फुटपाथ पर सोए, बस में काटी टिकटें, 11 रुपए में की नौकरी; 2 हजार 'कल्ट गाने' देने वाले उस 'जादूगर' की कहानी
क्या आप जानते हैं कि 'बदन पे सितारे लपेटे हुए' और 'जिंदगी एक सफर है सुहाना' जैसे गानों को लिखने ...और पढ़ें

2 हजार गाने लिखने वाले हसरत जयपुरी की कहानी

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में अगर कहानियों का दमखम रहा तो संगीत का भी बेजोड़ योगदान इसमें रहा है। संगीत को समझने वाले ये मानते हैं कि सिनेमा की रीढ़ शायद संगीत ही है। दशक बीत गए लेकिन संगीत हमेशा ही अपनी अलग पहचान सिनेमा में बनाता रहा है। संगीत जब बनता है तो उसमें संगीतकारों का भी खास योगदान रहता है।
हमारी आज की कहानी सिनेमा के उसी संगीतकार की है जिसके जीवन में संघर्षों का तूफान आया लेकिन उस तूफान को चीरते हुए चमकते आसमान में कैसे चमके हसरत जयपुरी। आइए जानते हैं....
हसरत जयपुरी का शुरुआती जीवन
रूमानी अहसासों को शब्दों का जामा पहनाना भला कोई हसरत जयपुरी से सीखे। किसे पता था शब्दों की ऐसी जादूगरी वो करेंगे सिनेमा को ना जाने कितने कल्ट सॉन्ग मिल जाएंगे। 15 अप्रैल, 1922 को राजस्थान के जयपुर में हसरत जयपुरी का जन्म हुआ था। उनका असली नाम इकबाल हुसैन था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा जयपुर में ही प्राप्त की, जहां उन्होंने अपने नाना, फिदा हुसैन से कविता और शायरी के गुण सीखे।
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उर्दू और फारसी को उन्होंने अपने नाना से ही सीखा। भले ही अंग्रेजी शिक्षा की तालीम उन्हें मिल रही थी, पर दिलचस्पी शायद भावनाओं को शक्ल देने वाले शब्दों में ज्यादा थी। हसरत की मां को यह सब पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने हसरत को घर से निकाल दिया। वह महज 20 साल के थे जब उन्हें मोहब्बत में असफलता मिली।
क्या पता था कि 20 साल के हसरत की मोहब्बत की हसरतें, यू चकनाचूर हो जाएंगीं। इश्क में चोट खाई तो उन्होंने अपना नाम हसरत रख लिया, जिसका अर्थ है 'अधूरी ख्वाहिश'। अब क्योंकि वह जयपुर के रहने वाले इसलिए नाम में जयपुरी जुड़ गया और इसी नाम से वह सिनेमाजगत में जाने गए।
मुंबई आकर बनाया करियर
साल 1940 में हसरत जयपुरी अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आए। यहां उन्होंने गुजारे के लिए खूब हाथ-पैर मारे। ना ही उनके पास ज्यादा पैसे थे और ना ही उनकी किसी से कोई जान पहचान थी। कई दिनों तक बिना खाना खाए ही फुटपाथ पर सोए। काफी संघर्षों के बाद उन्हें नौकरी मिली और फिर लगभग 8 साल तक बस कंडक्टर के रूप में उन्होंने काम किया।
बस में टिकट काटते समय भी मन ही मन कविताएं बुना करते थे। इस नौकरी के लिए उन्हें 11 रुपए प्रति महीने मिलते थे। हालांकि संघर्षों का शोर उनके इर्द-गिर्द खूब गूंजा।

पृथ्वीराज कपूर की वजह से बदली किस्मत
हसरत जयपुरी एक दिन मुशायरे में थे। एक तरफ वो कंडक्टर की नौकरी कर रहे थे तो साथ ही साथ वह मुशायरे में भी जाते थे। एक दिन ऐसे ही वह एक मुशायरे में गए तो यहीं पर पृथ्वीराज कपूर आए हुए थे। उन दिनों पृथ्वीराज के बेटे और एक्टर राजकपूर फिल्म बरसात की तैयारी कर रहे थे।
मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर ने उनकी शायरी सुनी और उन्हें अपने बेटे राज कपूर से मिलवाया। बस यहीं से हसरत जयपुरी की किस्मत बदल गई।
साल 1949 में आई फिल्म बरसात के रूप में हसरत जयपुरी को ब्रेक मिला। इस फिल्म के लिए उन्होंने "जिया बेकरार है..." और "छोड़ गए बालम..." जैसे गाने लिखे और इन्हें लिखकर वह रातों-रात मशहूर हो गए। इस फिल्म के बाद राज कपूर ने उन्हें 300 रुपए की सैलरी पर अपने यहां रख लिया। हालांकि ऐसा नहीं था कि हसरत साहब सिर्फ राज कपूर के लिए ही लिखेंगे, उन्हें दूसरे फिल्ममेकर्स और संगीतकारों के साथ काम करने की आजादी थी।
शंकर-जयकिशन और शैलेंद्र संग हिट हुई जोड़ी
राज कपूर की कई फिल्मों के लिए हसरत जयपुरी ने गाने लिखे। हसरत जयपुरी और शैलेंद्र की जोड़ी ने शंकर-जयकिशन के संगीत के साथ मिलकर 1950 और 60 के दशक में हिंदी फिल्म संगीत पर राज किया। ना जाने कितने गीत इस टीम ने दिए जो खूब हिट रहे। हालांकि 1971 में जयकिशन के निधन के बाद तीनों की जोड़ी टूट गई।
हालांकि हसरत जयपुरी के करियर में शानदार गाने आते गए। आवारा, श्री 420, संगम, जंगली, प्रोफेसर, आरज़ू, और सूरज जैसी फिल्मों के लिए गाने लिखे। इसके अलावा 'बहारों फूल बरसाओ', 'जिंदगी एक सफर है सुहाना', एहसान तेरा होगा मुझ पर, बदन पे सितारे लपेटे हुए समेत अनगिनत हिट गाने दिए। शम्मी कपूर से लेकर देव आनंद जैसे कलाकारों के लिए उन्हें हिट पर हिट गाने लिखे।

Source- AI
असली प्रेम पत्र बना फिल्म का गाना
एक मशहूर किस्सा है कि हसरत जयपुरी को जयपुर में राधा नाम की एक हिंदू लड़की से प्यार हो गया था। उन्होंने उसे एक प्रेम पत्र लिखा था। सालों बाद जब राज कपूर फिल्म 'संगम' बना रहे थे, तब हसरत जी ने उसी पत्र के शब्दों को गाने में ढाल दिया। वह गाना था, "बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं"।
खुद हसरत जयपुरी ने एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था। इसके अलावा एक बार हसरत जयपुरी पेरिस में थे। वहां उन्होंने एक महिला को देखा जिसने चमकते हुए सितारों वाली ड्रेस पहनी थी। उस दृश्य ने उनके मन में हलचल मचा दी और वहीं उन्होंने इस कालजयी गाने की पंक्तियां लिख दीं। गाने का नाम था.. बदन पे सितारे लपेटे हुए।
लव मैरिज के खिलाफ थे हसरत जयपुरी
हसरत जयपुरी ने सिनेमा अनगिनत रोमांटिक गाने दिए, लेकिन वह खुद हमेशा लव मैरिज के खिलाफ रहे। उन्होंने अपनी मां की पसंद से 35 साल की उम्र में शादी की थी। शादी के बाद उनके दो बेटे अख्तर हसरत जयपुरी, आसिफ हसरत जयपुरी और एक बेटी किश्वर जयपुरी हुई। हालांकि शादी के बाद और शंकर जयकिशन के साथ जोड़ी टूटने के बाद वह सिनेमा में ज्यादा एक्टिव नहीं रहे।
हालांकि एक बार भांजे अनु मलिक की चुनौती को एक्सेप्ट कर उन्होंने एक शानदार गाना बना दिया। राज कपूर ने साल 1985 में 'राम तेरी गंगा मैली' में हसरत जी को फिर से मौका दिया और उन्होंने "सुन साहिबा सुन..." (Sun Sahiba Sun) जैसा सुपरहिट गाना दिया। ये गाना उन्होंने अपने भांजे अनु मलिक की शर्त पर ही बनाया था।
अनु मलिक के मामा हसरत जयपुरी (Hasrat Jaipuri) ही थे। 17 सितंबर, 1999 को मुंबई में उनका निधन हुआ। 300 से अधिक फिल्मों के लिए उन्होंने 2000 से ज्यादा गाने लिखे। अपने अंतिम समय तक वो अपनी शायरी और गीतों के जरिए जीवन के अंतिम पड़ाव तक लोगों के दिलों में मोहब्बत जगाते रहे। यही वजह है कि उनके लिखे हुए गाने आज भी हर किसी को मुंहजुबानी याद हैं।
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Note: खबर में इस्तेमाल किया गया डाटा विविध भारती, Encyclopaedia of Hindi Cinema और बाकी खबरों के आधार पर लिया गया है
