मुंबई। सलमान ख़ान की ट्यूबलाइट तो जल गई है और हर कोई इसकी चमक को एन्जॉय कर रहा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं सलमान की आने वाली फ़िल्म ट्यूबलाइट की। वैसे, ट्यूबलाइट...यह शब्द सुन कर ही याद आता है डेली लाइफ में इस्तेमाल किये जाने वाला मशहूर डायलोग- ' ट्यूबलाइट अब जली है इसकी...' मतलब अगर कोई चीज़ आपको देर से समझ आती है तो लोग कहतें हैं कि ट्यूबलाइट है, देर से जलता है।

ऐसे ही हमारे बॉलीवुड सलेब्स की किस्मतें भी हैं, किसीकी एक झटके में जल गई तो किसीको लम्बे समय तक अंधेरे में रहना पड़ा। यें हैं बॉलीवुड के वो 5 स्टार्स जिनकी किस्मत की ट्यूबलाइट बहुत देरी से जली। 

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1. नवाजुद्दीन सिद्दीकी

नवाज़ का नाम इस लिस्ट में सबसे पहले लेना लाज़मी हैं। लगभग 14 सालों तक उनकी किस्मत की ट्यूबलाइट ऑन-ऑफ होती रही। आमिर ख़ान की फ़िल्म सरफ़रोश(1999) में चंद सेकेंड्स के रोल, संजय दत्त की फ़िल्म मुन्ना भई एम् बी बी एस (2003) में कुछ मिनटों का रोल मगर, किसीने नवाज़ को नॉट नहीं किया। फिर साल 2012 में आई अनुराग कश्यप की गैंग ऑफ़ वसेपुर जिसने नवाज़ की किस्मत को चमका दिया। फिर फ़िल्म किक, बदलापुर, मांझी, Te3n, रईस से नवाज़ की किस्मत की ट्यूबलाइट को पूरी तरह जला दिया।

2. कंगना रनौत 

इन्हें कौन नहीं जानता, आज भले ही यें नेशनल अवार्डी हैं मगर एक समय ऐसा भी था जब इनकी किस्मत की ट्यूबलाइट जल तो रही थी मगर रौशनी नहीं दे रही थी। डिम लाइट में कंगना ने गैंगस्टर (2006) से अपना डेब्यू किया। हालांकि, इस फ़िल्म से उन्होंने कई तारीफें बटोरीं मगर किस्मत की ट्यूबलाइट ने अपनी रौशनी उनपर शाकालाका बूम बूम, वो लम्हे जैसी फ्लॉप फ़िल्में देने के बाद साल 2008 में मधुर भंडारकर की फ़िल्म फैशन से डाली। इसके बाद फिर कई ठीक ठाक चलने वाली फ़िल्में आई और पूरी तरह ट्यूबलाइट जली फ़िल्म तनु वेड्स मनु(2011) से। फिर 'क्वीन' के बारे में तो सभी जानते ही है!

3. सुशांत सिंह राजपूत

टीवी इंडस्ट्री में शो पवित्र रिश्ता(2009) के मानव आज इस मुकाम पर होंगे यह शायद ही कोई जानता होगा। टीवी इंडस्ट्री में अपने आपको साबित करके बड़े पर्दे पर अपने अभिनय को साबित करना आसान नहीं था।  इनकी किस्मत की ट्यूबलाइट ने भी जलने में अच्छा खासा समय लिया। 

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4. शाहिद कपूर 

इनकी किस्मत और करियर के रिलेशन की कहानी तो हर कोई जनता है। सांग एल्बम्स, जूनियर डांस आर्टिस्ट के तौर पर शाहिद ने अपने करियर की लाइट जलाने की खूब कोशिश की। फ़िल्में भी मिलीं मगर इनकी किस्मत की ट्यूबलाइट को मानों कनेक्शन ही नहीं मिल रहा था। 2003 में फ़िल्म इश्क विश्क से अपना बॉलीवुड डेब्यू करने वाले शाहिद की किस्मत चमकी 2007 में करीना कपूर के साथ फ़िल्म जब वी मेट से, और पूरी लाइम लाइट तो तब मिली जब शाहिद एक नए अवतार में 2009 की फ़िल्म कमीने में दिखे।

5. इरफ़ान ख़ान 

हाल ही में फ़िल्म हिंदी मीडियम में नज़र आए इरफ़ान ख़ान की किस्मत भी पूरी ट्यूबलाइट की तरह थी। जलती-बुझती उनकी क्सिमत की ट्यूबलाइट अच्छी तरह से जली साल 2012 की फ़िल्म पान सिंह तोमर से और इन्होने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी 1988 की फ़िल्म सलाम बॉम्बे से जिसमें वो एक लैटर राइटर का किरदार निभा रहे थे। इसके बाद उन्होंने लगभग 25 फिल्मों में काम किया...ट्यूबलाइट थी इनकी किस्मत भी!

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