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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 12, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बर्थडे: प्राण ने कभी लौटा दिया था फ़िल्मफेयर अवॉर्ड, जानिये उनकी ये 7 अनसुनी कहानियां

By Hirendra JEdited By:
Published: Mon, 12 Feb 2018 12:00 AM (IST)Updated: Tue, 12 Feb 2019 09:09 PM (IST)

प्राण के द्वारा निभाये गये खलनायकी के किरदारों का असर ये रहा कि उनके फ़िल्मों में उभरने के बाद...

बर्थडे: प्राण ने कभी लौटा दिया था फ़िल्मफेयर अवॉर्ड, जानिये उनकी ये 7 अनसुनी कहानियां
बर्थडे: प्राण ने कभी लौटा दिया था फ़िल्मफेयर अवॉर्ड, जानिये उनकी ये 7 अनसुनी कहानियां

मुंबई। अपने दौर के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक प्राण साहब का आज बर्थडे है। क्या आप जानते हैं एक दौर ऐसा भी था जब प्राण की फ़ीस फ़िल्म के हीरो से भी ज्यादा हुआ करती थी। फ़िल्मफेयर, दादा साहब फाल्के पुरस्कार समेत कई अवॉर्ड से सम्मानित प्राण 12 फरवरी 1920 को जन्में थे।

प्राण को बतौर अभिनेता तो सभी जानते हैं लेकिन, बतौर इंसान भी वह एक कमाल की शख्सियत थे। भले ही फ़िल्मों में उन्होंने हमेशा ही नकारात्मक भूमिकाएं निभाई हैं लेकिन, असल ज़िन्दगी में वो नायक ही रहे हैं। वह अपने बारे में बाद में, पहले लोगों के बारे में सोचा करते थे। प्राण एक्टर बनने से पहले एक फोटोग्राफर बनने का सपना देखा करते थे। उन्होंने दिल्ली की एक फोटोग्राफी कंपनी में काम भी किया था। उस दौरान उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े खलनायक बन जाएंगे। आइये आपको प्राण के जीवन के कुछ ऐसे ही रोचक पहलू के बारे में बताते हैं।

प्राण साहब ने साल 1972 में फ़िल्म 'बेइमान' के लिए बेस्ट सपोर्टिग का फ़िल्मफेयर अवॉर्ड लौटा दिया था, क्योंकि उस साल आई कमाल अमरोही की फ़िल्म 'पाकीजा' को एक भी पुरस्कार नहीं मिले थे। पुरस्कार लौटा कर प्राण ने अपना विरोध जताया कि 'पाकीजा' को अवॉर्ड न देकर फ़िल्मफेयर ने अवार्ड देने में चूक की है! ऐसे अभिनेता आज के समय में दुर्लभ हैं!

अभिनेता और डायरेक्टर मनोज कुमार ने प्राण के अभिनय के कुछ और रंगों से हमें परिचित कराया! उन्होंने ही प्राण को विलेन के रोल से निकालकर पहली बार 'उपकार' में अलग तरह के किरदार निभाने का मौका दिया। उसके बाद प्राण कई फ़िल्मों में ज़बर्दस्त चरित्र या सहायक अभिनेता के रूप में उभर कर सामने आये!

प्राण साहब यारों के यार कहे जाते थे! अभिनेता और निर्देशक राज कपूर की फ़िल्म 'बॉबी' में काम करने के लिए प्राण ने महज एक रुपये की फीस ही ली थी, क्योंकि उस दौरान राज कपूर आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। दरअसल  'बॉबी' से पहले अपनी फ़िल्म 'मेरा नाम जोकर' बनाने के लिए राजकपूर अपना सारा पैसा लगा चुके थे। यह फ़िल्म टिकट खिड़की पर बुरी तरह असफल रही जिसके बाद राजकपूर भयंकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। फिर 'बॉबी' से वो अपने नुकसान की भरपाई की उम्मीद कर रहे थे,जिसके लिए प्राण ने राजकपूर के लिए इस फ़िल्म में महज एक रूपये में काम करना स्वीकार किया! 

यह जानना भी रोचक है कि आजादी से ठीक एक दिन पहले 14 अगस्त 1947 को वे अपनी पत्नी और बेटे के साथ लाहौर से मुंबई आए थे। आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि कभी अपने मोहल्ले में हुई रामलीला में उन्होंने एक बार सीता का किरदार निभाया था।

प्राण पान खाने के बेहद शौकीन थे और उन्हें पहली बार पान की दुकान पर ही सिनेमा में काम करने का ऑफर मिला था! एक दिलचस्प किस्सा यह भा है कि प्राण साहब ने अपने पिता से अपने फ़िल्म कैरियर की बात छिपाई थी, लेकिन जब अखबार में उनका पहला इंटरव्यू आया तो वह पढ़कर उनके पिता बहुत खुश हुए थे। 2013 में पद्मभूषण प्राण को भारत सरकार ने सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान 'दादा साहब फाल्के' से नवाज़ा!

यह भी एक किस्सा है कि अमिताभ बच्चन को बिग बी बनाने में भी प्राण का सबसे बड़ा हाथ है। उन्होंने ही प्रकाश मेहरा को कहकर बिग बी को फ़िल्म 'ज़ंज़ीर' में मुख्य किरदार निभाने का मौका दिलाया और इस फ़िल्म में शेर ख़ान का रोल भी अदा किया। यह कहना गलत न होगा कि प्राण साहब ने ही इंडस्ट्री में बिग बी को एंग्री हीरो के तौर पर खड़ा किया।  

सिनेमा का यह प्राण 12 जुलाई 2013 को अपनी फ़िल्मों में निभाए अपने किरदारों और ढेर सारी यादें छोड़ कर इस दुनिया से चला गया। प्राण के द्वारा निभाए गए खलनायकी के किरदारों का असर ऐसा रहा कि उनके फ़िल्मों में उभरने के बाद इस देश में पैदा हुए किसी बच्चे का नाम 'प्राण' नहीं रखा गया! यह कद और करिश्मा रहा है प्राण साहब का!