43 साल पहले Kishore Kumar ने गाया था मोहब्बत का सबसे दर्दभरा गाना, पहली लाइन सुनकर ही तड़प उठता है चोट खाया आशिक
किशोर कुमार ने 43 साल पहले एक ऐसा गाना गाया था, जो अब एक कल्ट क्लासिक गाना बन गया है। ...और पढ़ें

किशोर कुमार का गाना 43 साल बाद बना कल्ट क्लासिक/ फोटो- Instagram

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। किशोर कुमार ने अपनी मधुर आवाज में एक से बेक बढ़कर कल्ट क्लासिक गाने दिए हैं, जो आज भी लोगों के जेहन में बसे हुए हैं। किशोर दा की सबसे खास बात ये थी कि वह हर तरीके का गाना गाते थे। उनके गाए कई गीत हैं, जो सदाबहार हैं, जिन्हें आज भी अगर आंख बंद करके सुनो तो आप एक इमेजनरी वर्ल्ड में चले जाओगे।
आज हम आपको उनके 43 साल पहले आए ऐसे गाने के बारे में बता रहे हैं, जो गारंटी इतने सालों के बाद भी अगर सुना जाए, तो दिल टूटे आशिक के मन में टीस उठाना और आंखों में आंसु आया तय है। कौन सा है ये गाना, नीचे पढ़ें डिटेल्स।
43 साल बाद भी रुला देगी गाने की हर लाइन
जिस गाने का जिक्र हम अपने इस लेख में कर रहे हैं, वह गाना साल 1983 में रिलीज हुई राजेश खन्ना-रेखा और राज बब्बर स्टारर फिल्म 'अगर तुम न होते' का गाना है। गाने का टाइटल है 'हमें और जीने की चाहत न होती, अगर तुम न होते'। किशोर कुमार ने जहां इस दर्दभरे गीत का मेल वर्जन गाया था, तो वहीं लता मंगेशकर ने फीमेल वर्जन गाया था। इस दर्दभरे गीत की हर लाइन सीधा दिल में सुईं की तरह चुभने वाली है।
यह गाना आज हिंदी सिनेमा के सबसे दर्दभरे गीतों में एक से एक कल्ट क्लासिक सॉन्ग है, जिसमें एक तरफा प्यार की लाचारी और त्याग को बड़ी ही खूबसूरती के साथ राजेश खन्ना गन्ना ने दर्शाया है।

आरडी बर्मन ने दिया था गाने का म्यूजिक
किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज में गाए इस खूबसूरत गाने का मिजाज कुछ ऐसा है, जो सुनने वाले को एक अलग सी उदासी में ले जाता है। इस गाने के लिरिक्स गुलशन बावरा ने लिखे थे और म्यूजिक राहुल देव बर्मन यानी कि 'पंचम' दा ने कंपोज किया था। किशोर कुमार ने इस गाने को इतनी शिद्दत से गाया कि उन्हे 1984 में बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला।
Video Credit- Is Song
ऐसा कहा जाता है कि आरडी बर्मन को 'हमें और जीने की चाहत' न होती गाने की धुन इतनी पसंद थी कि उन्होंने अलग-अलग फिल्मों में उसका इस्तेमाल किया था। 1983 में राजेश खन्ना के डूबते करियर को बचाने में फिल्म 'अगर तुम ना होते' मील का पत्थर साबित हुई थी।
