अनुप्रिया वर्मा, मुंबई। ''प्लीज वक्त पर आ जाना... पीआर से स्पष्ट हिदायत दी थी... मैम टाइम की पाबंद हैं... सुबह के 10.30 बजे का वक्त तय हुआ... फिल्म मॉम के प्रोमोशन के लिए तय हुई थी बातचीत ... तारीख 30 जून 2017... उनके लोखंडवाला अपार्टमेंट ग्रीन एर्क्स में... दूसरी बिल्डिंग के गेट के पास पहुंंच कर ग्रीन एर्क्स किधर है? सेक्योरिटी गार्ड  का सवाल,मैडम जाना कहां है... श्रीदेवीजी के घर... सेक्योरिटी गार्ड कहता हैं, तो ऐसा कहिये ना, बिल्डिंग का नाम बता रही हैं... सामने ही वाली बिल्डिंग है... एंट्री करके चले जाइए... मैडम इन लोग का बिल्डिंग का नाम नहीं... इनका खुद का नाम बोलिये...नहीं हो कंफ्यूज़न होगा...आप बहरहाल... एंट्री के बाद पहले माले पर चले जाइये... अंदर जाते ही... 

श्रीदेवी तक पहुंचने से पहले पीआर और सिक्योरिटी गार्ड से हुई ये बातचीत उनकी आभा और छवि की ओर संकेत करती हैं। बहरहाल, फ़िल्मी प्रमोशन के लिए निर्धारित हुई सीमित बातचीत कब औपचारिकता का दायरा लांघकर उनके पूरे करियर,उनकी फ़िल्मों, उनके मेथड, उनका जर्नी, उनके परिवार तक पहुंच गयी, इसका पता नहीं चला। उनसे हुई ये आखिरी बातचीत के मुख्य अंश- 

डाइनिंग स्पेस में इंतज़ार करने को कहा गया। एक नज़र दौड़ाने के साथ ही आप इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि इस घर में रहने वाला शख्स पेटिंग्स का बेहद शौकीन हैं। हर दीवार पर पेटिंग। नज़र जाकर टिकती है, हर कोने पर रखी एक कपल तस्वीर पर... तभी आवाज़ आती है कि बुलावा आ गया है। मैडम अंदर लिविंग रूम में हैं। एंट्री होती हैं। यह वह दिन था, जब चांदनी चांद की नहीं सूरज की बानगी बनकर आयी थीं। हां, वह कोई और नहीं श्रीदेवी थीं। यह उनके साथ फ़िल्म पत्रकारिता के क्रम में दूसरा इंटरव्यू था। मगर इससे पहले उन्होंने इंग्लिश विंग्लिश के दौरान सामूहिक बातचीत की थी।

जब देखो क्लिक-क्लिक फ्लैश-फ्लैश

अमूमन अब स्टार्स होटलों में ही मीडिया से बातचीत करना पसंद करते हैं, लेकिन उस दिन सिर्फ यही नहीं और भी कई ऐसी बातें हुईं, जो अमूमन स्टार्स के साथ अब एक्सपीरियंस करने का मौका नहीं मिलता। स्टार्स केवल अपने फिल्मी प्रमोशन को ध्यान में रखते हुए कभी पत्रकार का नाम पूछने की भी ज़हमत नहीं उठाते, लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ।

नमस्ते मैम के संबोधन के बाद ही सामने से जवाब आया...स्माइल के साथ...नमस्ते। आप कहां से हैं क्या नाम है...अखबार ये या रेडियो या डिजिटल... मैम जागरण डॉट कॉम... दैनिक जागरण का पोर्टल है... उनका जवाब आता है- हां...आजकल डिजिटल मीडिया का टाइम है न...जब देखो क्लिक-क्लिक फ्लैश-फ्लैश और जिम से निकलते हुए भी, भाजी खरीदते हुए भी फोटो छाप देते हैं। बच पाना मुश्किल है। पहले हम लोग का तो फोटो लेते थे। फिर अगले महीने तक वेट करते थे हम कि मैगजीन में आयेगा। अब तो डीपी हम बदलते नहीं कि वो भी ख़बर बन जाती है। अपनी शिकायत दर्ज करने के साथ ही हालांकि वह तुरंत यह भी स्वीकारती हैं कि अभी हर दौर अलग होता है। यू कांट कंप्लेन... इट्स नीड आॅफ टाइम... चलो, क्या कर सकते हैं। औपचारिक बातचीत से पहले वह इस बात की तसल्ली करती हैं कि आपने चाय-कॉफी ली या मंगवाऊं...।

योग और गार्डनिंग लवर

आमतौर पर स्टार्स को लेकर लोग यह भ्रम पाल बैठते हैं कि वह तो घर पर भी बिना मेकअप के नहीं होंगी। उस दिन मगर ऐसा नहीं था। वह खुद इसका ब्योरा देती हैं...

मैं अभी योग करके आयी हूं तो जिम के कपड़ों में ही आ गयीं। लगा कि अब चेंज करूंगी तो फिर देर होगी। बालों में जूड़ा, न्यूट्रल मेकअप, हाथ में मोबाइल चार्जर के साथ। पैरों में फ्लोटर्स और ब्लैक रंग के ट्राउजर के साथ पिंक ब्लेजर और आंखों पर ओवल शेप के स्पेक्स... वह सोफे के पीछे के हिस्से से दिख रही अपनी बालकनी की तरफ इशारा करती हुईं बिना किसी सवाल के ही कहती हैं कि मुझे योग करने में, और गार्डनिंग करने में काफी मजा आता है... अब वह आंखों से इशारे में सिग्नल देती हैं कि अब बातचीत शुरू करते हैं। तब तक उनके हाउस हेल्प आकर ग्रीन जूस का ग्लास टेबल पर रख देते हैं।

पीआर ने हिदायत दे रखी है कि 20 मिनट से ज्यादा नहीं, लेकिन वह खुद कहती हैं कि जल्दी-जल्दी बात नहीं कर सकती। वह तसल्ली से एक-एक शब्द के बाद पॉज लेकर अपनी बातचीत आगे बढ़ाती हैं। उस दिन ज़हन में यही ख्याल आया कि भले ही सारे सवालों के जवाब 20 मिनट में पूरे न हों, कॉपी में लिखने के लिए चार विभिन्न बातें न मिलें, लेकिन इस बातचीत को एक अनुभव की तरह देखना चाहिए। उन्हें सामने बैठे देखना और उनका तसल्ली से बात करना अच्छा लग रहा था।

बातचीत की शुरुआत मॉम फ़िल्म की मेकिंग को लेकर होती है। वह खुद बताती हैं कि दो बेटियों की मां हूं, इसलिए कहानी अच्छी लगी। फ़िल्म के निर्देशक रवि उदयावर के बारे में वह कहती हैं कि भले ही उनकी पहली फ़िल्म है, मगर उन्होंने उनका विज्ञापन का काम देखा है। फिर वह नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के जादुई अभिनय की बातें करते हुए कहती हैं कि वह जादूगर हैं। मेरे यह कहे जाने पर कि वह तो खूब रिहर्सल करते हैं, श्रीदेवी असहमति जताते हुए कहती हैं कि आप बोल रही हैं तो मैं सोच रही हूं, मगर मुझे वह मेथड एक्टर नहीं स्पॉनटेनियस एक्टर ही लगे। उनको रिहर्सल करते बहुत नहीं देखा। फिर बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ता है और वह कहती हैं कि मॉम उनकी 300वीं फ़िल्म है, लेकिन उन्हें ऐसा लग रहा है कि उनकी पहली फ़िल्म है।

पहली बार कैमरा

श्रीदेवी इसी बातचीत के दौरान अपने पहले कैमरा आॅडिशन को याद करती हैं। वह बताती हैं कि मैंने पहला शॉट चिन्नपा देवर के लिए दिया था। चार साल की थी। मुझे पता नहीं था क्या हो रहा है, लेकिन उन्होंने मुझे खूब प्रेज किया था। मैं लॉर्ड कृष्णा बनी थी। उन्होंने काफी पसंद किया था शॉट। मुझे उन्होंने खूब पैंपर भी किया, तो मुझे फील हुआ कि मैंने कुछ अच्छा किया। 

वैनिटी मैं लेकर आयी

फिर वैनिटी वैन को लेकर उनके चेहरे पर चमक आ जाती है कि अब तो जंगल में भी वैनिटी वैन आ जाती है।

वेरी वेरी कनविनियेंट... वरना हम लोग पर्दा लगाते थे। किसी के घर पर हट होता था, वहां जाते थे। श्रीदेवी कहती हैं कि सबसे पहले मैंने ही वैनिटी बनाया। बांबे में आउटडोर शूटिंग के लिए पहले एक ही वैन होता था। डायरेक्टर्स वहीं बैठकर ड्राइंग करते थे।

एक फ्रेम में दूसरा तो दूसरे में दूसरा हाथ

अगला सवाल उनके दौर के चैलेंजेज को लेकर था। उनके दौर में जब वह नयी आयीं तो क्या चैलेंज फेस किये।

इस पर वह गुस्सा जाहिर करते हुए कहती हैं कि पहले पहले डायेरक्टर वहीं बैठता था और ड्राइंग करता था सेट पर और कहता था आपका ये नेक्स्ट शॉट है। आपको गुस्सा तो आता था। मगर कोई आॅप्शन नहीं था। मैं तो खूब झगड़ा भी करती थी कि इस टेक में उधर हाथ था। अभी इधर क्यों किया तो कहता कि दोनों शॉट ले लो। मतलब कुछ ग्रामर नहीं। वह बताती हैं कि मॉनिटर नहीं होते थे। आपको समझ नहीं आता कि अच्छा किया कि नहीं किया। दिल में सोच लो हो गया। शॉट ओके हो जाता था, लेकिन अब केकवॉक है। स्क्रिप्ट पर बकायदा काम होता है। इसलिए अब एंजॉय अधिक कर रही हूं। श्रीदेवी का मानना था कि लोगों को आप चीट नहीं कर सकते। आपको हर बार अलग कैरेक्टर्स करने होंगे। अलग तरह से करने होंगे। यू कांट रिपीट योर सेल्फ़। एक एक्टर के रूप में वही ज़रूरी है। आप मुझसे कहोगे कि फिर से मिस्टर इंडिया वाली ही बनूं तो नहीं होगा। आपको चेंज करना होगा।

बेटी को वही वैल्यूज जो मेरी मां ने मुझे दिये

श्रीदेवी ने इस बात को लेकर स्ट्रिक्ट लहजे में कहा था कि मैं अपनी बेटियों को वही वैल्यूज देना चाहती हूं, जो मेरी मां ने मुझे दिये। हां मगर थोड़ा मॉडर्न वे में। श्रीदेवी ने कहा कि मुझे मेरी बेटियों को ट्रेडिशनल चीजें सिखाने में कोई शर्म नहीं है। खुशी और जाह्नवी दोनों पूजा करती हैं। घर के सारे रिचुअल्स, सारे फेस्टिवल और ट्रेडिशंस को तो उन्हें मानना ही है। श्रीदेवी ने यह भी कहा था कि आपकी मॉम का आपकी ज़िंदगी पर गहरा असर होता है। जो मैंने लिया, बेटियों को दूंगी ही। जाह्नवी तो बहुत अच्छा खाना भी पकाती है। उसको मेरे होमटाउन की सारी डिशेज पता हैं। श्रीदेवी बेहद खुशी से यह बात स्वीकार गयी थीं कि मैंने कभी खाना बनाना नहीं सीखा। अब तो जाह्नवी अधिक कुकिंग करती है। उन्होंने जाह्नवी की बेकिंग हॉबी की तारीफ करते हुए बताया था कि वह ब्रेड्स, केक्स और कस्टर्ड खूब बनाती है। उन्हें खुद खाने के बाद मीठा पसंद है। श्रीदेवी यह बताते हुए चहक उठी थीं कि उनकी बेटियों को सारे मंत्र याद हैं और वह सारी पूजा नियम से करती हैं। ठीक आम मांओं की तरह ही।

जाह्नवी को स्ट्रगल तो करना ही होगा

श्रीदेवी भी इस बात से वाकिफ थीं कि जाह्नवी का जिक्र होते ही अगला सवाल जाह्नवी के फ़िल्मी करियर को लेकर होने वाला है।

सवाल पूछने से पहले ही वह टोकती हैं- आइ नो अभी जाह्नवी को लेकर बहुत क्यूरियोसिटी है। लोग उसको इतना फॉलो कर रहे हैं। बट आइ टोल्ड हर, ग्लैमर को सीरियस नहीं लेना है। दिस इज़ द फैक्ट उसका स्ट्रगल उसका होगा। उसका कंपैरिज़न भी उसकी मॉम से होगा, ये क्वाइट आॅब्वियस है। सो, शी शुड फोकस आॅन हर वर्क... बाकी चीज हो जाता है खुद ब खुद। स्ट्रगल करना तो होगा ही। ये परफॉरमेंस वर्ल्ड है। एज़ आई से यू कांट चीट आॅडियंस।

बोनी जी के साथ पानी पूरी

श्रीदेवी बोनी कपूर को बोनी जी कह कर ही बुलाती थीं। बोनी जी को पानी पूरी खूब पसंद है। जब भी श्रीदेवी और बोनी को टाइम स्पेंड करना होता, वह पानी पूरी बाजार से मंगाकर घर में खाते थे।

श्रीदेवी कहती हैं बोनी जी को चाट और पानी पूरी पसंद है। पानी पूरी वाले को बुलाते हैं। हम लोग काफी खाते हैं। अभी भी और मुझे उनके साथ बालकनी में पानी पूरी खाते टाइम स्पेंड करना पसंद है। यह बताते हुए उनका चेहरा किसी नयी नवेली प्रेमिका की तरह ही खिल उठता है। जब वह शर्माते हुए कहती हैं कि हम तो एक ही प्लेट शेयर करते हैं अब भी। थोड़ा हेल्थ कांशस अब ज्यादा हो गये। नहीं तो खूब खाते थे

कपल वाली तस्वीर डाइनिंग रूम में रखी

वह कपल वाली तस्वीर, जिसमें बोनी कपूर और श्रीदेवी एक दूसरे के साथ नज़र आ रहे हैं, वही तस्वीर श्रीदेवी की लिविंग रूम में भी थी। जिज्ञासा से पूछ ही डाला मैम ये क्या कोई ख़ास तस्वीर है। घर के हर कोने में दिखी मुझे।फिर बोनी सर के आॅफिस में भी थी।

 

श्रीदेवी मुस्कुराती हुईं कहती हैं कि ये मेरी और बोनी जी की फेवरिट तस्वीर है। फिर वह बोनी जी के साथ मस्ती करती हुईं कहती हैं कि उस वक्त बोनी जी ना पतले भी थे और उनके सिर पर बाल भी थे, तो कोई भी मैगजीन वह तस्वीर मांगते थे तो हम यही दिया करते थे। अभी मैं बोनी जी को बोलने वाली हूं कि वह फिर से ऐसे हो जायें।फिर कुछ देर सोचकर उन्होंने कहा था। शायद राजअध्यक्ष ने ली थी हम लोगों की ये फोटो। 

Posted By: Manoj Vashisth

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