'हम इंसान हैं, भगवान नहीं...', दशहरा पर अंदर के 'रावण' से लड़ने के लिए मनीष वाधवा-समीक्षा ने लिया प्रण
दशहरा के अवसर पर टीवी स्टार्स मनीष वाधवा और समीक्षा जायसवाल ने अपने भीतर के रावण यानी कमजोरियों और अहंकार पर बात की है।

दशहरा पर टीवी सितारों का प्रण
HighLights
आंतरिक बुराइयों से लड़ने की प्रेरणा है दशहरा
मनीष वाधवा ने दशहरा पर लिया एक प्रण
समीक्षा जायसवाल ने पाया अहंकार पर काबू
दीपेश पांडेय, मुंबई। रावण सिर्फ रामायण (Ramayan) का एक पात्र नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के भीतर छिपा एक अवगुण भी है। कभी अहंकार के रूप में तो कभी आत्मविश्वास की कमी के रूप में।
हर साल दशहरा के मौके पर रावण दहन अपने अंदर झांकने और मन में छिपे दुर्गुणों से लड़ने की भी प्रेरणा देता है। हर इंसान के भीतर अच्छाई के राम और कमजोरियों के रावण के बीच एक युद्ध चलता रहता है।
कई टीवी सितारों ने दैनिक जागरण के साथ बातचीत में अपने भीतरी रावण यानी कमजोरियों और अहंकार पर बात की है...
मनीष वाधवा ने लिया प्रण
धारावाहिक हस्तिनापुर के वीर में भीष्म पितामह की भूमिका निभाने वाले अभिनेता मनीष वाधवा कहते हैं, "इंसान को बुराइयों का पुतला कहा गया है और मैं भी अलग नहीं हूं। हर इंसान में गुस्सा, अहंकार, ईर्ष्या, निंदा और लालच जैसी बहुत सारी बुराइयां भरी होती हैं। एक बार कुछ गलत होने पर कोशिश होती है कि दोबारा ऐसा न करूं। हम इंसान हैं भगवान नहीं तो कुछ गलतियां बार-बार होती रहती हैं।

हम हर साल दशहरा के मौके पर जो रावण को जलता हुआ, रावण पर राम की विजय को देखते हैं, वो बार-बार यही दर्शाता है कि हमें हर बार अपने अंदर के उन रावण रूपी बुराईयों को मारना होगा। अहंकार रूपी रावण कई बार मन में आ जाता है कि देखो मैंने फलां काम कर लिया या इतना बड़ा काम कर लिया। यह तो इंसान का एक स्वाभाविक अवगुण है तो कई बार मेरे अंदर भी यह आ जाता है। तब आपके अंदर का कलाकार समझाता है, आपको दूसरी चीजों के बारे में न सोचकर बस अपना काम करना चाहिए।"
राम जैसा वचन निभाने की कोशिश
भगवान राम का उदाहरण देते हुए एक्टर ने कहा, "किसी और को देखकर मन में अहंकार या गुस्सा नहीं लाना चाहिए। इसलिए मैं कोशिश करता हूं कि इन बुराइयों पर नियंत्रण कर सकूं। जिस तरह भगवान श्रीराम ने वनवास जाकर अपना वचन निभाया, उसी तरह मैं भी कुछ चीजें न करने, कुछ बुराइयों से दूर रहने का प्रण ले लेता हूं। हालांकि, वो तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम थे, अतः कोई उनकी बराबरी नहीं कर सकता है।
हमसे तो प्रण लेने के बाद भी गलतियां हो जाती हैं। जैसे हमारे कपड़े, जूते या दूसरे सामान गंदे हो जाने पर हम उनको धोते हैं, वैसा ही हमारा मन भी है। मन में भी तमाम गंदगी आ जाती हैं, उसे भी बार-बार धोने और अच्छी बातें उसमें डालने की आवश्यता है। दशहरा का त्योहार हर साल हमें यही सिखाता है, इसीलिए यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
अपनी गलती स्वीकार करना जरूरी
धारावाहिक अप्सरा में सुनहरी की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री समीक्षा जायसवाल कहती हैं, "मेरे लिए दशहरा उम्मीद और साहस का त्योहार है। यह याद दिलाता है कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न लगे, उसके सामने खड़े होने का हौसला रखना चाहिए। मां दुर्गा की शक्ति और दूसरों की रक्षा करने का भाव मुझे हमेशा प्रेरित करता है।"
पहले खुद पर करती थीं संदेह
समीक्षा ने आगे बताया, "किसी नए चुनौतीपूर्ण काम की शुरुआत से पहले कभी-कभी मुझे अपनी क्षमताओं पर संदेह होता था। धीरे-धीरे मैंने स्वयं पर भरोसा करना सीखा है और इस आदत पर अब भी काम कर रही हूं। मेरा मानना है कि हिम्मत का मतलब डरना नहीं, बल्कि डर के बावजूद आगे बढ़ना है। भगवान श्रीराम ने रावण रूपी बुराई पर विजय के लिए वनवास लिया, पर संयम और धैर्य बनाए रखा।
इसलिए मैंने भी सोचा कि क्या मैं यह कर पाऊंगी? फिर सोचने के बजाय अपनी तैयारी और अभ्यास पर ध्यान देना शुरू किया। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। अब किसी काम को मुश्किल समझकर पीछे हटने के बजाय, उसे सीखने और छोटे-छोटे कदमों में पूरा करने की कोशिश करती हूं। खुद को समय देना और धैर्य रखना भी सीखने का हिस्सा है।"

अहंकार पर कैसे काबू पाती हैं एक्ट्रेस?
एक्ट्रेस ने कहा, "जब लगातार तारीफ मिलती है तो कभी-कभी यह अहंकार आ सकता है कि हम जो कर रहे हैं, वो सब सही है। ऐसे में दूसरों की राय सुनना और अपनी गलती स्वीकार करना जरूरी है। मैं स्वयं को याद दिलाती रहती हूं कि सीखने की संभावनाएं हमेशा रहती हैं। मेरे अपने भी मुझे ईमानदारी से बताते हैं कि मैं कहां बेहतर कर सकती हूं।
हर छोटी-बड़ी सफलता के बाद मैं हमेशा याद रखती हूं कि पर्दे पर भले ही कलाकार दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे पूरी टीम की मेहनत होती है। सफलता कभी किसी एक इंसान की नहीं होती। यह मुझे जमीन से जुड़े रहने में मदद करता है। वैसे तो दशहरा पर मेरी कोशिश रहती है कि परिवार के साथ कुछ समय बिता सकूं। शूटिंग से समय मिलता है तो अपनों के साथ त्योहार मनाना अच्छा लगता है।"
