मुंबई। एक दौर था जब चुलबुली, हंसमुख और नटखट मुमताज़ जब पर्दे पर आतीं तो दर्शकों की धड़कनें रुक जाया करतीं। हर कोई उनकी अदाओं और अदाकारी का दीवाना था। लेकिन, साठ और सत्तर के दशक की इस हसीन नायिका को आज भुला दिया गया है।

71 वर्षीय मुमताज़ आज अपने वतन और कर्म भूमि मुंबई से हजारों किलोमीटर दूर रोम में रह रहीं हैं। मुमताज़ वहां अपनी बेटी और दामाद के साथ रहती हैं। हाल ही में मुमताज़ तब चर्चा में रही थीं जब उनके निधन को लेकर एक अफवाह फैली। तब रोम से उनकी बेटी तान्या माधवानी ने सोशल मीडिया पर इस ख़बर को झूठ बताया था। क्या आप जानते हैं 31 जुलाई 1947 को मुंबई में जन्मीं मुमताज़ ने जब से होश संभाला उनका सपना एक अभिनेत्री बनने का ही था। मुमताज़ की मां नाज़ और आंटी निलोफर दोनों ही एक्टिंग की दुनिया में सक्रिय थीं, लेकिंन वे महज जूनियर आर्टिस्ट के ही रूप में काम किया करतीं। साठ के दशक में मुमताज़ ने भी फ़िल्मों में छोटे-मोटे रोल करने शुरू कर दिए थे।

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मुमताज़ की किस्मत बदली तब जब दारा सिंह जैसे स्टार बॉलीवुड का हिस्सा बने। दारा सिंह जैसे बुलंद किरदार के साथ काम करने से उस दौर की एक्ट्रेस बचतीं थीं। इसी का फायदा उठाया मुमताज़ ने और उन्होंने एक के बाद एक 16 फ़िल्में दारा सिंह के साथ कीं। क्या आप यकीन करेंगे कि इन फ़िल्मों में दस फ़िल्में जबर्दस्त हिट साबित हुईं। यहां से मुमताज़ की कामयाबी का सफ़र शुरू हो गया। दारा सिंह के बाद फिर उन्हें मिला देश के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का साथ और यह दौर अभिनेत्री मुमताज़ की ज़िंदगी का गोल्डन टाइम साबित हुआ। उससे पहले कि उनके बारे में और कुछ जानें, आइये पहले देखते हैं, बला की खूबसूरत यह एक्ट्रेस अब कैसी दिखती हैं! यह तस्वीर रोम की है जो उनकी छोटी बेटी तान्या ने अप्रैल में इन्स्टाग्राम पर शेयर किया था। आप देख सकते हैं आज भी उनके चेहरे की चमक बरकरार है! 

राजेश खन्ना और मुमताज़ का एक साथ पर्दे पर दिखना कामयाबी की गारंटी मानी जाती थी। इस जोड़ी ने 'दो रास्ते', 'सच्चा-झूठा', 'आपकी कसम', 'अपना देश' 'प्रेम कहानी', 'दुश्मन', 'बंधन' और 'रोटी' जैसी सफल और यादगार फ़िल्मों में काम किया। कहा जाता है कि यह जोड़ी वास्तविक जीवन में भी काफी करीब थी।

1974 में जब मुमताज़ ने मयूर मधवानी से शादी की तब राजेश खन्ना का दिल टूट गया। राजेश खन्ना नहीं चाहते थे कि मुमताज़ अभी शादी करें। शादी के बाद मुमताज़ ने फ़िल्मों में काम करना बंद कर दिया। उन्होंने अपने पंद्रह साल के करियर में 108 फ़िल्में कीं और इनमें से ज़्यादातर फ़िल्में हिट साबित हुईं। अपने दौर में टॉप पर रहीं मुमताज़ ने हालांकि 1989 में 'आंधियां' फ़िल्म से दूसरी पारी खेलनी चाही लेकिन, इस फ़िल्म के फ्लॉप हो जाने के बाद उन्होंने इंडस्ट्री को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। बाद में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हो गया जिससे वो एक फाइटर की तरह बाहर निकलीं।

गौरतलब है कि साल 1971 में संजीव कुमार के साथ 'खिलौना' फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला।1996 में उन्हें फ़िल्मफेयर ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया। 2005 में मुमताज़ की बड़ी बेटी नताशा की शादी एक्टर फरदीन ख़ान से हुई। लगभग पांच साल पहले दिए एक इंटरव्यू में मुमताज़ ने कहा था कि उनके आस-पास चारों तरफ पानी ही पानी है लेकिन ग्लैमर और चकाचौंध से दूर वो खुद बहुत प्यासी हैं और अकेली भी !

Posted By: Hirendra J