अनुप्रिया वर्मा, मुंबई। मुंबई आये हर शख्स का सपना अपना घर खरीदने का ही होता है। फिर चाहे वह घर कुछ स्क्वेअर फुट ही क्यों न हो। इस शहर में जितनी बिल्डिंग नहीं, उतने ब्रोकर हैं, जिनकी निगाहें किसी बाज और गिद्ध से कम नहीं होती हैं, वह हमेशा नयी खुराक की ही तलाश में होते हैं कि कब कोई एक छत की तलाश में बेसहारा सा नजर आये और वह उन्हें दबोंच लें। ऐसे में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लगभग हर कलाकार इन सारी परेशानियों से दूर रहने के लिए थोड़ी पूंजी बनाते ही अपने खुद के आशियाने की तलाश में लग जाते हैं।

मगर आपको जान कर आश्चर्य होगा कि ऐसी भी कई फिल्मी हस्ती हैं, जिन्हें कभी अपने आशियाने में रहने की चाहत नहीं रही और वह ताउम्र किराए के घर में रह कर भी बेहद खुशी से रहे। उनके लिए अपना घर लेना नहीं, बल्कि जिंदगी के अनुभव को समेटना असली पूंजी रही। कुछ ऐसा ही हुआ था मशहूर और वेटरन अभिनेत्री दीना पाठक शाह के साथ, जिन्होंने ताउम्र अपनी जिंदगी किराये के मकान में गुजार दी, लेकिन अपनी जिंदगी के अंतिम दिनों में उन्होंने जाकर एक घर खरीदा। इस दिलचस्प किस्से के बारे में कम लोग ही जानते होंगे। उनकी बेटी सुप्रिया पाठक ने उनसे जुड़े इस किस्से को विस्तार से सुनाते बताती हैं कि उनका निधन उस वक्त हुआ था, जब उनकी उम्र 80 साल हो चुकी थी। और जब वह 75 साल की थीं, तो उस समय उन्होंने इच्छा जताई कि उन्हें घर लेना है। इससे पहले कभी भी उन्होंने मुंबई में अपना घर लिया ही नहीं था। न ही कभी सोचा। जिस घर में वह मुंबई के दादर इलाके में रहती थीं, वह किराये का मकान था। कभी भी मेरे पापा ने ऐसा सोचा ही नहीं घर खरीदना चाहिए। उन्हें हमेशा यही लगा कि रेंट पर ही रहना चाहिए। लेकिन अचानक उन्हें 75 साल की उम्र होने के बाद लगा कि उन्हें अपना घर चाहिए। फिर रत्ना पाठक शाह और मैंने तय किया कि हम दोनों में से किसी एक बेटी के आस-पास के इलाके में घर लो। तो रत्ना बांद्रा में रहती है वहां घर काफी महंगे थे तो तय हुआ कि वह मेरे घर के पास यानी यारी रोड में घर ले लें। फिर हम लोगों ने घर देखा। लेकिन फिर अचानक उन्होंने कहा कि मेरे पास तो पैसे ही नहीं हैं मैं कहां से लूंगी। मेरा तो अब काम भी कम हो गया है। हम दोनों ने कहा कि हिसाब बताओ तुम्हारे पास क्या-क्या है। जब दोनों बेटियों ने देखा कि उनके पास आराम से इतने पैसे थे कि वह अपना एक घर ले लें। सच ही है कि इस जगह आकर दीना ने एक ऐसी बात कही, जो एक कलाकार की सोच और उनकी ऊर्जा को दर्शाता है कि एक कलाकार उम्र का मोहताज नहीं होता और कलाकार कभी बूढ़ा नहीं हो सकता। यह कलाकार ही हो सकता है, जो 75 साल की उम्र में भी कहे कि उन्होंने जो पूंजी रखी है। उन्हें अब भी घर नहीं लेना। चूंकि उन्होंने वह पूंजी अपने बुढ़ापे ले लिए बचा रखी है।

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सुप्रिया कहती हैं कि मां की ये बात सुन कर हम भी हैरान थे, लेकिन उनकी जीवटता को सलाम भी है कि वह 75 साल की उम्र में भी बुढ़ापे के आने का अभी इन्तेजार ही कर रही हैं। वह यह नहीं मानतीं कि बुढ़ापे ने कब का उनकी दहलीज पर कदम रख दिया है। सुप्रिया कहती हैं कि हमने उन्हें समझाया कि मां 75 अगर ओल्ड एज नहीं है तो आपको कभी ओल्ड एज नहीं आएगा। सुप्रिया कहती हैं कि यह मां ही कर सकती थीं कि वर्ष 2002 में जुलाई में उन्होंने खिचड़ी में काम किया और अक्टूबर में उनका देहांत हुआ। सुप्रिया बताती हैं कि आखिरकार उन्होंने अपना घर लिया। उसमें कुछ सालों तक रहीं। उनकी खास बात यह रही कि वह अपने निधन के कुछ महीनों तक शूटिंग ही कर रही थीं वह इस तरह काम को लेकर समर्पित थीं। सुप्रिया कहती हैं कि एक कलाकार में वह पैशन होना ही चाहिए कि वह तब तक काम करे जब तक उनकी इच्छा हो। मां ने कभी भी गिव अप नहीं किया था।

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बता दें कि इन दिनों खिचड़ी शो एक बार फिर से लौट आया है। स्टार प्लस पर दर्शक आने वाले हफ्तों में इस शो का मजा ले सकते हैं। इस शो में सुप्रिया पाठक हंसा बहन का लोकप्रिय किरदार निभाती नजर आयेंगी। 

Posted By: Rahul soni

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