Dupahiya 2 एक्ट्रेस रेणुका शहाणे का फिल्ममेकिंग पर बेबाक बयान, बोलीं-'कंटेट बनाते समय हमे अवॉर्ड...'
दुपहिया सीजन 2 में एक बार फिर से पुष्पलता बनकर लौटीं एक्ट्रेस रेणुका शहाणे ने फिल्ममेकिंग पर खुलकर बात की ...और पढ़ें
-1790922860516_m.webp)
दुपहिया एक्ट्रेस रेणुका शहाणे से खास बातचीत/ फोटो-इंस्टाग्राम
HighLights
फिल्म की कहानी में विश्वसनीयता देखकर लोग जुड़ते हैं
अवॉर्ड से ज्यादा कंटेट पर विश्वास चलाती हैं फिल्म
दुपहिया सीजन 2 के लिए रेणुका शहाणे की खास तैयारियां
प्रियंका सिंह, मुंबई। फिल्म की कहानी विश्वसनीय होनी चाहिए, फिर वह दर्शकों से खुद ही कनेक्ट कर लेती है। अभिनेत्री और निर्देशिका रेणुका शहाणे इसी सोच के साथ अपना कंटेट बनाती और चुनती हैं।
फिल्म को बनाते वक्त अवॉर्ड का ख्याल नहीं आना चहिए
हाल ही में अमेजन प्राइम वीडियो की वेब सीरीज दुपहिया के दूसरे सीजन में फिर से पुष्पलता के रोल में दिखी रेणुका कहती हैं, "फिल्म को बनाने का एक इरादा होना चाहिए, कहानी की विश्वसनीयता बनी रहनी चाहिए। फिल्म को बनाते वक्त यह ख्याल नहीं होना चाहिए कि उसे अवार्ड मिलेंगे या नहीं। ऐसी कल्पना करके फिल्म नहीं बनती है। कर्म करो, फल की चिंता मत करो।"
उन्होंने आगे कहा, "आपको वो बनाना है, जिसमें आपका यकीन है। दर्शकों को फलां कहानी पसंद आएगी, इसलिए गाना डाल रहे हैं, एक्शन सीन डाल रहे हैं, तो वह फिल्म बिगड़ जाएगी। उससे न दर्शक खुश रहेंगे न आप। यह अच्छी बात होगी अगर दोनों खुश रहे, लेकिन उससे भी अहम है उस कंटेंट को बनाते हुए आपका खुश रहना।"

ऑस्कर पहुंची मराठी फिल्म गोंधळ पर दिया रिएक्शन
मराठी फिल्मों में सक्रिय रेणुका 99वें ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि मराठी फिल्म गोंधळ को लेकर कहती हैं,"यह मराठी इंडस्ट्री के लिए यह बहुत बड़ी बात है। ऐसा होने पर आपकी इंडस्ट्री पर सारे लोगों की नजरें टिक जाती हैं। उत्साह भी बढ़ता है कि कुछ ऐसा करो, जिसकी वजह से हमारी फिल्में अकादमी में जाए और ऑस्कर भी जीत लें। मुझे लगता है कि यह मराठी इंडस्ट्री के लिए बहुत मायने रखता है।"
दुपहिया 2 में पुष्पलता के किरदार में याद रखनी पड़ी ये बातें
दुपहिया 2 में भी रेणुका गांव की सरपंच पुष्पलता के रोल में हैं, जो बिल्कुल पढ़ी-लिखी नहीं है। इस रोल को करते वक्त रेणुका को क्या कुछ भूलना पड़ता है? इस पर वह कहती हैं, "कुछ भूलना नहीं पड़ता है। कलाकार जो भी रोल करे, उस पर विश्वास रखना पड़ता है। आप कितने भी पढ़े-लिखे हों, लेकिन किरदार करने के दौरान याद रखना था पुष्पलता को अपने हस्ताक्षर करना भी नहीं आता है, अंगूठा छाप है, लेकिन फिर भी राजनीति में है।"
सीरीज पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, "वह डरती रहती हैं कि कोई उसे हल्के में न लें। मेरी असल जिंदगी से बिल्कुल अलग इस रोल को करना दिलचस्प था। अब तक ऐसा कोई रोल ऑफर नहीं हुआ है, जब मुझे लगा हो कि मैं उसे कर पाऊंगा या नहीं। जब पुष्पलता का रोल मिला, तो मैं उत्सुक थी, क्योंकि मैंने सभी शहरी रोल किए हैं, कभी गांव की महिला की भूमिका नहीं निभाई है। बड़ी बात है यह रोल कर पाई और लोगों ने सराहा।"

अपनी कहानियों के जरिए कर लेती हैं मन की बात
निर्देशन और अभिनय करते वक्त खुद के लिए कहानियों के चुनाव पर आगे रेणुका कहती हैं कि मुझे लगता है कि निर्देशक के तौर पर अपनी कहानी पर अधिकार रहता है। मैं जो बातें कहना चाहती हूं, वो अपनी कहानियों के जरिए कहना चाहती हूं। अभिनय में मैं कहानी को नहीं, कहानी मुझे चुनती है। दोनों की अलग-अलग प्रक्रिया है। उसमें भी चुनाव इंगित करता है कि मैं किस तरह के किरदार और कहानियां पसंद करती हूं। मेरी अपनी झलक, जो आफर हो रहा है, उससे ज्यादा जो मैं बना रही हूं, उसमें है।
