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Aamir Khan की इस ब्लॉकबस्टर पर लग गया था बैन, बाद में खुद पूर्व राष्ट्रपति ने देखी थी पूरी फिल्म

Published: Fri, 23 Jan 2026 10:57 AM (IST)

आमिर खान के खाते में कई ऐसी बेहतरीन फिल्में हैं जिन पर कभी विवाद भी हुआ। कुछ फिल्मों पर रिलीज ...और पढ़ें

आमिर खान की इस मूवी को पूर्व राष्ट्रपति ने थिएटर्स में देखा था। फोटो क्रेडिट- एक्स

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। आमिर खान की फिल्म रंग दे बसंती (Rang De Basanti) जिसे ऑस्कर्स (Oscars) में ऑफिशियल एंट्री मिली, ओपनिंग कलेक्शन से इतिहास रचा, बाफ्ता अवॉर्ड्स में नॉमिनेट हुई, नेशनल अवॉर्ड का खिताब जीता लेकिन इतनी सारी उपलब्धियों के बावजूद इस ब्लॉकबस्टर को रिलीज से पहले ही बैन का सामना करना पड़ा।

जी हां, राकेश ओमप्रकाश मेहरा (Rakeysh Omprakash Mehra) की इस फिल्म को पहले बैन कर दिया गया था। राकेश ओमप्रकाश ने ही इस कमिंग ऑफ एज पॉलिटिकल एक्शन थ्रिलर का लेखन, निर्माण और निर्देशन किया था।

फिल्म की कहानी छू जाएगी दिल

रंग दे बसंती में आमिर खान, सिद्धार्थ, अतुल कुलकर्णी, शरमन जोशी, कुनाल कपूर, ब्रिटिश एक्ट्रेस एलिस पैटन, वहीदा रहमान और सोहा अली खान जैसे सितारों ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी पांच कॉलेज फ्रेंड्स की है जो पांच फ्रीडम फाइटर्स की डॉक्युमेंट्री में काम करते हैं। फ्रीडम फाइटर्स की कहानी उन्हें इतना प्रेरित करती है कि वह आज की सरकार की बुराइयों के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हैं। 

Rang De Basanti

बैन हो गई थी रंग दे बसंती

यह फिल्म जब सिनेमाघरों में आई तो इसे खूब पसंद किया गया, लेकिन इस फिल्म को पहले बैन भी कर दिया गया था। रंग दे बसंती के 20 साल पूरे होने पर डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने फिल्म की रिलीज को लेकर आई चुनौतियों पर बात की है। उन्होंने कहा, "रंग दे बसंती को भी बैन कर दिया गया था। हमने इसका मुकाबला किया और फिर आखिरकार सरकार ने फिल्म का मकसद समझा। असल में उस समय के रक्षा मंत्री माननीय प्रणब मुखर्जी ने फिल्म देखी थी और दिल्ली के एक थिएटर में आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के तीनों प्रमुखों ने भी फिल्म देखी और बाद में वह भारत के राष्ट्रपति बने। तो बात उस लेवल तक पहुंच गई थी।"

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aamir khan

डरकर फिल्में बनाने वाले पर बोले डायरेक्टर

राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने आगे कहा, "आप कहानियां यह सोचकर नहीं बताते कि उन्हें इजाजत मिलेगी या नहीं, अगर ऐसा सोचेंगे तो कहानियां कभी सामने नहीं आएंगी। अगर आप नतीजे के बारे में सोचते हैं, प्रोसेस के बारे में नहीं, तो मुझे लगता है कि सोशल सिनेमा हमेशा से रहा है और हमेशा रहेगा, जो सामाजिक मुद्दों और नागरिकों और समाज के मुद्दों को उठाता है।"

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