नई दिल्ली, जेएनएन। साउथ सिनेमा की अभिनेत्री रश्मिका मंदाना लाखों दिलों की धड़कन बन चुकी हैं। हालांकि रश्मिका खुद कभी अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थीं। इस बारे में वे बताती हैं, ‘मैं कभी अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थी, लेकिन संयोगवश बन गई। मैंने कभी किसी एक्टिंग स्कूल में जाकर अभिनय नहीं सीखा है। इसीलिए फिलहाल मैं ऐसी फिल्मों का चुनाव कर रही हूं, जिसमें मुझे कुछ सीखने का मौका मिले और मैं एक बेहतरीन कलाकार बन पाऊं। साल 2014 में मैंने राष्ट्रीय स्तर पर एक फैशन प्रतियोगिता जीती थी। मेरी तस्वीर अखबार में छपी थी। वही तस्वीर देखकर मेरी पहली कन्नड़ फिल्म ‘किरिक पार्टी’ के निर्माता और निर्देशक ने मुझसे संपर्क किया था। इस फिल्म के लिए मुझे ऑडिशन भी नहीं देना पड़ा था। निर्माता-निर्देशक ने बस मुझे और मेरी बात करने की शैली देखकर इस फिल्म के लिए चुन लिया था।’

कभी ऑडिशन नहीं देना पड़ा

करियर के शुरुआती दौर में ज्यादातर कलाकारों को ऑडिशन के जरिए ही काम मिल पाता है, लेकिन रश्मिका उन खुशकिस्मत कलाकारों में से हैं जिन्हें कभी ऑडिशन नहीं देना पड़ा। वह बताती हैं, ‘कमाल की बात यह रही कि ‘किरिक पार्टी’ में मेरी परफॉर्मेंस देखकर मेरी पहली तेलुगु फिल्म ‘चलो’ के निर्देशक ने मुझसे संपर्क किया। मैंने वह फिल्म भी की। फिर इस फिल्म के बाद मेरी पहली तमिल फिल्म ‘सुल्तान’ के निर्माता-निर्देशक ने मुझसे संपर्क किया। इसी तरह कड़ी आगे बढ़ती गई। मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे कभी ऑडिशन नहीं देना पड़ा। हिंदी फिल्मों की बात करें तो साल 2019 में रिलीज हुई मेरी तेलुगु फिल्म ‘डियर कॉमरेड’ में मेरी परफॉर्मेंस के आधार पर मुझे ‘मिशन मजनू’ मिली। इस फिल्म के निर्देशक शांतनु बागची सर को मेरी परफॉर्मेंस काफी पसंद आई, उन्होंने निर्माताओं को मेरे नाम का सुझाव दिया। वहीं ‘गुडबॉय’ मुझे साल 2018 में रिलीज हुई मेरी फिल्म ‘गीता गोविंदम’ की परफॉर्मेंस के आधार पर मिली। इसके निर्देशक विकास बहल को ‘गीता गोविंदम’ में मेरी परफॉर्मेंस काफी पसंद आई। उन्होंने इस फिल्म के लिए मेरी एक दोस्त से संपर्क किया और फिर मैं इस फिल्म से जुड़ गई।’

 

 

 

 

 

 

 

 

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एक्शन करना बस की बात नहीं

‘मिशन मजनू’ भले ही एक्शन स्पाई थ्रिलर फिल्म हो, लेकिन इस फिल्म में रश्मिका के हिस्से में एक्शन नहीं आया है। वह बताती हैं, ‘हमारी ‘मिशन मजनू’ की टीम कुछ युवा लोगों का समूह है, जो अच्छा काम करना चाहते हैं। इस फिल्म को शूट करने के अनुभव को मैं पिकनिक की तरह भी कह सकती हूं। हम एक साथ खाना खाते और वर्कआउट करते थे। मैं अभी भी सोचती हूं कि काश मैं वापस दोबारा उस टीम के साथ शूट कर पाऊं। मेरे लिए यह पूरी तरह से परफॉर्मेंस केंद्रित फिल्म रही। मैंने फिल्म में जी जान लगाकर अभिनय किया है। फिल्म में मेरा कोई एक्शन सीक्वेंस नहीं है। फिलहाल एक्शन करना मेरे बस की बात भी नहीं है।’

बिग बी के साथ मीठी यादें बनानी हैं

‘गुडबॉय’ में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने को लेकर रश्मिका बताती हैं, ‘मैं बहुत उत्साहित हूं। जब आपको दूसरी हिंदी फिल्म में ही सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन सर के साथ काम करने का मौका मिले तो फिर कहना ही क्या। मुझे उनसे बहुत कुछ सीखना है तथा उनके साथ बहुत सी मीठी यादें बनानी हैं। शूटिंग शुरू होने से पहले मेरी उनसे कभी मुलाकात नहीं हुई थी। पहली बार उनसे मिलने को लेकर मैं उत्साहित होने के साथ-साथ थोड़ी नर्वस भी थी। मेरे घरवालों को तो अब भी यकीन नहीं है कि मैं उनके साथ फिल्म कर रही हूं।’

 

 

 

 

 

 

 

 

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भाषा या इंडस्ट्री महत्वपूर्ण नहीं

हिंदी सिनेमा हो या दक्षिण भारतीय सिनेमा, रश्मिका दोनों जगह लंबी पारी खेलना चाहती हैं। वह कहती हैं, ‘हिंदी सिनेमा में मैं अभी नई हूं। मुझे अभी लंबा रास्ता तय करना है और ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ काम करना है। मुझे संजय लीला भंसाली और अनुराग बासु की फिल्में पसंद हैं। फिलहाल तो मैं ‘कल हो न हो’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘कभी अलविदा न कहना’ जैसी फिल्में देख रही हूं। हिंदी सिनेमा हो या दक्षिण भारतीय सिनेमा, फिलहाल मुझे जो अच्छा लग रहा है, मैं वही प्रोजेक्ट कर रही हूं। मैं किस भाषा या इंडस्ट्री में काम कर रही हूं, यह मेरे लिए ज्यादा मायने नहीं रखता। फिलहाल मैं सिर्फ अच्छी फिल्मों और स्क्रिप्ट्स को ही प्राथमिकता दे रही हूं।’ 

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