विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पर्दे की असली 'देवी', भजन गाकर लोग करते थे पूजा... कभी सीता तो कभी दुर्गा बनकर बनाई पहचान; दिलचस्प है कहानी

Published: Mon, 12 Oct 2026 01:13 PM (IST)

भारतीय सिनेमा में एक ऐसी अभिनेत्री रहीं, जिन्होंने पर्दे पर मां के किरदार से अपनी पहचान बनाई। हालांकि एक वक्त ...और पढ़ें

वो एक्ट्रेस जिसे 'देवी' समझकर पूजते थे लोग

वो एक्ट्रेस जिसे 'देवी' समझकर पूजते थे लोग

HighLights

  1. धार्मिक फिल्मों में देवी का किरदार निभाया

  2. दर्शक उन्हें सच में देवी मानकर पूजा करते थे

  3. बॉलीवुड की सबसे यादगार मां के रूप में हिट हुईं

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में पर्दे पर कई अभिनेत्रियां ऐसी हैं, जिन्होंने अपने किरदारों से दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई है। इनमें से एक एक्ट्रेस ऐसी रहीं, जो पर्दे पर मां के किरदारों में खूब पसंद की गईं। हालांकि मां से पहले एक दौर ऐसा था, जब उन्हें लोग सच में देवी समझने लगे थे।

कौन थी वो अभिनेत्री?

जिस अभिनेत्री के नाम का जिक्र हम कर रहे हैं, उनका नाम है निरूपा रॉय। सिनेमा में भी पर्दे की दमदार मां के किरदार का जिक्र होता है निरूपा रॉय का नाम हमेशा सामने आता है। उन्होंने पर्दे पर कई किरदार निभाए। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर आइए जानते हैं, उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा। निरूपा रॉय का जन्म 4 जनवरी 1931 को गुजरात में हुआ था। निरूपा रॉय जब 15 साल की थीं, तभी उनके पिता ने उनकी शादी कर दी।

Nirupa 1

तब ऐसा होता था कि, जल्दी ही शादी कर दी जाती थी और निरूपा रॉय के साथ भी यही हुआ। शादी के बाद निरूपा रॉय ने फिल्मों में एंट्री की। जब वह फिल्मों में आईं तब उनका नाम कांता चौहान था। शादी के बाद उनके पति ने गुजराती फिल्मों के एक ऑडिशन का विज्ञापन देखा।

निरूपा रॉय (Nirupa Roy) के पति कमल खुद एक्टर बनना चाहते थे, इसलिए ऑडिशन देने गए। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था, डायरेक्टर ने पति की जगह 16 साल की कांता को चुन लिया। फिर कांता चौहान निरूपा रॉय बन गईं और फिल्मों में आ गईं।

पर्दे पर बनीं 'देवी'

निरूपा रॉय जब फिल्मों में आईं थीं, तो उस दौर में सिनेमा में धार्मिक फिल्मों का चलन ज्यादा था। ज्यादातर फिल्ममेकर धार्मिक फिल्में बनाते थे और निरूपा रॉय की किस्मत भी इन्हीं फिल्मों से खुली। हालांकि निरूपा रॉय के करियर को ब्रेक एक गुजराती फिल्म से मिला था। फिल्मों की शुरुआत में निरूपा रॉय ने धार्मिक फिल्मों में काम किया। 1940 और 50 के दशक में उन्होंने त्रिलोक कपूर के साथ लगभग 16 से 18 धार्मिक फिल्मों में काम किया।

Nirupa 2

इन फिल्मों में वह देवी के रूप में नजर आईं। हैरानी की बात तो यह थी कि उन्हें लोग सच में देवी (Devi) ही मानने लगे थे। लोग उन्हें जहां देखते, भजन गाना शुरू कर देते और उनके पैरों में पड़ जाते थे। हर-हर महादेव, राम जन्म, दुर्गा पूजा, चक्रधारी, नाग पंचमी और ना जाने ऐसी कितनी फिल्में थीं, जिनमें निरूपा रॉय नजर आईं।

Nirupa 4

हालांकि वीर भीमसेन में उन्होंने द्रौपदी का किरदार निभाकर सबका दिल जीत लिया था। अमर राज उनके करियर की पहली हिंदी फिल्म थी। हिंदी सिनेमा में निरूपा रॉय ने इन फिल्मों के बाद कई बड़ी फिल्मों में काम किया। 70 और 80 के दशक में तो उन्होंने सिनेमा की असली मां बनकर ऐसा कारनामा किया कि सब देखते रह गए।

nirw

पर्दे पर दुखियारी और लाचार मां बनकर वो लोगों के दिलों में बस गईं। दीवार, अमर अकबर एंथनी, खून पसीना, सुहाग, मर्द, गंगा जमना सरस्वती और मुकद्दर का सिकंदर समेत कई बड़ी फिल्मों में वो मां के किरदार में दिखीं। यहां तक कि मशहूर डायलॉग 'मेरे पास मां है' भी निरूपा रॉय पर ही बना।

दिलचस्प बात यह है कि वो पर्दे पर असली आंसू ले आती थीं। बिना ग्लिसरीन लगाए ही वह सीन को काफी भावुक बना देती थीं। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके किरदार सबसे दिलों में जरूर बसे हैं।

यह भी पढ़ें- 275 फिल्मों में यह एक्ट्रेस बनी 'मां', Amitabh Bachchan की मूवी से हुईं अमर; राखी-रीमा भी नहीं तोड़ पाए रिकॉर्ड

यह भी पढ़ें- Nirupa Roy की फिल्म ने जीता था पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड, 50 के दशक में बनी थी सबसे बड़ी हिट