- पराग छापेकर

कलाकार- करीना कपूर, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, शिखा तलसानिया, सुमित व्यास आदि।

निर्देशक- शशांक घोष

निर्माता- अनिल कपूर, रिया कपूर, एकता कपूर, निखिल द्विवेदी, शोभा कपूर। 

जागरण डॉट कॉम रेटिंग- ढाई स्टार (**1/2)

बॉलीवुड में दोस्तों की कहानियों पर ढेर सारी फिल्में बनी हैं। मुख्यतः यह फिल्में लड़कों की दोस्ती के ऊपर ज्यादा बनी हैं। 'शोले' के जय-वीरू से लेकर 'ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा' तक दोस्ती का यह सफर लगातार चल रहा है, मगर लड़कियों की दोस्ती पर बहुत कम फिल्में बनी हैं। खास तौर पर आज के परिप्रेक्ष्य में 'तनु वेड्स मनु', 'एंग्री इंडियन गॉडेस', 'आयशा' और 'पार्च्ड' जैसी फिल्में स्त्रियों के संसार में झांकने का मौका देती हैं। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए निर्देशक शशांक घोष की फिल्म 'वीरे दी वेडिंग' आई है।

यह कहानी है चार सहेलियों, कालिंदी पुरी (करीना कपूर), अवनी शर्मा (सोनम के आहूजा), साक्षी सोनी (स्वरा भास्कर) और मीरा सूद (शिखा तलसानिया) की। यह चारों बचपन की सहेलियां है और तकरीबन सभी अभिजात्य वर्ग से हैं। पूरी फिल्म इन चारों की दोस्ती और इनकी अंतर्यात्रा पर आधारित है। 'वैसा भी होता है पार्ट 2' और 'ख़ूबसूरत' जैसी ब्रिलियेंट फिल्में बनाने वाले शशांक घोष ने इस बार मनोरंजक मगर साधारण फिल्म का निर्देशन किया है। इस फिल्म की खासियत करीना कपूर की वापसी और करीना-सोनम-स्वरा जैसे सितारों का एक साथ होना तो है ही, साथ ही इन सहेलियों की दोस्ती में तड़का लगाया है बालाजी वाली एकता कपूर ने, जो फ़िल्म की को-प्रोड्यूसर हैं।

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ऐसा लगता है कि एकता इन दिनों सिर्फ और सिर्फ़ यौनाचार को बढ़ावा दे रही हैं। प्लेटफॉर्म चाहे कोई भी हो, एकता का प्रयास उसमें यौन संबंधी मसाले डालना भर रह गया है। 'वीरे दी वेडिंग' में भी जो भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उसका इस्तेमाल करने के लिए दोस्तों की फिल्म बनाने वाले कई फिल्मकार भी डर जाएंगे। इस तरह की भाषा अगर दोस्तों की फिल्म में इस्तेमाल की जाती तो सेंसर समेत कई महिला मुक्ति मोर्चा फिल्म निर्माता और निर्देशक के पीछे पड़ जाते हैं, मगर 'वीरे दी वेडिंग' के संवाद द्विअर्थी नहीं हैं, बल्कि सीधे-सीधे कामुकता के वाहक हैं। 

'वीरे दी वेडिंग' 'सेक्स इन द सिटी', प्यार का पंचनामा और 'ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा' का परफेक्ट मिक्सचर है! फिल्म मनोरंजक है और शायद व्यापार भी कर जाए मगर ए सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद भाषा की गिरावट आने वाले समय में कितने निचले स्तर पर उतर सकती है, उसका रास्ता 'वीरे दी वेडिंग' ने प्रशस्त कर दिया है। अभिनय की बात करें तो करीना कपूर और स्वरा भास्कर पूरी फिल्म पर छाए रहे। सोनम कपूर और शिखा तलसानिया ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है! बाकी सब कलाकार भी अपने अपने किरदारों में जंचे हैं।

प्रोडक्शन डिपार्टमेंट ने फिल्म को भव्यता प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी उम्दा है। एडिटिंग पर थोड़ा सा और काम किया जाता तो बेहतर होता। इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी काटी जा सकती थी। कॉस्ट्यूम शानदार रहे। फिल्म के सभी गाने कर्णप्रिय हैं। कुल मिलाकर 'वीरे दी वेडिंग' एक साधारण मनोरंजक फिल्म है, जिसे एक बार देखा जा सकता है। भाषा के अश्लील इस्तेमाल के चलते यह पूर्णता वयस्क फिल्म है। इसका ध्यान रखा जाना चाहिए, वरना बच्चों के सवालों के जवाब देते नहीं बनेगा।

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By Manoj Vashisth