पैगंबर का खत फाड़ने वाले के नाम से था Nusrat Fateh Ali Khan का नाता, 'तबले' ने बदली 'शहंशाह-ए-कव्वाली' की तकदीर!
आज नुसरत फतेह अली खान (Nusrat Fateh Ali Khan) कव्वाली किंग कहे जाते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर वह 'कव्वाली गायक' कैसे बने? जानिए उनके बारे में...

नुसरत फतेह अली खान को डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता। फोटो क्रेडिट- एक्स
HighLights
नुसरत का असली नाम सुनकर भड़क गए थे सूफी संत
नुसरत फतेह अली खान को डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता
नुसरत फतेह अली खान को संगीत से दूर रखते थे पिता
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। नुसरत फतेह अली खान (Nusrat Fateh Ali Khan) म्यूजिक से जुड़े परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके दादा मौलाबख्श अपने जमाने के मशहूर कव्वाली गायक थे। उनके पिता फतेह अली और चारा मुबारक अली भी मशहूर कव्वालों में गिने जाते थे।
यूं तो पारिवारिक जड़ें संगीत से जुड़ी थीं, ऐसे में नुसरत फतेह अली खान के रग-रग में संगीत भरा था। हालांकि, पिता ने उन्हें संगीत से दूर रखने का फैसला किया। उनके पिता फतेह अली चाहते थे कि नुसरत कव्वाली गायक बनने की बजाय डॉक्टर बने।
इसीलिए उन्होंने हमेशा नुसरत को संगीत की दुनिया की दूर रखा। मगर एक तबले ने उनकी तकदीर बदल दी। चलिए आपको 'शहंशाह-ए-कव्वाली' की जिंदगी के कुछ अहम पहलुओं पर नजर डालते हैं।
नुसरत फतेह अली खान का असली नेम
13 अक्टूबर 1948 में पाकिस्तान के लायलपुर में नुसरत फतेह अली खान का जन्म हुआ था। आज वह दुनियाभर में नुसरत फतेह अली खान के नाम से जानते हैं, लेकिन शायद ही आपको मालूम हो कि उनका नाम नुसरत नहीं, बल्कि परवेज (Nusrat Fateh Ali Khan Real Name Parvez) था।

नुसरत का नाम सुनकर भड़क गए थे सूफी संत
Pirre Alain-Baud की किताब 'नुसरत: द वॉइस ऑफ फेथ' (Nusrat: The Voice of Faith) में उनके नाम बदलने के पीछे एक दिलचस्प किस्सा लिखा गया है। इस किताब में अहमद अकील रूबी ने बताया कि एक बार नुसरत के घर पर सूफी संत नाम के पीर गुलाम गौस समदानी पहुंचे। जब उन्होंने नुसरत का नाम पूछा तब उनके पिता ने असली नाम परवेज बताया। तब सूफी संत बहुत नाराज हुए। उन्होंने तुरंत सलाह दी कि यह नाम बदल दीजिए।
सूफी संत ने बदला था नुसरत का नाम
उन्होंने पूछा कि क्या वह जानते हैं कि परवेज कौन है? फिर उन्होंने इस नाम के पीछे की कहानी बताई। सूफी संत ने बताया कि फारस के राजा का नाम परवेज था। उसने पैगंबर का भेजा हुआ खत फाड़ दिया था। यह शुभ सकेत नहीं है। फिर सूफी संत ने ही उनका नाम 'नुसरत' सुझाया। उन्होंने बताया कि नुसरत का मतलब सफलता का मार्ग है और बस इस तरह वह परवेज से नुसरत बने और दुनियाभर में वह 'कव्वाली किंग' के नाम से मशहूर हो गए।
नुसरत को डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता
मगर 'कव्वाली किंग' बनना भी उनके लिए कोई आसान बात नहीं थी क्योंकि उनके पिता फतेह अली खान उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे लेकिन तबले ने उनकी किस्मत बदल दी।
बीबीसी के मुताबिक, एक बार नुसरत पिता से छुपकर हारमोनियम बजाने की कोशिश कर रहे थे। तब चुपके से उनके पिता ने सुन लिया। नुसरत को लगा कि उन्हें डांट पड़ेगी, लेकिन उनके पिता मुस्कुराए और इस शर्त पर हारमोनियम बजाने की इजाजत दी थी कि इससे उनकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

तबले की वजह से संगीत में आए थे नुसरत
बस फिर क्या था। नुसरत साहब ने हारमोनियम के साथ-साथ तबला बजाना भी शुरू कर दिया। बस इसी ने उनकी तकदीर बदल दी। एक बार नुसरत साहब ने इतनी शानदार तरीके से तबला बजाया कि सुनकर उनके पिता ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने का फैसला बदल दिया। इसके बाद उन्होंने नुसरत को संगीत की बारीकियां सिखाना शुरू कर दिया। इसके बाद वह संगीत की दुनिया में आए और गायिकी भी शुरू की और दुनियाभर में छा गए।
