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Maa Behen Review: छोटी सोच पर करारी चोट है माधुरी दीक्षित की 'मां-बहन', फिल्म देखने से पहले पढ़ें रिव्यू

By Priyanka SinghEdited By: Ankit Tomar
Published: Thu, 04 Jun 2026 01:44 PM (IST)

Netflix पर रिलीज हुई फिल्म 'Maa Behen Movie' में माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धारणा दुर्गा मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म देखने से पहले जरूर पढ़ें हमारा ये रिव्यू

'मां-बहन' हुई रिलीज, पढ़ें ये रिव्यू     (Photo: Netflix)

'मां-बहन' हुई रिलीज, पढ़ें ये रिव्यू (Photo: Netflix)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

फिल्म – मां बहन
मुख्य कलाकार – माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह, शार्दुल भारद्वाज
निर्देशक – सुरेश त्रिवेणी
अवधि – दो घंटा सात मिनट
प्रसारण प्लेटफार्म – नेटफ्लिक्स
रेटिंग – तीन

प्रियंका सिंह, मुंबई। फिल्मी शुक्रवार में इस हफ्ते कई नई फिल्में और सीरीज रिलीज हुई हैं और इन्हीं में से एक फिल्म आई मां-बहन, जिसका प्रसारण सीधे नेटफ्लिक्स पर हुआ है। 'तुम्हारी सुलू' और 'जलसा' जैसी फिल्मों में महिलाओं को सशक्त अंदाज में दिखा चुके निर्देशक सुरेश त्रिवेणी फिर एक नए तरीके की कहानी 'मां बहन' (Maa Behen) फिल्म में लेकर आए हैं। अब कैसी है ये फिल्म (Maa Behen Review), जानने के लिए पढ़िए पूरा रिव्यू

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी मां रेखा (Madhuri Dixit) और उसकी दो बेटियों जया (Tripti Dimri) और सुषमा (Dharna Durga) की। पति की मौत के बाद रेखा घर चलाने के लिए कभी साइबर कैफे चलाती है, तो कभी कोई और काम करती है। आखिरकार वह वाइन की दुकान पर काम करती है।

वहीं जया शादीशुदा है, मां बनना चाहती है, लेकिन IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन - आधुनिक प्रजनन तकनीक) के लिए उसके पास पैसे नहीं है।

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Madhuri Rekha

दूसरी तरफ सुषमा, जया के पति यानी अपने जीजा (Shardul Bhardwaj) के साथ रील बनाकर वायरल होना चाहती है। तीनों अपनी कठिनाइयों से गुजर रहे हैं। एक दिन रेखा रात में रोते हुए अपनी दोनों बेटियों को फोन करती है कि उसके घर में पड़ोसी गुप्ता जी (Ravi Kishan) की मौत हो गई है। आगे की कहानी के लिए फिल्म देखनी होगी।

कैसा है फिल्म का निर्देशन?

निर्देशक सुरेश त्रिवेणी (Suresh Triveni) ने पूजा तोलानी के साथ मिलकर इस कहानी को लिखा है और तुम्हारी सुलू एक बार फिर महिला पात्रों को नए तरीके से अपनी फिल्म में गढ़ा है। घर में बिना किसी पुरुष के रह रही अकेली महिलाओं को लेकर मोहल्ले के लोगों की सोच, उनकी स्वतंत्र सोच, कपड़े पहनने के तरीकों के कारण उनके चरित्र पर सवाल उठा देना, एक महिला का ही दूसरी महिला का दुश्मन होना, उनके लिए डायन जैसे शब्दों का प्रयोग आसानी से कर लेना, ऐसे कई मुद्दों को समेटने का प्रयास किया है।

Jatyare

सुरेश ने बड़े ही स्टाइलिश तरीके से पात्रों को स्थापित करने के लिए छोटे-छोटे सीन बनाए हैं, जैसे पति के जाने के बाद अकेली रेखा जमीन पर गिरे एक पैंपलेट पर चलकर जाती है, जिस पर लिखा है क्या आप अकेले हैं? या फिर रेखा, जया और सुषमा के लिए घर की दीवारों पर लोगों की लिखी गंदी सोच को साफ करने वाले सीन हों।

बिना समय बर्बाद किए सुरेश सीधे कहानी पर आते हैं, जो इसे दिलचस्प बनाता है। फिल्म का क्लाइमेक्स बढ़िया है, जो महिलाओं को कहीं से अबला नारी वाले जोन में नहीं ले जाता है।

Dharna

दमदार है कलाकारों का अभिनय

अभिनय की बात करें, तो माधुरी दीक्षित, रेखा के पात्र को मजबूती से पकड़कर रखती हैं। पुरुषों की बुरी नजरों, अकेलेपन की पीड़ा और डायन जैसे नाम मन में रखकर चेहरे पर बिंदास महिला का मुखौटा और दो बेटियों की मां होने की चुनौती को बखूबी निभाती हैं। दोनों बेटियों के साथ उनकी कॉमिक टाइमिंग भी कमाल की है।

अपने ससुराल से परेशान जया के रोल में तृप्ति डिमरी प्रभावित करती हैं, पति को अपने घर से भगाने का उनका मोनोलॉग मजेदार है। उसमें वह जया के सारे दर्द को कॉमेडी के साथ बयां कर जाती हैं। इंफ्लूएंसर धरना दुर्गा की भले ही यह पहली फिल्म हो, लेकिन वह ऐसा महसूस नहीं होने देती हैं।

ravi kishan

गुप्ता जी के रोल में रवि किशन चौंकाएंगे, क्योंकि ट्रेलर के मुकाबले फिल्म में उनका पात्र बेहद अलग है। जीजा जी के रोल में शार्दुल भारद्वाज का काम बढ़िया है। गुप्ता आंटी के रोल में गीतांजलि कुलकर्णी हंसाती हैं। गुप्ता जी के साले और पुलिस अफसर के छोटे से रोल में अरुणोदय सिंह (Arunoday Singh) याद रह जाते हैं।

कहां चूकी फिल्म?

हालांकि कई ऐसे दृश्य हैं, जो फिल्म को भटका भी देते हैं, जिसमें अकेलेपन के कारण रेखा का दूसरे पुरुष के साथ संबंध रखना और गर्भवती हो जाना। सच से पर्दा उठने के बाद उस पुरुष का ठग निकल जाना, इस पूरे सीन का औचित्य समझ नहीं आता है। छोटे से शहर में रहनी वाली रेखा का पात्र इतना बिंदास कैसे है, उसके पीछे भी एक छोटी सी कहानी होती तो पात्र से और लगाव हो जाता।

Maahe

ओवरऑल अगर 'मां-बहन' आपकी बिंज वॉच लिस्ट में शुमार होती है और इस हफ्ते आप एक नई कहानी देखने का मन बना रहे हैं, तो आप इसे जरूर देख सकते हैं।

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