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Hai Jawani To Ishq Hona Hai Review: पुराने फॉर्मूलों से रची बसी, गोविंदा-सलमान की मूवीज की दिलाएगी याद

By Smita SrivastavaEdited By: Tanya Arora
Published: Fri, 05 Jun 2026 12:56 PM (IST)

वरुण धवन की 'है जवानी तो इश्क होना है' पेद्दी के एक दिन बाद सिनेमाघरों में आ गई है। हालांकि, ...और पढ़ें

है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू/ फोटो- Jagran Graphics

है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू/ फोटो- Jagran Graphics

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स्मिता श्रीवास्‍तव, मुंबई। पिछले तीन दशक से ज्‍यादा समय से फिल्‍मों में सक्रिय फिल्‍ममेकर डेविड धवन ने हिंदी सिनेमा को आंखें, शोला और शबनम, जुड़वा, कुली नंबर 1, बीवी नंबर 1 जैसी कई हिट कॉमेडी फिल्‍में दी हैं। 'है जवानी तो इश्‍क होना है' उनके द्वारा निर्देशित 46वीं फिल्‍म है। कोरोना काल के बाद विश्व सिनेमा तक पहुंच ने दर्शकों की अपेक्षाओं को भी बदल दिया है।

ऐसे में डेविड धवन निर्देशित 'है जवानी तो इश्‍क होना है' जिन गलतफहमियों और संबंधों की उलझनों को हास्य के रूप में पेश करती है, वे मनोरंजन से ज्यादा अविश्वसनीय और उबाऊ लगती हैं। जो फॉर्मूला कभी दर्शकों को गुदगुदाने में सफल रहता था, वही आज अपनी चमक खो चुका महसूस होता है।

प्रेमिका और पत्नी के बीच फंसे जस की कहानी

कहानी यूं है कि जस (वरुण धवन) और उसकी पत्नी बानी (मृणाल ठाकुर) तलाक लेने की कगार पर हैं। दरअसल शादी के पांच साल हो चुके हैं। जस पिता बनने का इच्‍छुक है, लेकिन बानी अपने करियर पर ध्यान देना चाहती है। वह जस से जीवन में आगे बढ़ने को कहती है। जस भी लंदन पहुंच जाता है, जहां उसकी मुलाकात प्रीत (पूजा हेगड़े) से होती है। इस बीच जस और बानी के रिश्ते का आखिरी अंतरंग पल को वह लगभग भूल चुका है, वहीं बानी की सोच भी बदल चुकी होती है। कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब बानी और प्रीत दोनों लगभग एक ही समय पर जस को अपनी गर्भावस्था की खबर देने पहुंच जाती हैं।

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यहीं से शुरू होता है भ्रम, गलतफहमियों और छिपाने-दिखाने का सिलसिला। बानी अभी भी कानूनी रूप से जस की पत्नी है, जबकि प्रीत से उसका विवाह नहीं हुआ है। हालांकि, प्रीत का भाई रंधावा (जिमी शेरगिल) बात-बात पर बंदूक निकालने को तैयार रहता है। जस अपने दोस्त (मनीष पॉल) के साथ दोनों महिलाओं के बीच फंस जाता है।

फिल्म की कहानी में नहीं है कोई ताजगी

यूनुस सजावल द्वारा लिखित पटकथा और फरहाद सामजी के संवादों वाली यह फिल्‍म डेविड निर्देशित सलमान खान और गोविंदा अभिनीत फिल्‍मों की याद दिलाती है जिसमें प्रेम त्रिकोण, गलतफहमियां और अजीबो-गरीब परिस्थियों से हास्य उत्पन्न होता था। हालांकि, 'है जवानी तो इश्‍क होना है' में ताजगी का अभाव साफ नजर आता है। यह किसी ऐसी पुरानी बॉलीवुड कॉमेडी का विचार लगती है, जो अपने समय में भी शायद बहुत प्रभाव नहीं छोड़ पाती। फिल्‍म में गिने चुने संवाद है, जो मनोरंजन करते हैं बाकी फिल्‍म दर्शकों को बांध पाने में नाकाम रहती है।

फिल्‍म का सबसे मजबूत पक्ष है इसके विजुअल्‍स। फिल्‍म को ज्‍यादातर लंदन में शूट किया गया है। ऋषिकेश का भी फिल्‍म में जिक्र आता है। वहां की लोकेशन भी मनमोहक हैं। फिल्म का संगीत अपेक्षाकृत बेहतर असर छोड़ता है। डेविड धवन की पुरानी सुपरहिट फिल्मों से लिए गए गीत ‘चुनरी चुनरी’, ‘मुझसे शादी करोगी’ और ‘है जवानी तो इश्क होना है’ दृश्यों में कुछ देर के लिए उत्साह भर देते हैं।

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कहानी की वजह से नहीं चमक पाईं मृणाल-पूजा

कलाकारों में अभिनेता वरुण धवन फिल्‍म के एकमात्र कलाकार दिखते हैं, जो कमजोर पटकथा के बावजूद पूरी ऊर्जा और जोश के लगन के साथ अपने पात्र को निभाते दिखते हैं। कहानी में बानी और प्रीत की भूमिका अहम है, लेकिन पटकथा उन्हें केवल जस की परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित कर देती है।

उनके किरदारों के पास न तो अपनी सोच को विस्तार से व्यक्त करने का मौका है और न ही घटनाक्रम को प्रभावित करने की पर्याप्त गुंजाइश। सहयोगी कलाकारों में मनीष पॉल, चंकी पांडे, जिमी शेरगिल, राजेश शर्मा, राकेश बेदी, मौनी रॉय दी गई भूमिकाओं से फिल्‍म को संभालने की भरपूर कोशिश करते हैं।

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