मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

मुंबई। मद्रास कैफे ने नरगिस फाखरी के कॅरियर में नया मोड़ प्रदान किया है। फिल्मकार उन्हें ग्लैमर गर्ल के बजाय सशक्त अभिनेत्री के रूप में स्वीकार करने लगे हैं। नरगिस की अगली फिल्म है 'मैं तेरा हीरो'। उनसे बातचीत के अंश:

'मद्रास कैफे' से आपके प्रति लोगों की धारणा बदली है। उसके बाद से किस किस्म के रोल मिल रहे हैं?

लोगों का मेरे प्रति रवैया बदला है। उन लोगों को भी मुझमें संभावनाएं दिखने लगी हैं, जिन्होंने 'रॉकस्टार' के बाद मेरे कॅरियर का 'द एंड' करार दे दिया था। 'मैं तेरा हीरो' के बाद मैं फिलहाल 'शौकीन' फिल्म कर रही हूं। 'रॉकस्टार' से लेकर अब तक की जर्नी ने मुझे काफी कुछ सिखाया है।

आप कई देशों में रह चुकी है..

मैं सदा से स्वतंत्र रही हूं। पिछले आठ सालों से ट्रैवल ही कर रही हूं। मैं अपना घर खुद में तलाशती हूं। तभी मैं कहीं भी रह सकती हूं। हालांकि न्यू यॉर्क से हिंदुस्तान आने के बाद मैंने खुद को सबसे ज्यादा तन्हा भी पाया है। मां और दोस्तों को मिस करती हूं, तो फोन और इंटरनेट के जरिए उनसे बातचीत कर लेती हूं। यहां मुंबई में मैंने कुछ दोस्त बनाए हैं, जिनसे मुझे स्नेह मिलता है। विभिन्न देशों में घूमने में मुझे रोमांच महसूस होता है। हिंदुस्तान पहला ऐसा देश है, जहां मैं इतने लंबे समय तक रुकी हूं। फिर भी मेरे पांव में तो जैसे चकरी लगी हुई है। फिलहाल तो मैं सोच रही हूं कि बैग पैक करूं और साल भर के लिए साउथ अफ्रीका घूम आऊं।

पढ़ें:डाइट सही तो शेप सही

फिल्म निर्माण, चयन और इंडस्ट्री के दूसरे पैंतरों से कितनी वाकिफ हुई हैं?

ईमानदारी से कहूं तो अभी भी मुझे काफी चीजें सीखनी-समझनी हैं। मुझे सजना-संवरना पसंद नहीं, फिर भी सज-धज कर रहना पड़ता है। मैं बाकी चीजों में भी सहज नहीं हूं, पर उसका आवरण ओढ़कर रहना पड़ता है।

'मैं तेरा हीरो' का अनुभव कैसा रहा?

बहुत मजा आया। वरुण, डेविड सर और इलियाना डिक्रूज के संग परिवार जैसी फीलिंग हुई। इलियाना और मेरे विचार काफी मिलते-जुलते हैं। हां, वह मेरी जितनी पागलपंथी नहीं करती। मैं पॉलिटिकली इनकरेक्ट नहीं होना चाहूंगी। दिल से कह रही हूं कि वरुण अब तक के मेरे सबसे बेहतरीन को-स्टार हैं। वह जिंदादिल, दरियादिल इंसान हैं। मैं दुआ करती हूं कि वह सदा वैसे ही बने रहें।

(अमित कर्ण)

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप