नई दिल्ली। वीना मलिक को बड़े स्क्रीन पर देखने की ख्वाहिश है तो आप इस फिल्म को देख सकते हैं पर बहुत ज्यादा उम्मीद के साथ मत जाइएगा।

आम इंसान की जिंदगी में कुछ छोटे बड़े मगर बेहद स्पेशल ड्रीम्स होते हैं जिन्हें वो कुछ भी करके पूरा करना चाहता है। इसके वो पूरा संघर्ष करता है पर जरूरी नहीं कि ये सपने आसानी से पूरे हो जाएं। कभी कभी इनके पूरा होने में आप अपना बहुत कुछ या सब कुछ गंवा देते हैं।

प्रॉस्टीट्यूशन से जुड़ी इस फिल्म में वीना मलिक एक बी ग्रेड प्रॉस्टीट्यूट के रोल में हैं। उनका एक्सेंट और एक्सप्रेशन दोनों ही फिल्म के साथ रिलेट होता है पर एक बेहद अलग अंदाज में जिसे शब्दों में एक्सप्रेस करना कठिन है। अपने करेक्टर को जस्टीफाई करने के लिए उन्होंने अपने एक्सपोजर के शौक को जी भर के इस्तेमाल किया है। कहानी में कुछ नया नहीं है। आर्य बब्बर, रिया सेन और राजन वर्मा ने अगर अपने को एक्टर मुरली शर्मा से थोड़े से एक्टिंग टिप्स ले लिए होते तो शायद कुछ बेहतर कर पाते।

फिल्म में हर ओर खुलापन है कपड़ों में, जेस्चर में और लेंग्वेज में भी, इतना ज्यादा खुलापन आंखों और कानों दोनों को चुभता है। फिल्म में अमजद नदीम और विवेक कर ने म्यूजिक दिया है जो साधारण है। बप्पी लहरी, राहत फतह अली और रेखा भारद्वाज की आवाजें मिल कर भी कुछ खास नहीं कर सकी हैं। मीका सिंह तो हर जगह अपनी जगह तलाश लेते हैं पर सांग्स की लिरिक्स में दम ही नहीं है।

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