नई दिल्ली, जेएनएन। छोटे पर्दे की मशहूर अभिनेत्री विभा भगत इन दिनों अपनी जिंदगी के बारे में खास खुलासा करने की वजह से चर्चा में हैं। टीवी सीरियल ससुराल सिमर का 2 में दिखाई दे रहीं विभा भगत ने बताया है कि बीते दो साल उनकी जिंदगी काफी संघर्ष से भरी रही है। हालांकि उन्हें टेलीविजन फिल्म इंडस्ट्री में ढेर सारा काम मिला, लेकिन दो साल उनकी हालत ऐसी थी कि उनके पास ठीक से खाने का इंतजाम करने ही भी हिम्मत नहीं थी।

इस बात का खुलासा खुद विभा भगत ने किया है। उन्होंने हाल ही में अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया से बात की। इस दौरान विभा भगत ने अपनी निजी जिंदगी के अलावा संघर्ष को लेकर ढेर सारी बातें कीं। अभिनेत्री ने अपने कठिन समय के बारे में कहा है कि एक समय था जब वह एक दिन में केवल एक बार खाने का इंतजाम कर पाती थीं। कभी-कभी एक फल या बिस्कुट का एक पैकेट खाकर भी उन्हें गुजारा करना पड़ता था। विभा भगत ने कहा कि अभिनेता इन चीजों के बारे में नहीं बोलते क्योंकि उन्होंने इस तरह की जिंदगी को चुना है।

 

 

 

 

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विभा भगत ने कहा, 'मैंने स्टैंड-अप कॉमेडी और थिएटर के साथ मनोरंजन जगत में अपना करियर शुरू किया था। फिर जब मुझे क्षेत्रीय टेलीविजन में मौका मिला तो मैंने उसे भुना लिया क्योंकि मैं अपनी प्रतिभा दिखाने में सक्षम होने के लिए बहुत उतावली थी। फिर जब मुझे नेशनल चैनलों से प्रस्ताव मिले और मुझे अपनी जगह बनाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था।'

 

 

 

 

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विभा भगत ने आगे कहा, 'पिछले दो साल पेशेरवर और व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए सबसे कठिन रहे हैं। मैंने अपने पिता को खो दिया और मुझे काम भी नहीं मिल रहा था। जिसके कारण न केवल मैं आर्थिक रूप से टूट गई थी, बल्कि भावनात्मक रूप से भी टूट गई थी। एक समय ऐसा आया जब मैं एक दिन में केवल एक टाइम के खाने का इंतजाम कर सकती थी, या एक फल या बिस्कुट का पैकेट का इंतजाम। लेकिन हम अभिनेता कभी भी इस तरह की चीजों के बारे में बात नहीं करते हैं क्योंकि हमने इस तरह का जीवन चुना है। लेकिन आखिरकार, दो साल बाद, ससुराल सिमर का हुआ।'

अभिनेत्री ने आगे कहा, 'उन दो सालों ने मुझे सिखाया कि मैं अपनी जिंदगी से वास्तव में क्या चाहती हूं। मैंने सेल्फ-ग्रूमिंग करके खुद पर ध्यान दिया और खुद को समय दिया। मुझे पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम और थायरॉइड है, इसलिए मैंने सुनिश्चित किया कि हर स्तर पर सामान्य रहें। इसके लिए मैंने घर पर हर दिन तीन घंटे की कसरत की और इस तरह से मुझे अपनी खोई चिंगारी वापस लाने में मदद मिली!'

विभा भगत ने आखिरी में कहा, 'मैंने पेटिंग की, ध्यान लगाया और खाना बनाना शुरू किया, सब कुछ किया जिससे मुझे अपने और अपने अस्तित्व के बारे में अच्छा महसूस होने लगा। मैं इस सच को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि मुझे चिंता के दौरे पड़ते थे, लेकिन किसी तरह मैं उस सब से उबर गई। मेरे दोस्त मुझे प्रेरित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं क्योंकि यह एक लंबी अवधि है और कोई भी इस तरह कठिन समय में टूट सकता है।'

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