नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय सिनेमा में 80 और 90 का दौर जिसे मसाला फिल्मों का दौर कहते हैं। उस वक्त एक्शन की भरमार, बदले की भावना और इस हिंसा मैं उलझा हुआ प्यार का फूल यह फार्मूला ज्यादातर फिल्मों में देखने मिलता था। फार्मूला फिल्मों को सलामी देने के लिए निर्देशक मिलाप जवेरी ने मरजावां फिल्म बनाई है। यह एक अच्छी बात है कि निर्देशक के दिमाग में समय यह बात क्लियर थी कि आखिर वह बना क्या रहे हैं। उन्होंने पूरी फिल्म को 80 के दशक का ही लुक दिया है।

यह कहानी है रघु की (सिद्धार्थ मल्होत्रा) जो अन्ना (नासर ) का ज़र खरीद गुलाम है क्योंकि अन्ना ने उसे गटर से उठाके पाल पोस कर बड़ा किया है। और इसीलिए अन्ना की गुंडागर्दी में वह चुपचाप अन्ना का सबसे खतरनाक हथियार बना हुआ है। और इसीलिए अन्ना उससे प्यार भी बहुत करता है। मगर अन्ना का बेटा विष्णु (रितेश देशमुख) रघु से बहुत जलता है उसे लगता है कि उसका बौना कद के कारण उसका बाप उससे ज्यादा रघु से प्यार करता है। विष्णु पूरा हैवान है पर अन्ना के कारण रघु को कुछ बोल नहीं पाता है। इस बीच रघु को बस्ती की एक लड़की जोया (तारा सुतारिया) से प्यार हो जाता है जो बोल नहीं पाती।  वहीं दूसरी ओर बार डांसर आरजू (रकुल प्रीत) रघु से प्यार करती है। अपनी असुरक्षा के चलते विष्णु रघु की दुनिया खत्म करना चाहता है। नफरत की यह आग आगे चलकर क्या गुल खिलाती है यही कहानी है फिल्म मरजावां की।

सब कुछ एकदम ठीक था मगर एक बात में स्क्रिप्ट राइटर और निर्देशक मिलाप जवेरी थोड़ा सा चूक गए भले ही फार्मूला फिल्में एक जैसी बनती थी, मगर उसमें कहानी का फ्लो टूटता नहीं था। यही सबसे बड़ी कमी है फिल्म मरजावां की। इंटरवल तक दृश्यों का एक दूसरे से सामंजस्य का अभाव नजर आता है।इसीलिए फिल्म की कहानी टुकड़े-टुकड़े में आगे बढ़ती है। उबाऊ हो जाती है। आरजू के डायलॉग्स पर हंसी आती है। जोया को मुक बधिर क्यों रखा गया है यह बात समझ से परे है। वह बोल लेती तब भी कोई फर्क नहीं पड़ता।

अभिनय की बात करें तो सिद्धार्थ में एक चार्म है। उन्हें जिस दिन सही फिल्म मिल गई बस सुपरस्टार ही साबित होंगे। नासर अन्ना के किरदार में कमाल करते हैं। रितेश देशमुख मैं इस किरदार पर काफी मेहनत की है जो साफ नजर आती है। तारा सुतारिया को खूबसूरत दिखने के अलावा और कोई काम नहीं दिया गया। वहीं रकुल प्रीत का किरदार उभर कर सामने नहीं आता है। कुल मिलाकर मरजावां एक साधारण फिल्म है, संभावना है सिंगल स्क्रीन में शायद दर्शकों को यह पसंद आए। मल्टीप्लेक्स ऑडियंस के लिए बिल्कुल ही सही ऑप्शन नहीं है।

कलाकार- सिद्धार्थ मल्होत्रा, तारा सुतारिया, रकुल प्रीत, रितेश देशमुख और नासर

निर्देशक- मिलाप जवेरी

निर्माता- निखिल आडवाणी, दिव्या खोसला कुमार, भूषण कुमार, कृष्ण कुमार

वर्डिक्ट- ** 

Posted By: Vineet Sharan

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