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नई दिल्ली, जेएनएन। कलर्स चैनल पर प्रसारित होने वाला कार्यक्रम 'राम सिया के लव कुश' इन दिनों सुर्खियों में है। सीरियल सुर्खियों में बैन की मांग को लेकर है यानी आम जनता से लेकर सत्तारुढ़ पार्टियों के नेता भी इसपर बैन लगाने की मांग कर रहे हैं। पंजाब ने तो बैन लगा भी दिया है और सीरियल की टीम हाईकोर्ट पहुंची है, जहां कोर्ट ने बैन हटाने से मना कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस सीरियल पर बैन की मांग क्यों की जा रही है और इसमें ऐसा क्या दिखाया गया है... तो यहां देखें जवाब...

क्या है मामला?
दरअसल, कलर्स पर रात 8.30 बजे प्रसारित होने वाले सीरियल 'राम सिया के लव कुश' को लेकर वाल्मीकि समाज के लोगों ने आपत्ति दर्ज करवाई थी। समाज के लोगों का कहना है कि इसमें दिखाए गए कई सीन से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस वजह से उन्होंने विरोध किया और पंजाब में भारी विरोध-प्रदर्शन हुआ। कई जगहों पर तो विरोध हिंसक भी हो गया।

क्या आपत्तिजनक दिखाया गया?
बताया जा रहा है कि वाल्मीकि समाज का आरोप है ये सीरियल मूल रामायण के हिसाब से नहीं बना है और लव-कुश सीता के पास रहते थे और वाल्मीकि आश्रम में रहते थे। हालांकि सीरियल में लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बेटे भी आश्रम में ही पढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा नहीं है। वहीं लव और कुश को मॉडर्न करने का भी आरोप है। इस तरह लोगों के वास्तविकता से अलग कंटेंट दिखाए जाने का आरोप है।

पंजाब ने लगाया बैन

वहीं पंजाब में विरोध होने के बाद पंजाब सरकार ने कार्यक्रम पर बैन लगा दिया था। वहीं वाल्मीकि समुदाय का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारत सरकार को पत्र लिखा है कि वे डीटीएच चैनल्स को निर्देश देकर इस सीरियल को तुरंत बंद कराएं। पंजाब सरकार द्वारा धारावाहिक के प्रसारण पर शनिवार को लगाई गई रोक को हाई कोर्ट ने सोमवार को हटाने से इंकार कर दिया था।

सीरियल है काल्पनिक

दरअसल, 'राम सिया के लव कुश' प्रोग्राम शुरू होने से पहले डिस्क्लेमर चल जाता है, जिसमें लिखा होता है- 'राम सिया के लव कुश' राम और सीता के दोनों पुत्रों की स्वत: को खोजने तथा अपने माता-पिता को एक साथ लाने की गाथा है। यह एक काल्पनिक धारावाहिक है, जिसका निर्माण केवल मनोरंजन प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है। इस धारावाहिक के माध्यम से चैनल किसी भी पौराणिक चरित्र को अपमानित करने का उद्देश्य नहीं रखता है ताकि दर्शकों की भावनाएं आहत न हों, साथ ही इसमें दर्शाये गए किसी भी घटना की तथ्यात्मक सटीकता का दावा भी नहीं करता है।'

 

Posted By: Mohit Pareek

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