मुंबई। मुंबई के पुलिस विभाग के चार अधिकारियों को जिम्मेदारी मिली है कि वे अंडरव‌र्ल्ड के चल रहे गैंगवार को समाप्त कर शहर में अमन-शांति बहाल करें। वे अपनी शैली में इस उद्देश्य में एक हद तक सफल होते हैं, लेकिन दिल्ली से आए सीबीआई के आला अधिकारी की जांच-पड़ताल से कुछ और बातें पता चलती हैं। राजनीति और अंडरव‌र्ल्ड के तार जुड़ते दिखाई पड़ते हैं।

राजनीति, अपराध और मुंबई की पृष्ठभूमि पर अनेक फिल्में बन चुकी हैं। आशु त्रिखा की नई पेशकश 'एनिमी' कुछ नए ट्विस्ट और टर्न के साथ आई है। उन्होंने बार-बार देखी जा चुकी कहानियों में ही नवीनता पैदा करने कोशिश की है। कुछ नए दृश्य गढ़े हैं। अनुभवी अभिनेताओ को मुख्य किरदार सौंपा है। ड्रामा और एक्शन का स्तर बढ़ाया है। फिर भी 'एनिमी' अपनी सीमाओं से निकल नहीं पाती।

इस फिल्म में हालांकि अनेक किरदार हैं, लेकिन गौर करें तो मुख्तार के इर्द-गिर्द ही कहानी चलती है। मुख्तार की भूमिका में जाकिर हुसैन ने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। वे उम्दा अभिनेता हैं। मिले हुए अच्छे, साधारण और बुरे मौके में भी वह कुछ नया कर जाते हैं। उनके चरित्र को गढ़ने में लेखक-निर्देशक ने मेहनत भी की है।

'एनिमी' में सुनील शेट्टी, मिथुन चक्रवर्ती, जॉनी लीवर, के के मेनन और महाअक्षय ने अपने किरदारों को जीवंत करने की भरपूर कोशिश की है। जॉनी लीवर अभिनय की अपनी आदतों से इस भिन्न किरदार में भी बाज नहीं आते। के के मेनन और सुनील शेट्टी की मेहनत दिखाई पड़ती है। फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती और उनके पुत्र महाअक्षय पर विशेष ध्यान दिया गया है। जहां पिता मिथुन के लिए सब कुछ आसान रहा है, वहीं बेटा महाअक्षय हर दृश्य में जूझते नजर आते हैं।

आठवें-नौवें दशक की मारधाड़ की मसाला फिल्मों की शैली में बनी ऐसी फिल्मों के दर्शक आज भी मौजूद हैं। उन्हें यह फिल्म भाएगी, लेकिन आशु त्रिखा को अपनी प्रतिभा का उपयोग कुछ बेहतर विषयों के चित्रण करना चाहिए।

अवधि-110 मिनट

** दो स्टार

-अजय ब्रह्मात्मज

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