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Rafi की जिद, संगीतकार ने किया था रिजेक्ट; 56 साल पुराना गाना हुआ ऐसा हिट तोड़े बॉक्स ऑफिस पर सभी रिकॉर्ड

Published: Wed, 22 Apr 2026 06:18 PM (IST)Updated: Wed, 22 Apr 2026 06:45 PM (IST)

वैसे तो साल 1964 में आई फिल्म दोस्ती के सभी गाने हिट थे लेकिन मोहम्मद रफी की आवाज में आए ...और पढ़ें

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। रफी साहब (Mohammad Rafi) की आवाज में वो जादू था जिसमें सिर्फ गायन के सुर नहीं, बल्कि जज्बात होते थे। गमगीन गानों में उनकी आवाज रुला देती थी, तो रूमानी गीतों में एक अलग ही कशिश महसूस होती थी। आज रफी साहब के जिस क्लासिक गाने की हम बात करने वाले हैं उसने एक न एक बार आपके दिल की भी गहराइयों को जरूर छुआ होगा।

हम बात कर रहे है साल 1964 में आई फिल्म 'दोस्ती' (Dosti) की जिसने रिलीज होते ही सिनेमाघरों में धूम मचा दी थी। इसके सभी गानें बहुत पॉपुलर हुए कि हर जगह रफी साहब की आवाज गूंज रही थी। फिल्म की कहानी बेहद शानदार थी।

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विदेशों में भी हुई थी फिल्म की चर्चा

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत, रफी साहब की दमदार आवाज और फिल्म के मुख्य किरदार सुधीर कुमार और सुशील कुमार की लाजवाब आदाकारी को दर्शकों से खूब तारीफ मिली। यही वजह है कि इस फिल्म को विदेशों में भी खूब पसंद किया गया।

Rafi (6)

लेकिन क्या आपको पता है कि फिल्म का सबसे सुपरहिट गाना इसका हिस्सा ही नहीं था। जी हां, फिल्म का गाना 'चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे' (Chahunga Mai Tujhe) को मोहम्मद रफी साहब की मखमली आवाज में रचा-बसा गया। यह भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में से एक है। यह गाना न केवल दोस्ती की मिसाल है,बल्कि रफी साहब की गायकी की गहराई को भी दर्शाता है।

सात गीतों में केवल 6 सेलेक्ट हुए

इस फिल्म के लिए मजरूह सुल्तानपुरी ने 7 गाने लिखे थे लेकिन लक्ष्मीकांत प्यारेलाल सिर्फ 6 गानों को ही शामिल करना चाहते थे। मूवी के अन्य हिट गानें 'जाने वालों जरा', 'राही मनवा दुख की चिंता', 'कोई जब राह ना पाए', 'मेरा जो भी कदम है', 'आई रे आई हंसी आई' इसके शानदार गीत हैं।

'चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे' की धुन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को पसंद नहीं आई और उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया था। लेकिन रफी का मन था कि इसे फिल्म में शामिल किया जाए और वो इसके पीछे अड़ गए। बाद में रफी साहब के कहने पर इस गाने को फिल्म में शामिल किया गया और उनकी आवाज कमाल कर गई। गाना जबरदस्त हिट हुआ।

Rafi (7)

दोस्ती ने की थी बजट से बहुत ज्यादा की कमाई

दोस्ती का अनुमानित बजट लगभग 0.90 करोड़ (90 लाख रुपये) या उससे भी कम था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और इसने उस समय लगभग 2 करोड़ रुपये की बंपर कमाई की थी। सत्येन बोस इसके निर्देशक थे। इस मूवी के बाद से दोनों एक्टर सुशील कुमार और सुधीर कुमार रातोंरात स्टार बन गए। इस फिल्म का निर्माण राजश्री बैनर के अंदर सत्येन बोस ने किया था।

दोस्ती को 1965 के फिल्म फेयर अवॉर्ड्स की 7 कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था जिसमें से मूवी ने 6 कैटेगरी के अवॉर्ड अपने नाम किए। इस मूवी के इमोशन्स ने इसकी शान को बढ़ाया और दर्शकों ने इसे गहराई तक महसूस किया।

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