Shatak Movie Review: वंदे मातरम की गूंज और पूर्ण स्वराज का संकल्प, संघ के सफर से परिचित कराती है फिल्म
फिल्म 'शतक' RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और संघ के शताब्दी वर्ष के इतिहास को दर्शाती ...और पढ़ें

संघ के 100 साल का इतिहास बताती 'शतक'
HighLights
संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार के जीवन पर आधारित फिल्म
AI का इस्तेमाल कर बनाई गई फिल्म
कई पहलुओं को उजागर करती है मूवी
फिल्म रिव्यू : शतक
निर्माता : वीर कपूर
निर्देशक : आशीष मल्ल
अवधि : 112 मिनट
स्टार : तीन
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई: फिल्म की शुरुआत में एक संवाद है कि 'भगवा वो ध्वज है जिसके तले शिवाजी महाराज ने हिंदुओं को एकजुट किया।' यही भगवा ध्वज बालक केशव बलिराम हेडगेवार के मन में राष्ट्रभाव की लौ प्रज्वलित करता है। आगे चलकर यही प्रेरणा उन्हें 27 सितंबर 1925, विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना की ओर ले जाती है। संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष के अवसर पर बनी फिल्म 'शतक' (Shatak) एक वैचारिक और ऐतिहासिक यात्रा को परदे पर उतारने का प्रयास है।
निर्माता वीर कपूर और निर्देशक आशीष मल्ल की यह फिल्म संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और उनके विचारों पर केंद्रित है। फिल्म (Shatak Movie Review) का मूल उद्देश्य संघ की उत्पत्ति, उसकी कार्यप्रणाली और उसके विस्तार की प्रक्रिया को दर्शकों तक पहुंचाना है। डॉ. हेडगेवार संघ के पहले सरसंघचालक बने और उन्होंने संगठन को सक्रिय राजनीति से दूर रखते हुए सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में कार्य करने की दिशा दी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से निर्मित इस फिल्म में हेडगेवार के बचपन से लेकर उनके वैचारिक विकास तक की घटनाओं को तेज गति से प्रस्तुत किया गया है। प्लेग के कारण माता-पिता के निधन के बाद नागपुर के प्रभावशाली नेता डॉ. बी. एस. मुंजे का संरक्षण, स्कूल से 'वंदेमातरम्' बोलने पर निष्कासन, मेडिकल शिक्षा के लिए कोलकाता प्रवास और वहां क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति से जुड़ाव, ये सभी प्रसंग उनके व्यक्तित्व की दृढ़ता को रेखांकित करते हैं।
यह भी पढ़ें- O'Romeo Movie Review: शानदार शाहिद, सादा तृप्ति... भरपूर एक्शन के बीच बेअसर है 'रोमियो' का इश्क
फिल्म में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से प्रेरणा, कांग्रेस में सक्रियता, नागपुर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव, असहयोग आंदोलन में भागीदारी और ब्रिटिश शासन द्वारा कारावास जैसे प्रसंग को दर्शाते हुए मालाबार विद्रोह और कांग्रेस से मोहभंग के बाद हेडगेवार द्वारा संघ की स्थापना को फिल्म निर्णायक मोड़ के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें लक्ष्मीबाई केलकर द्वारा राष्ट्रसेविका समिति की स्थापना, महात्मा गांधी के साथ उनका संवाद भी आता है जिसमें राष्ट्रपिता संघ के कार्यों से प्रभावित होते हैं।
कहानी आगे बढ़ते हुए संघ के विस्तार की जिम्मेदारी माधवराव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को सौंपे जाने और संगठन के विस्तार की कथा को सामने लाती है। इस दौरान कलकत्ता में डायरेक्ट एक्शन डे में मुहम्मद अली जिन्ना की मुस्लिम लीग द्वारा हजारों हिंदुओं का कत्लेआम करने का उल्लेख भी फिल्म में आता है। देश विभाजन के बाद भी संघ की तत्परता दिखती है। कश्मीर का मुद्दा भी कहानी में प्रमुखता से उभारा गया है। इसमें सिलवासा अभियान जैसे कई अनछुए पहलू भी है। इसके तहत दादरा और नगर हवेली को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने में स्वयंसेवकों ने अहम भूमिका निभाई थी।
गुरुजी के नेतृत्व में संघ का प्रसार, उस पर लगे प्रतिबंध और प्रतिबंध हटाने के प्रयासों और 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में स्वयंसेवकों की भागीदारी जैसे मुद्दों को भी छूती है। हालांकि घटनाओं की संख्या अधिक होने के कारण कथा कई स्थानों पर बहुत तेजी से आगे बढ़ती है, जिससे भावनात्मक ठहराव कम महसूस होता है।
चूंकि यह फिल्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से बनाई गई है, इसलिए फिल्म के कुछ सीन्स में ऐतिहासिक चेहरों की समानता प्रभावशाली लगती है, लेकिन भावनात्मक गहराई शून्य रह जाती है। यही कारण है कि यह एक फीचर फिल्म से अधिक डाक्यूमेंट्री का आभास देती है। फिल्म में विनायक दामोदर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस जैसी कई हस्तियों का जिक्र आता है, पर उन्हें अपेक्षित विस्तार नहीं दिया गया है।
फिल्म के संवाद कई जगह प्रभावी हैं और पृष्ठभूमि में बजता सुखविंदर सिंह का गाया गीत 'जय जय हिंदुस्तान, भगवा है अपनी पहचान' काफी बेहतर हैं। फिल्म संघ की विचारधारा और संगठनात्मक संरचना को समझने के इच्छुक दर्शकों के लिए उपयोगी साबित होती है। यदि आप संघ के इतिहास से परिचित हैं, तो घटनाओं से सहज जुड़ाव महसूस करेंगे।
फिल्म के अंत में इसके सीक्वल की घोषणा इस वैचारिक यात्रा के अगले अध्याय की ओर संकेत करती है। अभी इसमें शतक वर्ष के कुछ अध्यायों का उल्लेख नहीं हुआ है। कुल मिलाकर 'शतक' एक वैचारिक दस्तावेज की तरह सामने आती है, जो संघ के शताब्दी वर्ष में उसके इतिहास, विचार और विस्तार को समेटने का प्रयास करती है। भावनात्मक गहराई भले सीमित हो, पर जानकारी की दृष्टि से यह फिल्म अपने उद्देश्य में काफी हद तक सफल कही जा सकती है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।