पराग छापेकर, मुंबई। आज के दौर के बदलते सिनेमा में कहानियों में भले ही उस तरह का हीरोइज्म ना हो कि एक हीरो ने 25-25 लोगों को उठाकर पटक दिया है, उसमें कुछ सुपरमैन टाइप की क्वालिटीज हैं, आजकल जिंदगी से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याओं पर फिल्में बन रही हैं और दर्शक उस पर मुहर भी लगा रहे हैं। कुछ ऐसी ही फिल्म है निर्देशक देव मित्रा बिसवाल की 'मोतीचूर चकनाचूर'।

क्या है फिल्म की कहानी :

36 साल के पुष्पेंद्र त्यागी (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) दुबई में नौकरी करते हैं और अपने घर भोपाल आए हुए हैं उसके जीवन का एक ही लक्ष्य है किसी तरह उसकी शादी हो जाए, समस्या यह है कि उसकी मां को अपने बेटे के लिए तगड़ा दहेज चाहिए और उस दहेज से वह अपनी बेटी की शादी कर सके! उन्हीं के पड़ोस में रहने वाले परिवार में अनीता (अतिया शेट्टी) उर्फ एनी रहती है। जिसका एक ही सपना है शादी करके वह विदेश जाएगी, और इसलिए वह कई सारे रिश्ते ठुकरा चुकी है! एनी अपने मां-बाप और मौसी के साथ अपनी ही दुनिया में रहती है।

आपको एक शादी की चिंता है वही बिन ब्याही मौसी उसकी मार्गदर्शक और दोस्त हैं। पुष्पेंद्र की बहन एनी की दोस्त है। अपनी मौसी के कहने पर अपने विदेश जाने के सपने को साकार करने के लिए एनी, पुष्पेंद्र को फ़ांस लेती है। आगे क्या होता है इसी ताने-बाने पर बुनी गई है 'मोतीचूर चकनाचूर'।

कैसी है स्क्रिप्ट :

डायरेक्ट देव मित्रा विश्वास ने स्क्रिप्ट पर बहुत जबरदस्त काम किया है जो हर दृश्य में साफ नजर आता है एक मजबूत स्क्रिप्ट और एक से एक मंझे कलाकार को मनो रंजक बनाता है। देव मित्राने भोपाल के मध्यमवर्गीय परिवारों की एक अलग ही दुनिया दुनिया दर्शकों के सामने सफलता से पेश की है!

अपने-अपने किरदार में फिट है नवाज और आतिया :

अभिनय की बात करें तो नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक समर्थ कलाकार हैं उनका सहेज अभीनय पुष्पेंद्र त्यागी को एक प्यारा इंसान बना देता है। आतिया शेट्टी पहली बार एक ऐसे कलाकार के रूप में सामने आती हैं अपने क्राफ्ट पर कंट्रोल है साथ ही किरदार को लेकर उनका आत्मविश्वास देखते बनता है। यह फिल्म उनके लिए टर्निंग प्वाइंट साबित होगी

इन दोनों कलाकारों के साथ ही फिल्म में तमाम सारे मंजे हुए कलाकार मौजूद हैं भले ही वह विवेक मिश्रा हो विभा छिब्बर नवनी परिहार जैसे कलाकार हो या वह तमाम कलाकार जिनका नाम प्रोड्यूसर ने आर्टिस लिस्ट में नहीं डाला सभी के सभी बेहतरीन कलाकार इस फिल्म में मौजूद हैं।

फिल्म का संगीत सिनेमैटोग्राफी एडिटिंग और कॉस्टयूम डिपार्टमेंट सहित सभी विभागों ने अपना काम बेहतरीन ढंग से अंजाम दिया है। सब कुछ बेहतरीन होते हुए सिर्फ एक समस्या है की जरूरत से ज्यादा बुंदेलखंडी भाषा का इस्तेमाल, भले ही एक अलग दुनिया बनाने के लिए किया गया हो लेकिन दर्शकों को समझ में आएगा या नहीं ये देखना होगा। कुल मिलाकर मोतीचूर चकनाचूर एक मनोरंजक फिल्म है जिसका आनंद आप उठा सकते हैं

रेटिंग : 3:30 

Posted By: Nazneen Ahmed

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