'झरने के नीचे नहाती और पेड़ से लिपटी हीरोइनें', राजा रवि वर्मा की पेंटिंग को कैसे Raj Kapoor ने बनाया हकीकत?
‘राम तेरी गंगा मैली’ के प्रदर्शन के चार दशक और इसकी नायिका मंदाकिनी की जन्मतिथि के अवसर राज कपूर की ...और पढ़ें

राजा रवि वर्मा की पेंटिंग से इंस्पायर थे राज कपूर के फिल्मों के सीन/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अनंत विजय, नोएडा। राज कपूर के बारे में कई बातें कही जाती हैं। पहली बात तो यह कि उन्हें सफेद साड़ी पहनने वाली स्त्रियां पसंद थीं, या फिर उन्हें पसंद करने वाली स्त्रियां जानबूझकर सफेद साड़ी पहनती थीं। दूसरी बात यह कि उनकी वे फिल्में जबरदस्त हिट होती थीं, जिनकी मुख्य अभिनेत्री के साथ उनके अफेयर के चर्चे होते थे।
नरगिस से लेकर पद्मिनी और वैजयंतीमाला तक का उदाहरण उनके साथ काम करने वाले लोग आज भी देते रहते हैं। उन पर लिखी गई कई पुस्तकों में भी इस तरह की बातों का प्रमुखता से उल्लेख मिलता है।
सेंसुएलिटी को नए अंदाज में राज कपूर ने किया पेश
एक और बात राज कपूर के बारे में विशेष रूप से कही जाती है कि जब से नरगिस और उनका अलगाव हुआ, तब से उनकी फिल्मों में सेंसुअलिटी का स्थान सेक्सुअलिटी ने ले लिया। उसी दौरान एक और घटना घटी, जिसने राज कपूर को अपनी फिल्मों में नायिकाओं को एक नए अंदाज में पेश करने का आइडिया दे दिया। एक दिन राज कपूर मुंबई (तब बॉम्बे) में अपने किसी मित्र के यहां रात के खाने पर गए थे। मित्र के घर पर जब वे खाना खा रहे थे, तो डाइनिंग टेबल के ऊपर लगी एक तस्वीर देखकर वे खाना ही भूल गए।
वह प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा की पेंटिंग थी। पेंटिंग में एक स्त्री भीगी हुई साड़ी में दिखाई दे रही थी। वह गीली और झीनी साड़ी को बदन पर लपेटे हुए थी। उस स्त्री की पेंटिंग में एक अद्भुत सेंसुअलिटी थी, जिसे बाद में राज कपूर ने पर्दे पर सेक्सुअलिटी में बदल दिया। यह वही दौर था, जब राज कपूर की जिंदगी से नरगिस जा चुकी थीं।

रवि वर्मा की कलात्मक शैली को जीवंत करने की कोशिश
उनकी नई नायिका अब पद्मिनी थीं, जिन्हें लेकर राज कपूर फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ बना रहे थे। इस फिल्म में पद्मिनी पर फिल्माए गए गीत ‘ओ मैंने प्यार किया ओहो क्या जुर्म किया’ में राज कपूर ने राजा रवि वर्मा की उसी पेंटिंग को दृश्यों के रूप में पर्दे पर उतारने का प्रयास किया। गाने के दौरान पद्मिनी काली साड़ी पहनकर झरने के नीचे बने एक जलकुंड के दृश्यों में नजर आती हैं।
राज कपूर ने इस गीत के फिल्मांकन में राजा रवि वर्मा की कलात्मक शैली को जीवंत करने की कोशिश की। कैमरे ने इस दृश्य की सुंदरता और उस दौर के सिनेमाई चित्रण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसमें झरने के पास फिल्माया गया एक संक्षिप्त दृश्य भी शामिल है, जहां राज कपूर की निर्देशक दृष्टि साफ झलकती है। ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपनी कलात्मक कल्पना के कुछ और हिस्सों को अपनी भविष्य की फिल्मों के लिए संजोकर रखना चाहते थे।

राज कपूर ने फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ में जो कुछ बचा लिया था, उसे उन्होंने अपनी अगली फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में पूरी तरह से दिखाया। इस फिल्म का प्रसिद्ध गाना ‘अंग लग जा बालमा’ याद कीजिए, जिसने सिनेमाई दृश्यों की परिभाषा बदल दी थी। इस गाने के बोल शुरू होने से पहले लगभग एक मिनट तक मुख्य नायिका अपने कमरे में गहरी बेचैनी के साथ करवटें बदलती हुई दिखाई देती है।
इस दौरान कैमरा उनकी विभिन्न मुद्राओं और भावों को बहुत बारीकी से कैद करता है। डेढ़ मिनट बाद जब कड़कती हुई बिजली और तूफानी रात के बीच नायिका पद्मिनी पेड़ के तने से लिपटकर गाना आरंभ करती हैं, तो दर्शक उनकी अदाओं में पूरी तरह खो जाते हैं। यहां राज कपूर अपनी नायिका को काली साड़ी से आगे ले जाकर हल्के क्रीम रंग और लाल बॉर्डर वाली साड़ी में प्रस्तुत करते हैं और उन्हें पानी में भिगोते भी हैं।
चौखट पर अपने बदन से साड़ी लपेटकर खड़ी पद्मिनी यहां राजा रवि वर्मा की उस ऐतिहासिक पेंटिंग को पूरी तरह से साकार कर देती हैं। परंतु इस फिल्म के दृश्यों को देखकर भी ऐसा लगता है कि राज कपूर ने अपनी कल्पना का कुछ हिस्सा यहां भी भविष्य के लिए बचा लिया था।

राम तेरी गंगा मैली के गाने पर मचा था बवाल
इस फिल्म के करीब डेढ़ दशक बाद राज कपूर की एक ऐतिहासिक फिल्म आती है-‘राम तेरी गंगा मैली’। अपने सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर अभिनीत 'एक जान हैं हम' और 'आसमान' के फ्लॉप होने के बाद राज कपूर ने उन्हें एक बड़ा सितारा बनाने के मकसद से यह फिल्म बनाई थी। इस फिल्म का सदाबहार गाना याद करिए, ‘तुझे बुलाएं मेरी बांहें’।
इस गीत की शुरुआत में नायिका मंदाकिनी लाल वस्त्र पहने हुए पर्दे पर आती है, लेकिन उसके बाद जब वह पर्वत के नीचे और झरने के पीछे अपने होने का एहसास कराती है, तो वह सफेद पारदर्शी साड़ी में नजर आती है। यहां आकर राज कपूर दृश्य की बोल्डनेस को चरम स्तर तक ले जाते हैं। मंदाकिनी पर फिल्माए गए इस झरने वाले दृश्य को लेकर उस समय देशभर में काफी बवाल मचा था और तीखी आलोचनाएं भी हुई थीं।

इसके बावजूद, सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद यह फिल्म सिनेमाघरों में जबरदस्त हिट रही और उस वर्ष की सबसे बड़ी ब्लाकबस्टर साबित हुई। इस फिल्म ने रातों-रात मंदाकिनी, जिनकी 30 जुलाई को जन्मतिथि भी है, को एक बड़ी स्टार बना दिया। इसके बाद मंदाकिनी ने दर्जनों फिल्में कीं, जिनमें मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ की गई उनकी कई फिल्में बाक्स आफिस पर ठीक-ठाक चलीं।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।