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निखिल सिद्धार्थ ने लोगों को इतिहास से खीखने की दी सलाह, कहा- 'आजकल पैन इंडिया शब्द को ज्यादा'

By Priyanka SinghEdited By: Surabhi Shukla
Published: Sun, 15 Mar 2026 04:35 PM (IST)

निखिल सिद्धार्थ ने अपनी आगामी ऐतिहासिक फिल्म 'स्वयंभू' पर बात की, जिसमें वे 985 ईस्वी के कृष्णन रामन का किरदार ...और पढ़ें

स्वयंभू के एक सीन में निखिल (फोटो-इंस्टाग्राम)

स्वयंभू के एक सीन में निखिल (फोटो-इंस्टाग्राम)

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प्रियंका सिंह, मुंबई। अगर खुद पर विश्वास नहीं, तो अभिनेता नहीं बनना चाहिए। यह कहना है दक्षिण भारतीय अभिनेता निखिल सिद्धार्थ (Nikhil Siddhartha) का, जो ऐतिहासिक फिल्म ‘स्वयंभू’ (Swayambhu ) में नए अंदाज में दिखेंगे।

निखिल कहते हैं, ‘कलाकार को आत्मविश्वास होना चाहिए, नहीं तो एक्टर नहीं बनना चाहिए। मुझे बतौर कलाकार अपनी सीमाएं पता हैं। ‘स्वयंभू’ फिल्म ‘बाहुबली’ जैसी नहीं है। इसमें मैं राजा या कोई योद्धा नहीं हूं। बस, एक छोटे से गांव में रहने वाले लड़के की कहानी है।


निखिल ने आगे कहा- 'लोग सोचते हैं कि वह कुछ नहीं कर पाएगा, लेकिन वह कुछ ऐसा करता है कि एक साम्राज्य की किस्मत बदल देता है। वाकई 985 ईस्वी में कृष्णन रामन नामक वह व्यक्ति था, जो किरदार मैंने फिल्म में निभाया है। इतिहास से बहुत कुछ सीख सकते हैं कि गलतियों को दोहराना नहीं चाहिए। युवाओं को यह फिल्म पसंद आएगी, जो बड़े सपने लेकर आते है और लोगों के ताने सहने के बाद भी बड़ा नाम कमा लेते हैं।’

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सब बराबर हैं मेरे सेट पर- निखिल

क्या निखिल भी खुद को सेल्फ मेड मानते हैं? इस पर वह कहते हैं, ‘पता नहीं, लेकिन मेरी पहली फिल्म ‘हैप्पी डेज’ को 19 साल हो गए हैं। अब तक 42 फिल्में की हैं। इस दौरान कई चुनौतियां रही हैं। यही सीखा है कि सेट पर सबको एक बराबर समझना बहुत जरूरी है, फिर चाहे वो असिस्टेंट हो या कोई बड़ा स्टार। मैं अपना मार्केट एक-एक कदम पर बना रहा हूं। समय लग रहा है, लेकिन मैं यहां टिका हूं, तो कुछ तो पा ही लिया है।’

Nikhil (2)

एक्शन सीक्वेंस के लिए खूब करते हैं रिहर्सल

‘स्वयंभू’ फिल्म में निखिल ने घोड़े के साथ कई सीन किए हैं। यह उनके लिए खासा चुनौतीपूर्ण रहा। वह बताते हैं,‘फिल्म में घोड़े का नाम मारुति है। फिल्म में मुझे केवल घोड़ा दौड़ाना ही नहीं था, बल्कि उस पर बैठकर तीर भी चलाना था। मारुति को अपने पैरों से मुझे नियंत्रण में रखना था। हर एक्शन सीक्वेंस के लिए मैं रिहर्सल करता था, फिर सीन करता था। छह-सात महीने तक मारुति मेरे घर के पास एक अस्तबल में था। हर दो दिन में जाकर मैं उससे मिलता था।’

ऐसे बेहतर हुई हिंदी

हिंदी सिनेमा में काम को लेकर निखिल कहते हैं, ‘मुझे कई प्रोडक्शन हाउस की तरफ से आफर आए हैं, लेकिन मां मुझे हमेशा कहती हैं कि अगर सोच-समझकर काम नहीं करोगे, तो न घर के रहोगे, न घाट के। अपनी एक राह बनाकर रखो, अच्छा मौका मिलेगा तो आगे बढ़ना। फिलहाल मैं तेलुगु फिल्में बनाने में व्यस्त हूं, लेकिन कभी कुछ अच्छा मिलेगा, तो करूंगा।’

वहीं अच्छी हिंदी बोलने का श्रेय निखिल दैनिक जागरण को देते हैं। व‍ह कहते हैं,‘दैनिक जागरण बहुत ही बड़ा पब्लिकेशन है। मैंने इसको काफी पढ़ा है। इसकी वजह से मेरी हिंदी बहुत अच्‍छी है।’

Nikhil (3)

हर फिल्‍म सबके लिए नहीं होती

2022 में प्रदर्शित निखिल की पैन इंडिया फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ की कहानी अब ‘कार्तिकेय 3’ के साथ आगे बढ़ेगी। निखिल कहते हैं, ‘पैन इंडिया शब्द का प्रयोग इन दिनों कुछ ज्यादा ही हो रहा है। ‘कार्तिकेय 3’ के लिए हमने दो-ढाई साल का समय इसलिए लिया, क्योंकि अगर तुरंत बनाते, तो उसमें उतनी दिलचस्पी नहीं रहती।

इस बार कहानी ‘कार्तिकेय 2’ से अलग होगी। ‘कार्तिकेय 3’ भले ही पैन इंडिया फिल्म है, लेकिन मैं अपनी हर फिल्म को पैन इंडिया नहीं बनाता। हमें वास्तविकता में जीना चाहिए। हर फिल्म पूरे देश के लिए नहीं बनती है। कई बार क्षेत्रीय भाषा की फिल्में, उसी क्षेत्र के अनुसार बनती हैं। इतने वर्षों में फिल्मों में काम करके अब हम जानते हैं कि कौन सी फिल्म पैन इंडिया बन सकती है, कौन सी नहीं!’

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