तक किया। फिर मुझे लगा यह करने मुंबई नहीं आया था। मुझे लगा कि मुझे और सीखने की जरूरत है। मुंबई में मैंने फिर से एक्टिंग क्लासेस करना शुरू किया और मैंने वेडिंग कोरियोग्राफी करना शुरू किया क्योंकि आर्थिक दिक्कत शुरू हो गई थी। तो डांस ने जब भी मैं फाइनेंशियली गिरने लगा मुझे संभाला।
इस सफर से यह सीख रही कि आपके पास कोई न कोई ऐसी प्रतिभा होनी चाहिए जिससे आप गुजारा कर सकें। मैं कहूंगा कि सरस्वती ने मेरा हमेशा लक्ष्मी से नाता बनाए रखा।
‘दुपहिया की शुरुआत कैसे हुई?
‘दुपहिया’ (Dupahiya) की कहानी मेरे दिमाग में गांव में शादियों के दौरान देखी गई घटनाओं से आई। मेरे कई युवा चचेरे-ममेरे भाई नौकरी न होने के कारण शादी नहीं करना चाहते थे, लेकिन दहेज में बाइक मिलने का ऑफर आते ही तैयार हो जाते थे। उस समय राजदूत मोटरसाइकिल का काफी क्रेज था। मैंने देखा कि लड़की को देखे बिना, सिर्फ बाइक के लिए शादी की जा रही थी।
मेरे मन में सवाल था कि जब शादी की बुनियाद ही बाइक हो, तो रिश्ता कैसा होगा? इसी विचार को विकसित करते-करते ‘दुपहिया’ के पहले सीजन की कहानी बनी।
शो में भूगोल (स्पर्श श्रीवास्तव) और उनके पिता बनवारी झा (गजराज राव) की नोकझोंक भी पसंद की गई है...
भूगोल और बनवारी के रिश्ते में कहीं न कहीं मेरे और मेरे पापा के रिलेशनशिप की झलक है क्योंकि मेरे पापा को मेरा डांस करना बिल्कुल पसंद नहीं था। पापा को लगता था कि पढ़ाई करेगा तो ज्यादा आगे जाएगा। जब मैं शोज करता था उन्होंने कहा था कि इसका पिछवाड़ा हिलाया हुआ पैसे हमें नहीं चाहिए। आखिर में जैसे भूगोल मुंबई आता है मुझे भी आखिरकार मुंबई ही आना था।
उन्होंने स्वीकार किया कि मैंने दो रियलिटी शो जीते हैं अब ये मुंबई जाना चाहता है, तो ये कुछ न कुछ कर लेगा और मुझे इस पर भरोसा है। वो सब कुछ काफी कुछ उसी में से है।
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कुबेर का रोल आपने बोला कि मुझे ही करना है? या ऑफर हुआ?
कुबेर के किरदार के लिए मैंने ऑडिशन दिया। वह अमेजन और हमारे डायरेक्टर को पसंद आया। कुबेर के किरदार को मैंने बहुत करीब से देखा है। इस किरदार की वजह से कहानी चल रही है। अगर वो दुपहिया नहीं मांगेगा तो ये कहानी ही नहीं होगी बाकी सारे किरदार अपना जोर नहीं लगाएंगे, नए दुपहिया के लिए या फिर शादी करवाने के लिए।
मुझे लगा कि कुबेर का किरदार अजीब लेकिन दिलचस्प है। उसे बेहतर बनाने के लिए मैंने अपने गांव में देखे लोगों के व्यवहार और बोलने के अंदाज को उसमें शामिल किया। मैंने देखा है कि लोग प्रतियोगी परीक्षाएं पास करके अच्छे पदों पर पहुंच जाते हैं, लेकिन कहीं न कहीं उनकी पुरानी सोच और
मानसिकता नहीं बदलती। ऐसे ही किरदारों से मिली बारीकियों को मैंने कुबेर के व्यक्तित्व में शामिल किया।
दुपहिया सीजन 2 में रोशनी (शिवानी रघुवंशी) को ब्लडी ब्यूटी बुलाने का आइडिया कहां से आया ?
दरअसल, मेरे गांव में एक शख्स थे जब शहर से बच्चे जाते थे गांव की छुट्टियों में, तो उन बच्चों को बताने के लिए कि भले मैं गांव में रहता हूं, लेकिन मैं आपसे कम नहीं हूं वो कुछ-कुछ अंग्रेजी के शब्द इस्तेमाल करते थे, जैसे, बेटा आप थक गए होंगे यहां सिट कर लीजिए, चलिए स्टैंड हो जाइए, काफी खाली है आप यहां से वहां तक रन कीजिए। वो मेरे दिमाग में बचपन से था।
कुबेर के लिए कुछ ढूंढ रहा था कि ताकि उसे दिलचस्प बना सकूं। हालांकि पहले सीजन में ऐसा लिखा नहीं था, जब मैं बतौर कलाकार जुड़ा तो यह जोड़ा। जिसमें ब्लडी ब्यूटी, ज्यादा दिस दैड दोज मत कीजिए, प्वाइंट पर आइए। मुझे लगा कि रिपीटेशन से लोगों को याद रहता है। एक नेगेटिव किरदार अगर किसी लड़की को काम्प्लिमेंट देगा, कैसे देगा और वो देते वक्त पसंद भी आए वो सोच थी।
आपकी पत्नी और अभिनेत्री संभावना सेठ की क्या प्रतिक्रिया रही ? उन्होंने क्या सीख दी है?
संभावना शो देखकर बहुत खुश हुईं। सीजन 2 देखने के बाद उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा कि सीजन 2, पहले सीजन से दोगुना बेहतर है और लेखन व अभिनय, दोनों में मैंने खुद को पीछे छोड़ दिया है। यह मेरे लिए बड़ा काम्प्लिमेंट था क्योंकि संभावना को ऐसी दर्शक मानता हूं, जिन्हें मेनस्ट्रीम सिनेमा के साथ अच्छी कहानी भी पसंद है।
‘3 इडियट्स’ और ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ जैसी फिल्में इसी का उदाहरण हैं। इसलिए उनका फीडबैक मेरे लिए बहुत मायने रखता है। बाकी संभावना ने मुझे सिखाया है कि आप जिसके हकदार हैं, उसके लिए आवाज उठाएं और अपना हक मांगें। अगर इसके बावजूद आपको आपका हक नहीं मिलता, तो अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाकर मेहनत करते रहें। समय जरूर आएगा और जब आएगा, तो सब आपके साथ होंगे।
लेखन के साथ अभिनय में संतुलन बना पाना आसान है?
यह मुश्किल है करना। मेरी कोशिश है मैं साल में चार-पांच शो या फिल्में लिखने के बजाय दो-तीन लिखूं, जिनमें अभिनय भी करूं। मैं लेखन को फैक्ट्री की तरह नहीं करना चाहता, जहां संख्या बढ़ाने के चक्कर में क्वालिटी से समझौता हो। मेरा लक्ष्य राइटिंग और अभिनय दोनों पर ध्यान देना है, इसलिए मैं उन्हीं प्रोजेक्ट्स पर काम करूंगा, जिनमें दोनों करने का मौका मिले।
आपका पहला सीजन जो था, दूसरा पेपर लीक तीसरे सीजन की क्या तैयारी है?
उसके बारे में सोच रहे हैं। आइडिया ऐसी चीज है कि कहीं भी किसी भी वक्त आ सकता है। मैं कोशिशें करता हूं कि दिन में दो घंटे बिना कुछ किए अकेले खाली अपने साथ बिताऊं। तो वही एक समय होता है जब अचानक से कोई विचार कौंधता है। जिस दिन आइडिया आएगा, उस दिन उस पर काम शुरू कर देंगे।
