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कौन थे Asha Bhosle को ब्रेक देने वाले 'छोटे मास्टरजी'? लाहौर में चलाते थे स्कूल; राज कपूर के पिता ने थामा था हाथ

Published: Wed, 20 May 2026 08:15 PM (GMT+05:30)

'छोटे मास्टरजी' बनकर हिंदी सिनेमा में छाने वाले म्यूजिक डायरेक्टर हंसराज बहल की आज डेथ एनिवर्सरी है। कौन थे हंसराज ...और पढ़ें

कौन थें आशा भोसले को ब्रेक देने वाले संगीतकार 'छोटे मास्टरजी'/ फोटो- X Account

कौन थें आशा भोसले को ब्रेक देने वाले संगीतकार 'छोटे मास्टरजी'/ फोटो- X Account

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सात दशक से ज्यादा आशा भोसले ने अपनी मधुर आवाज से दर्शकों के दिलों पर राज किया । आज भले ही 'सुरों की मल्लिका' आशा ताई हमारे बीच न हो, लेकिन उनका संगीत हमेशा के लिए अमर हो चुका है। हिंदी सिनेमा को आशा भोसले जैसी सिंगर देने का पूरा श्रेय 'छोटे मास्टरजी' को जाता है। कौन थे वह संगीतकार, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री में सब प्यार से कहते थे 'छोटे मास्टरजी', 10 मई 2026 को हम उनकी 42वीं पुण्यतिथि मना रहे हैं। इस मौके पर पढ़ें उनसे जुड़ा ये किस्सा: 

पाकिस्तान में एक जमींदार परिवार में जन्में थे 'छोटे मास्टरजी'

जिस शख्सियत को आज हम याद कर रहे हैं, वह कोई और नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के दिग्गज म्यूजिक डायरेक्टर हंसराज बहल थे। 19 नवंबर 1916 को शेखूपुरा (पाकिस्तान) में जन्में हंसराज बहल हिंदी और पंजाबी सिनेमा में एक से बढ़कर एक सदाबहार गानों की रचना की। 

शुरू से ही म्यूजिक में दिलचस्पी रखने वाले हंसराज बंसल ने हिंदी सिनेमा में अपनी किस्मत आजमाने से पहले लाहौर के अनारकली बाजार में अपना एक म्यूजिक स्कूल खोला था, जहां वह हिज मास्टर्स वॉइस (HMV) के लिए सिंगल गाने रिकॉर्ड करते थे और साथ ही बच्चों को संगीत की शिक्षा देते थे। 

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hansraj bahal

हंसराज बहल ने मुमताज से गवाया था गाना

हंसराज बहल साल 1944 में अपने भाई गुलशन बहल के साथ मुंबई आए, जहां उन्होंने थोड़ा संघर्ष किया। साल 1946 में उन्हें उनके करियर का पहला ब्रेक फिल्म 'पुजारी' में ब्रेक मिला। दरअसल, जब वह लाहौर से मुंबई आकर काम की तलाश कर रहे थे, तब भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज कपूर से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने संगीतकार को पहला मौका फिल्म 'पुजारी' में दिया। इस फिल्म के लिए उन्होंने म्यूजिक कंपोज किया और बेबी मधुबाला से एक गाना गवाया। यह सिंगर आगे चलकर हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मधुबाला बनी।

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आशा भोसले को दिया था पहला ब्रेक

हंसराज बहल की पारखी नजरों ने न सिर्फ मधुबाला की प्रतिभा को पहचाना, बल्कि हिंदी सिनेमा को आशा भोसले जैसी दिग्गज सिंगर देने में भी हंसराज बहल का ही हाथ है। उन्होंने साल 1948 में फिल्म 'चुनरिया' में आशा भोसले से 'सावन आया' गीत गवाया था, जिसका म्यूजिक खुद उन्होंने कंपोज किया था। यह गाना हिट हुआ और आशा भोसले एक बड़ा नाम बन गईं।

हंसराज बंसल के द्वारा डायरेक्ट किए गए गानों में सबसे लोकप्रिय गाना 'जहां डाल-डाल पे सोने की चिड़िया करती है बसेरा..वह भारत देश है मेरा' है, जिसे मोहम्मद रफी ने गाया था। आज भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यही गाना भारत में हर जगह सुनाई देता है। दिग्गज म्यूजिक डायरेक्टर के फेमस गानों में इसके अलावा 'मोहब्बत जिंदा रहती है, मोहब्बत मर नहीं सकती', 'दिल-ए-नादान जमाने में', हाय जिया रोये, पिया नहीं आये' जैसे कई गीत हैं।

asha bhosle cardic arrest (1)

हंसराज बहल को क्यों कहा जाता था छोटे मास्टर?

दरअसल, जिस दौर में म्यूजिक डायरेक्टर हंसराज बहल ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था, उस दौर में दिग्गज और जाने माने संगीतकार को 'मास्टर जी' कहा जाता था। वहां लाहौर में बच्चों को म्यूजिक सिखाते थे, जहां स्कूल में उन्हें 'मास्टर जी' कहते थे। संगीत की दुनिया में उस समय 'मास्टर गुलाम हैदर' पहले ही 'बड़े मास्टर जी' के रूप में लोकप्रिय थे, ऐसे में कोई कन्फ्यूजन न हो, इसलिए कलाकार, सिंगर्स हर कोई हंसराज बहल को 'छोटे मास्टर जी' कहता था।

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