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Gajab Raat Review: क्राइम थ्रिलर में हुकुम का इक्का हैं मनोज बाजपेयी, क्या देखने लायक भी है 'गजब रात'?

Published: Sat, 24 Oct 2026 12:31 AM (IST)

नेटफ्लिक्स पर मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) की सस्पेंस क्राइम थ्रिलर 'गजब रात' दस्तक दे चुकी है। यहां पढ़ें फिल्म का रिव्यू-

नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म 'गजब रात'

नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म 'गजब रात'

HighLights

  1. नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म 'गजब रात'

  2. रितेश शाह के निर्देशन में बनी सस्पेंस क्राइम थ्रिलर

  3. मनोज बाजपेयी ने निभाया भ्रष्ट पुलिस ऑफिसर का किरदार 

एकता गुप्ता, नई दिल्ली। मनोज बाजपेयी स्टारर 'गजब रात' ने नेटफ्लिक्स पर दस्तक दे दी है। इस फिल्म का टाइटल पहले 'घूसखोर पंडत' था लेकिन टाइटल को लेकर हुए विरोध के चलते इसका नाम बदल दिया गया। सस्पेंस क्राइम थ्रिलर आखिरकार रिलीज हो गई है आइए जानते हैं इस रिव्यू में फिल्म कैसी है?

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फिल्म की कहानी

गजब रात (Gajab Raat) में मनोज बाजपेयी ने एक भ्रष्ट पुलिस ऑफिसर अजय निर्वित का लीड किरदार निभाया है। जो रिश्वतखोर है और पैसों के लिए कुछ भी कर सकता है। कहानी की शुरुआत दिल्ली के एक होटल में रेड मारने से होती है जहां नुसरत भरुचा का किरदार रोजी भी होती है लेकिन रोजी से मिलने वाली रिश्वत के चलते निर्वित उसे छोड़कर बाकी को हिरासत में ले लेता है।

इस बीच शहर में एक चलती हुई कार से गंभीर रूप से घायल हुई लड़की बाहर कूद जाती है। जिसका केस अजय निर्वित को हैंडओवर किया जाता है।

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लड़की को हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है लेकिन निर्वित इस लड़की के केस से ज्यादा खुद को होने वाले फायदे के बारे में सोचता है और इसीलिए वहां पहुंचे संदिग्ध सीबीआई ऑफिसर का साथ देने का फैसला करता है और लड़की को हॉस्पिटल में ही मारने का प्लान बनाता है।

आखिर कौन है वो लड़की? क्या निर्वित लड़की को मारने में सफल होता है? या फिर सस्पेंस से भरी कहानी कोई और मोड़ लेती है? इन सवालों के जवाब फिल्म देखने पर ही मिलेंगे।

एक्टिंग

मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने एक घूसखोर ऑफिसर के किरदार में जान डाल दी है। अक्षय ओबेरॉय, साकिब सलीम ने अच्छा काम किया है वहीं राजीव गुप्ता ने अच्छी तरह हरियाणवी लहजा पकड़ा है। वहीं अलावा दिव्या दत्ता (Divya Dutta) और नुसरत भरूचा का स्क्रीनटाइम बेहद कम है।

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डायरेक्शन

कहानी, पिंक, एयरलिफ्ट और रेड जैसी बेहतरीन फिल्मों का डायरेक्शन करने वाले निर्देशक रितेश शाह ने गजब रात का निर्देशन शानदार तरीके से किया है। 2 घंटे 03 मिनट में सिर्फ एक रात के ईर्द-गिर्द बुनी गई कहानी में भरपूर सस्पेंस है। किसी भी पॉइंट पर कहानी प्रीडिक्टेबल नहीं लगती। हालांकि इनकी पुरानी फिल्मों से इसकी तुलना करना थोड़ी नाइंसाफी होगी। 

क्या है खूबियां?

गजब रात की सबसे बड़ी खूबियों में इसकी कहानी और एक्टर्स की बेहतरीन परफॉर्मेंस है। मनोज बाजपेयी के साथ-साथ अन्य सपोर्टिंग कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। कहानी कहीं भी स्लो और बोरिंग नहीं होती और आखिरी तक सस्पेंस बना रहता है।

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एक्टिंग-डायरेक्शन के साथ फिल्म का टॉपिक भी साधारण सस्पेंस थ्रिलर से हटकर है जो भ्रष्टाचार, डर्टी पॉलीटिक्स, क्राइम, भ्रष्ट सिस्टम की कई परतें खोलता है वो भी सिर्फ एक रात में।

शुरू से लेकर आखिरी तक फिल्म आखिरी तक सस्पेंस के साथ बांधे रखने की काबिलियत रखती है और यही एक अच्छी सस्पेंस थ्रिलर की पहचान है।

क्या है कमी?

कहानी की सबसे बड़ी कमी मनोज बाजपेयी की किरदार में आने वाला अचानक बदलाव है। एक ऑफिसर जो बड़ा घूसखोर है, एक ही रात में एकदम से कैसे बदल जाता है? आखिर निर्वित का हृदय परिवर्तन कैसे हो गया इसका कोई ठोस कारण नहीं दिखाया गया।

इसके अलावा नुसरत भरुचा और कीकू शारदा के किरदारों का कोई खास इस्तेमाल नहीं हुआ, सिवाय छोटी-मोटी बातचीत के। अक्षय ओबेरॉय और साकिब के किरदार भी और दमदार हो सकते थे।

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फिल्म का ओरिजिनल नाम घूसखोर पंडत था जो इस कहानी के साथ सटीक बैठता है। अगर नाम बदलना ही था तो कुछ प्रभावी रखा जाना चाहिए था।

फिल्म की राइटिंग कमजोर है जिसकी वजह से कुछ किरदार बिखरे हुए लगते हैं वहीं क्लाईमैक्स देखकर शायद थोड़ी निराशा भी हो सकती है।

फाइनल वर्डिक्ट

क्राइम सस्पेंस थ्रिलर फिल्में पसंद हैं लेकिन कुछ हटकर और प्रभावी देखना चाहते हैं तो मनोज बाजपेयी की 'गजब रात' एक बार देखने लायक है।

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