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62 साल पुराना Mohammad Rafi का वो गाना, जिसे सुनकर रो पड़ी थीं इंदिरा गांधी

Published: Wed, 11 Mar 2026 04:06 PM (IST)Updated: Wed, 11 Mar 2026 08:20 PM (IST)

मोहम्मद रफी के गीत 'मेरी आवाज सुनो' में ऐसा जादू था कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी सुनकर भावुक हो गईं। ...और पढ़ें

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सुरों के बादशाह मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) की आवाज में वो जादू था कि उनका हर गीत दिल को छू जाता था। अपने पूरे सिंगिग करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक गानों को अपनी आवाज दी। उनकी आवाज में वो जादू था जो सुनते ही महसूस होता था।

आज हम आपको रफी के एक ऐसे ही गाने के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी फफक-फफक कर रो पड़ी थी। क्या है इसका कारण, चलिए विस्तार से समझते हैं। साल 1961 में रफी को सिर्फ एक सिंगर नहीं बल्कि भावनाओं की पहचान करने वाले सिंगर के तौर पर देखा जाता था।

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नेहरू जी के निधन से परेशान थे सावन कुमार

ये किस्सा है साल 1967 की फिल्म नौनिहाल का जिसे सावन कुमार ने बनाया था। सावन कुमार के दिल में एक नेता के लिए गहरी श्रद्धा थी और वो नेता थे पंडित जवाहर लाल नेहरू। 27 मई, 1964 को नेहरू का निधन हुआ। नेहरू जी के जाने की खबर ने सावन कुमार को अंदर तक तोड़ दिया।

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इसी दुख से उनके मन में एक विचार आया। उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसी फिल्म बनाई जाए जो नेहरू जी को सच्ची श्रद्धांजलि हो और आने वाली पीढ़ियों को उनकी याद दिलाती रहे। सावन कुमार चाहते थे कि उस समय बन रही उनकी फिल्म नौनिहाल में एक ऐसा गीत हो जो लोगों की आत्मा को छू जाए। ये गाना था मेरी आवाज सुनों प्यार का राग सुनो।

कैफी आजमी ने लिखे थे गीत के बोल

गीत के बोल लिखने की जिम्मेदारी दी गई कैफी आजमी को। कैफी साहब ने ऐसे शब्द लिखा जिसमें एक नेता नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक, एक पिता और एक सपने की झलक थी। अब सवाल था इन शब्दों को आवाज कौन देगा। सभी के मन में रफी का नाम आया।

रिकॉर्डिंग में बिल्कुल अलग था माहौल

रफी जो दर्द, प्यार और सच्ची श्रद्धा उकेरने में माहिर थे। उन्होंने इस गीत को गाया। रफी साहब की आवाज में वो जादू था जो हर इंसान के दिल में उमड़ रहे दर्द को खींचकर बाहर ला देता है। इस गीत का संगीत तैयार किया था मदन मोहन ने। ये गाना बिल्कुल नॉर्मल रिकॉर्डिंग जैसा नहीं था। रफी हर एक लाइन गाने से पहले कुछ समय के लिए चुप हो जाते जैसे उसके पीछे की गहराई को वो जानना चाह रहे हों।

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इंदिरा गांधी के पास क्यों गए थे रफी?

शायद यही वजह थी कि जब रिकॉर्डिंग पूरी हुई तो सबने तालियां नहीं बजाई बल्कि चुप रहे। जब मूवी रिलीज हुई तो सावन कुमार इसे टैक्स फ्री करवाने इंदिरा गांधी के पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि मैंने फिल्म तो नहीं देखी लेकिन इसका एक गाना सुना दीजिए। इंदिरा गांधी ने जब ये गाना सुना तो वो खुद को संभाल नहीं पाईं और रोने लगीं। आज भी जब ये गाना बजता है तो दिल कहीं खो सा जाता है।

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