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सिनेमाई सपनों की भव्य संसद Cannes Film Festival, काफी गहरा है समारोह का इतिहास

By Sundeep BhutoriaEdited By: Ashish Rajendra
Published: Thu, 14 May 2026 08:45 PM (IST)

मई के यह सुनहरे दिन फ्रांस में विश्व सिनेमा की गुनगुनी गर्माहट से भरे हुए हैं। यहां 12 से 23 ...और पढ़ें

कान्स फिल्म समारोह (फोटो क्रेडिट- जैमिनी एआई)

कान्स फिल्म समारोह (फोटो क्रेडिट- जैमिनी एआई)

HighLights

  1. 12 मई से हुआ कान्स फिल्म फेस्टिवल का आगाज

  2. काफी गहरा और रोचक है कान्स का इतिहास

  3. कान्स में लगेगा इंटरनेशनल का तांता

संदीप भूतोड़िया, पेरिस। कुछ स्थान केवल उत्सवों की मेजबानी करते हैं, लेकिन कान की बात निराली है। यह एक ऐसा शहर है जो हर साल कुछ दिनों के लिए खुद को पूरी तरह सिनेमा के हवाले कर देता है। इसके होटल महत्वाकांक्षाओं के प्रतीक्षा कक्ष बन जाते हैं, इसके कैफे पुरस्कारों और प्रीमियर की चर्चाओं से गूंजते हैं और इसके फुटपाथ इंतजार की भाषा सीख जाते हैं।

दोपहर तक यहां ग्लैमर की मशीनरी सजती दिखाई देती है और शाम होते-होते यह एक पावन अनुष्ठान का रूप ले लेती है। इस वर्ष 12 से 23 मई तक, 79वां कान फिल्म समारोह अपने चिर-परिचित अंदाज में जलवा बिखेर रहा है। इसमें समारोह, अटकलें, सितारों की चमक और गंभीरता का अद्भुत संगम है।

सम्मान और नई फिल्मी शुरुआत

कान का आकर्षण आदर और आश्चर्य के बीच संतुलन बनाने में निहित है। यह सुबह सिनेमा के किसी दिग्गज को सम्मानित कर सकता है और रात तक किसी अनजान फिल्म निर्माता से दुनिया का परिचय करा सकता है। इस साल पीटर जैक्सन को उद्घाटन समारोह में मानद पाल्म डी ओर प्राप्त हुआ।

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जैक्सन का सफर 1988 में बैड टेस्ट से शुरू होकर द फेलोशिप आफ द रिंगतक यहां के क्रोइसेट पर बखूबी दर्ज है। बारबरा स्ट्रिसेंड को भी मानद पाल्म डी ओर प्राप्त हुआ। एक ऐसी कलाकार जिसने पीढ़ियों की कल्पना पर राज किया, वह अंततः सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित सीढ़ियों पर कदम रख रही है। साथ ही जान ट्रवोल्टा एक निर्देशक के रूप में यहां अपनी नई फिल्म के साथ वापसी कर रहे हैं।

जूरी और वैश्विक सिनेमा दृष्टिकोण

यदि रेड कार्पेट तस्वीरें देता है, तो जूरी कान के लिए जरूरी सस्पेंस। इस साल यह जिम्मेदारी दक्षिण कोरियाई निर्देशक पार्क चान-वूक के कंधों पर है। उनके साथ डेमी मूर, क्लो झाओ और स्टेलन स्कार्सगार्ड जैसे दिग्गज शामिल हैं। पार्क की अध्यक्षता इस बात का संकेत है कि कैसे एशियाई सिनेमा यूरोपीय प्रशंसा के हाशिये से हटकर विश्व सिनेमा के निर्णय के केंद्र में आ गया है। डेमी मूर की उपस्थिति एक और परत जोड़ती है; वह केवल तालियों की पात्र बनकर नहीं, बल्कि उन लोगों में से एक
बनकर लौटी हैं जिन्हें साल की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों को आंकने का काम सौंपा गया है।

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चमक-धमक के पीछे की फिल्में

तमाम ग्लैमर के बावजूद, कान अपनी फिल्मों की वजह से ही जीवित है। इस वर्ष की प्रतियोगिता लेखकों और निर्देशकों के एक जबरदस्त समूह को वापस लाती है। पेड्रो अल्मोडोवर, असगर फरहादी और जेम्स ग्रे जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं। यह लाइनअप केवल भव्यता पर आधारित नहीं है।

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यह नैतिक संघर्ष, स्मृति और सार्वजनिक दबाव में निजी जीवन की ओर इशारा करता है। कान हमेशा से जानता है कि सबसे बड़ा नाटक जरूरी नहीं कि सबसे शोर वाला हो। कभी-कभी यह रात के खाने
पर बैठा एक परिवार होता है, तो कभी विवाह के भीतर सिमटा एक पूरा देश।

भारतीय सिनेमा की प्रभावशाली उपस्थिति

भारत के लिए कान 2026 में पायल कपाड़िया एक प्रभावशाली पद पर वापस आई हैं। वह सेमेन डे ला क्रिटिक के लिए जूरी की अध्यक्ष हैं। युवा फिल्म निर्माताओं पर उनका यह विचार साझा करने योग्य हैमकि पहली कृतियों का समर्थन करना बाजार की शक्तियों के खिलाफ एक तरह का प्रतिरोध है।

यह वाक्य भारत के उन स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के लिए प्रेरणादायक है जो अक्सर अभाव और जिद के बीच सिनेमा का निर्माण करते हैं। इसके अलावा, मेहर मल्होत्रा की लघु फिल्म का ला सिनेफ श्रेणी केलिए चुना जाना एक बड़ी उपलब्धि है। रेड कार्पेट पर भारतीय फैशन और साफ्ट पावर का जलवा भी हमेशा की तरह कायम रहेगा।

सिनेमा की महत्ता का कारण

यही कारण है कि कान आज भी अपनी अहमियत बनाए हुए है। यह केवल गाउन और उनकी चमक-धमक की वजह से महत्वपूर्ण नहीं है। यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि सिनेमा, अपने बेहतरीन स्वरूप में, उन चुनिंदा स्थानों में से एक है जहां पूरी दुनिया पहले से सहमत हुए बिना एक साथ इकट्ठा हो सकती है।

यहां लोग बहस कर सकते हैं, तालियां बजा सकते हैं और फिर लौट सकते हैं। यह समारोह समुद्र किनारे बसे एक साधारण शहर को सपनों की संसद में बदल देता है। इस मई के बारह दिनों तक, क्रोइसेट एक बार फिर उन लोगों की होगी जो कहानियों के जादू में यकीन रखते हैं।

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