Explainer: टैलेंट भी, विरासत भी...फिर कहां कमी! कैंप-पॉलिटिक्स की भेंट चढ़ा Sara Ali Khan का स्टारडम?
सारा अली खान, एक मजबूत फिल्मी विरासत के बावजूद, अपने करियर में चुनौतियों का सामना कर रही हैं। फ्लॉप फिल्में ...और पढ़ें

सारा के स्टारडम को लगी किसी की नजर?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अंकित सिंह तोमर, नई दिल्ली। सिनेमा में जब कोई आता है तो उसके काम करने के अंदाज की तारीफ खूब होती है। अबतक सिनेमा में कई स्टार्स आए हैं, जिन्होंने अपने दम पर नाम बनाया, पहचान बनाई और वह सिनेमा छाए भी रहे। हालांकि स्टारडम के ढोल दूर के ही सुहावने लगते हैं, इसे पाना और फिर इसे संभालकर रखना हर किसी के बस की बात नहीं होती है।
स्टारकिड्स के दौर में आज कई स्टार्स हैं जो सिनेमा को आगे बढ़ा रहे हैं, इन्हीं में से एक नाम आता है सारा अली खान का। वही सारा जिनका ताल्लुक फिल्मी परिवार से है, लेकिन पिछले कुछ वक्त में सारा थोड़ी अलग-थलग सी दिखाई पड़ी हैं, पर कैसे आइए जानते हैं इसी के पीछे पूरी कहानी....
सारा के करियर को लगी 'बुरी नजर'?
सारा अली खान (Sara Ali Khan) का करियर आज उस मोड़ पर खड़ा है जहां टैलेंट और विरासत तो भरपूर है, लेकिन 'नंबर 1' की कुर्सी दूर होती जा रही है। एक शानदार फिल्मी खानदान सारा के पास है, लेकिन बावजूद इसका सारा का पिछड़ना बॉलीवुड के बदलते समीकरणों की ओर इशारा करता है। सारा अली खान का करियर ग्राफ किसी 'रोलर कोस्टर' सवारी से कम नहीं रहा है।
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2018 में 'केदारनाथ' (Kedarnath) से जब उन्होंने डेब्यू किया, तो लगा कि बॉलीवुड को अगली बड़ी हीरोइन मिल गई है। स्टारकिड्स के दौर में सारा की एंट्री तब हुई जब नेपोटिज्म जैसा मुद्दा चरम पर था। हालांकि सारा ने खुद ने अपने अलग अंदाज, हाजिरजवाबी और सादगी ने दर्शकों का चहेता बनाया, लेकिन आज, 2026 में परिदृश्य अलग है।

फिल्मों के चुनाव में चूकीं सारा?
सारा के फिल्मी करियर पर अगर नजर डालेंगे तो आप ये देख पाएंगे कि सारा ने कई फिल्में ऐसी कीं, जो कमाल की तो रहीं, लेकिन शायद सारा की प्लेसमेंट उन फिल्मों में सही नहीं बैठी। सारा ने शुरुआत बहुत मजबूत की थी, लेकिन 'केदारनाथ' और 'सिम्बा' के बाद उनकी फिल्म चॉइस ने फैंस को निराश किया।
इन फिल्मों के बाद सारा रीमेक का जाल में उलझ गईं। 'कुली नंबर 1' और 'लव आज कल 2' जैसी फिल्मों में सारा के अभिनय की काफी आलोचना हुई। इन फिल्मों के फ्लॉप होने से उनकी 'एक्टिंग क्रेडिबिलिटी' पर सवाल उठे। हालांकि ट्रोलिंग वाले दौर में सारा ने ये स्वीकार भी किया और वो फीडबैक लेने से पीछे नहीं हटीं।
उन्होंने खुद को मजबूत किया और आगे बढ़ीं। हालांकि उनकी पिछली कई फिल्में जैसे गैसलाइट, अतरंगी रे, ऐ वतन मेरे वतन सीधे ओटीटी पर रिलीज हुईं। ओटीटी पर फिल्में थोड़ी बहुत सफल तो रहीं, लेकिन जो 'लार्जर दैन लाइफ' स्टारडम थिएटर से मिलता है, वह सारा के हाथ से फिसलता गया। कई फ्लॉप फिल्मों के चलते सारा के करियर में ब्रेक जरूर लगा।
'कैंप', 'गैंग' और पॉलिटिक्स से दूरी
सारा अली खान, जाहन्वी कपूर और अनन्या पांडे... ये तीन लगभग एक साथ ही लिए जाते हैं। इन तीनों ने ही सिनेमा में आगे-पीछे डेब्यू किया है। तीनों ने अलग-अलग फिल्में कीं। एक दौर था जब अनन्या पांडे जमकर ट्रोल की जाती थीं। अनन्या ट्रोलर्स का इस कदर शिकार हुईं कि उनकी हर चीज के लिए उन्हें ट्रोल किया गया।
इसी तरह जाहन्वी (janhavi Kapoor) भी ट्रोलिंग से नहीं बच पाईं। हालांकि उस वक्त में सारा का गेम थोड़ा ऊपर जरूर था। सारा का सादगी भरा अंदाज, उनका लोगों से बातचीत करना। यहां तक कि सारा जब मीडिया से भी बात करती थीं तो बड़े अदब पेश आती थीं। हालांकि अभी वही है, लेकिन सारा बदले वक्त में शायद खुद को बदल नहीं पाईं और धीरे-धीरे सारा एक दायरे में सीमित रह गईं। अनन्या ने अपनी फिल्मों की च्वॉइस अच्छी रखी तो वहीं जाहन्वी के साथ भी कहीं ना कहीं यही रहा है।
हालांकि अनन्या (Ananya Pandey) की चर्चा ज्यादा इसलिए रहती है, क्योंकि अनन्या के काम को अब लोग पसंद करने लगे। अनन्या ने जेनजी ऑडिएंस को ध्यान में रखकर अपनी फिल्म का चुनाव किया है। दोनों एक्ट्रेसेस का बी-टाउन पार्टीज में एक्टिव रहना, लाइमलाइट में रहना शायद इनके लिए फायदेमंद रहा है। यहां तक कि करण जौहर (karan johar) के साथ भी अनन्या-जाहन्वी के रिश्ते ज्यादा अच्छे रहे हैं। इसके अलावा दूसरे मेकर्स और स्टार्स के साथ दोनों का जुड़ाव ज्यादा नजर आया है।
बॉलीवुड में अक्सर कहा जाता है कि अगर आपको लंबी रेस का घोड़ा बनना है, तो किसी बड़े 'कैंप' का हिस्सा होना जरूरी है, लेकिन सारा ने अपने लिए एक स्वतंत्र राह चुनी। इसका नतीजा यह हुआ कि बड़े बजट की 'पॉपकॉर्न एंटरटेनर' फिल्में और मेगा-प्रोजेक्ट्स सारा के बजाय उनके प्रतिद्वंद्वियों की झोली में ज्यादा गिरे।
सारा किसी एक कैंप की 'पोस्टर गर्ल' बनकर नहीं रहीं, जिससे उन्हें मिलने वाले बड़े अवसरों में कमी आई। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि, दोनों ने सारा की तुलना में खुद को अधिक 'वर्सेटाइल' और 'विजिबल' रखा है।
लाइमलाइट से सारा की दूरी
सारा का कोरोनाकाल के बाद से वक्त बदलना शुरु हुआ है। अनन्या की तुलना में सारा को ज्यादा मजबूत माना गया, लेकिन वक्त बदला और आज तस्वीर कुछ और ही है। शुरुआत में सारा का 'नमस्ते' और 'सारा की शायरी' लोगों को बहुत पसंद आया। सारा की सबसे बड़ी यूएसपी उनकी सादगी रही है।
हालांकि सारा ने लाइमलाइट से खुद को दूर रखा है। सारा वक्त-वक्त पर बाकी स्टार्स की तरह ज्यादा मीडिया में नहीं रहती हैं। एक वक्त था जब वो मीडिया से ज्यादा बातचीत करती थीं। हालांकि अब सारा मीडिया से भी कम ही मुखातिब होती हैं।
इंड्स्ट्री में आज खुद का पीआर हर स्टार करता है, लेकिन शायद सारा ने अपनी पीआर स्ट्रैटजी पर भी ध्यान देना बंद सा कर दिया। हां, शायद ये एक वजह हो सकती है, क्योंकि अक्सर किसी स्टार की स्टारवैल्यू में पीआर स्ट्रैटजी का बहुत बड़ा हाथ होता है।
क्या सही फिल्में नहीं चुन रहीं सारा?
बाकी स्टारकिड्स की तुलना में सारा के पास फिल्में तो हैं, लेकिन शायद वह फिल्मों में रिस्क लेने से डर रही हैं। सारा को उनकी एक्टिंग के लिए काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। हालांकि कुछ फिल्मों में उनकी एक्टिंग बेहतरीन रही है। विक्की कौशल के साथ जरा हटके जरा बचके, धनुष के साथ अतरंगी रे और ओटीटी की फिल्मों में सारा के काम की सराहना हुई है।
हालांकि सारा बड़े बैनर्स की फिल्मों तक सारा नहीं पहुंच पा रही हैं, पर सारा खुद मानती हैं कि ओवरनाइट मिलने वाली सक्सेस अक्सर ज्यादा दिन तक नहीं रुकती।
एक इंटरव्यू में सारा ने बताया कि जब वो इंड्स्ट्री में आईं तो उनकी मां अमृता सिंह ने उन्हें सलाह दी थी कि, जो सक्सेस रातोंरात मिल जाए वो ज्यादा दिन टिक नहीं पाती है। शायद सारा यही मानती हैं, लेकिन सारा शायद रिस्क लेने से बच रही हैं, जो उनके करियर के लिए घातक हो सकता है।
फिल्मी परिवार से है सारा का ताल्लुक
सारा अली खान एक बड़े फिल्मी परिवार से आती हैं। सारा की दादी मां शर्मिला टैगोर अपने जमाने की बड़ी अभिनेत्री रही हैं। पिता सैफ अली खान हैं, जो खुद एक बड़े स्टार हैं। मां अमृता सिंह भी टॉप एक्ट्रेस रहीं, तो वहीं करीना कपूर खान भी सुपरस्टार हैं और करीना के साथ भी सारा के रिश्ते अच्छे रहे हैं।
हालांकि देखकर ऐसा लगता है कि फिल्मी परिवार से होना सारा के लिए कोई बड़ी सौगात नहीं लाया है। सारा को परिवार का सपोर्ट है, लेकिन अपने दम पर सब करना चाहती हैं। करीना के साथ करण की दोस्ती बेहद गहरी है, लेकिन करण की किसी बड़ी पार्टी का हिस्सा सारा कम ही होती हैं।
एक दौर था जब आलिया भट्ट और परिणीति चोपड़ा की तुलना की जाती थी। उस दौर में कहा गया कि परिणीति आलिया से बड़ी एक्ट्रेस बनने के काबिल हैं, जबकि आलिया उस वक्त में जमकर ट्रोल होती थीं। हालांकि आलिया ने आत्मविश्वास रखा और खूब मेहनत की।
आज आलिया और परिणीति के करियर के बारे में हमें आपको बताने की जरूरत नहीं है। सारा के करियर में यही है, शायद सारा को खुद में आत्मविश्वास रखना होगा और अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना होगा और खुद पर ज्यादा मेहनत करनी होगी
। वहीं सारा की यूं तो किसी से इंड्स्ट्री में दुश्मनी नहीं है, लेकिन इंटरनेट पर अक्सर वायरल होने वाले औरी सारा पर खूब कटाक्ष करते हैं। सारा और औरी के बीच का विवाद भी कई बार बाहर आया। औरी अनन्या और जाहन्वी के अच्छे दोस्त हैं, जबकि सारा को वह अपना दोस्त नहीं मानते हैं।
सारा अली खान ने अब लंबे वक्त बाद 'पति पत्नी और वो दो' से बड़े पर्दे पर वापसी की है। फिल्म में सारा के साथ आयुष्मान खुराना, रकुल प्रीत सिंह और वामिका गब्बी हैं। इस फिल्म में सारा के पास भी ज्यादा कुछ करने को नहीं नजर आया है। हालांकि सारा को जितना स्क्रीन मिला, वो उतना अच्छा करके गईं।
अब ये फिल्म उनके लिए 'मेक या ब्रेक' वाली स्थिति हो सकती है। सारा के पास जुनून और क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन वो रणनीति के मामले में पीछे रह गईं। उम्मीद है सारा अपनी मां अमृता और दादी शर्मिला टैगोर की तरह पर्दे पर नये आयाम तो स्थापित जरूर करेंगी।
