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सिर्फ 50 रुपये लेकर एक्टर बनने निकला था ये हीरो, लगातार 7 ब्लॉकबस्टर देने के बाद आई कंगाली; तो बेचना पड़ा था बंगला

Published: Mon, 20 Jul 2026 06:16 PM (IST)

एक ऐसा हीरो जो आंखों में एक्टर बनने का सपना लेकर घर से सिर्फ 50 रुपये लेकर निकला था और बाद में उन्होंने भारतीय सिनेमा में असीम सफलता देखी।

घर से सिर्फ 50 रुपये निकला था ये एक्टर

घर से सिर्फ 50 रुपये निकला था ये एक्टर

HighLights

  1. घर से सिर्फ 50 रुपये निकला था ये एक्टर

  2. लगातार दी थीं 7 ब्लॉकबस्टर फिल्में

  3. पैसों की कमी के कारण बेचा था बंगला

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप बड़े सपने देखते हैं लेकिन सोचते हैं लेकिन किसी वजह से रिस्क लेने से डरते हैं, तो भारतीय सिनेमा के जुबली कुमार कहे जाने वाले एक्ट की कहानी आपको प्रेरित कर सकती है। क्योंकि ये एक्टर बनने के लिए बड़ा सपना आंखों में लिए सिर्फ 5 रुपये लेकर घर से निकले थे।

इस एक्टर ने 1949 में अपना करियर शुरू किया और चार दशकों से ज्यादा लंबे करियर में 80 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। बंटवारे के समय वे सिर्फ 50 रुपये लेकर मुंबई आए थे; ये पैसे उन्हें अपनी वह घड़ी बेचकर मिले थे जो उनके पिता ने उन्हें तोहफे में दी थी। फिल्म इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाने की इच्छा के बावजूद, उन्हें कभी हीरो बनने में दिलचस्पी नहीं थी।

गीता बाली के साथ किया था डेब्यू

उन्होंने डायरेक्टर एच. एस. रवैल के साथ असिस्टेंट के तौर पर काम करके अपने करियर की शुरुआत की। लगभग पांच साल तक उन्होंने 'पतंगा', 'सगाई' और 'पॉकेट मार' जैसी फिल्मों में उनके साथ असिस्टेंट के तौर पर काम किया। आखिरकार, उन्होंने देवेंद्र गोयल की फिल्म 'वचन' (1955) में गीता बाली के साथ मुख्य भूमिका निभाकर अपना डेब्यू किया। यह फिल्म हिट रही और इससे उन्हें पहचान मिली, जिससे फिल्मों में उनके करियर की शुरुआत हुई।

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कैसे मिला 'जुबली कुमार' का नाम?

अब तक शायद आप समझ गए होंगे कि यहां राजेंद्र कुमार (Rajendra Kumar) की बात की जा रही है। वचन की सफलता की बाद राजेंद्र कुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद वे महबूब खान की ड्रामा फिल्म 'मदर इंडिया' (Mother India) में नजर आए, जो बॉक्स ऑफिस (Box Office) पर बहुत बड़ी हिट साबित हुई। फिर उन्होंने लगातार सात ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं और 1960 के दशक तक वे सुपरस्टार बन गए। उनकी कई फिल्में सिनेमाघरों में कम से कम 25 हफ्ते (सिल्वर जुबली) तक चलीं, जिसके कारण उन्हें 'जुबली कुमार' का नाम मिला।

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हालांकि, उनका स्टारडम छोटा था। मजदूर जिंदाबाद फ्लॉप होने के बाद उन्होंने डाकू और महात्मा, शिरडी के साईं बाबा, सोने का दिल लोहे के हाथ, आहुति, साजन बिना सुहागन और बिन फेरे हम तेरे जैसी फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें से सभी ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया।

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पैसों की कमी के चलते बेचा अपना बंगला

जल्द ही एक ऐसा समय आया जब एक्टर कंगाल हो गए। पैसों के लिए उनका संघर्ष इतना मुश्किल हो गया कि उन्हें अपना बंगला भी राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) को उसकी मार्केट वैल्यू से कम कीमत पर बेचना पड़ा। कहा जाता है कि राजेंद्र कुमार ने अपना बंगला सिर्फ 3.5 लाख रुपये में बेच दिया था। दवा लेने से इनकार करने के लिए मशहूर राजेंद्र कुमार का जुलाई 1999 में 71 साल की उम्र में निधन हो गया; यह उनके बेटे के 43वें जन्मदिन के ठीक एक दिन बाद हुआ। नींद में ही कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।

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