मुंबई। कंगना रनौत एक बार फिर अपना जलवा सिल्वर स्क्रीन पर बिखेरने को तैयार है। उनकी आने वाली फ़िल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ़ झाँसी' के ट्रेलर ने सभी को इस फ़िल्म के लिए और ज्यादा उत्साहित कर दिया है। ट्रेलर में दिखाया गया ज़बरदस्त एक्शन और देश की जांबाज़ महिला योद्धा की यह कहानी लोगों को बहुत आकर्षित कर रही है और इसपर कंगना की एक्टिंग का पर्चा ज़ोरों शोरों से लहरा रहा है। लेकिन, इस फ़िल्म से कंगना की सिर्फ एक्टिंग ही नहीं बल्कि उनके डायरेक्शन स्किल्स की झलक भी दिखाई देंगी।

आप सभीं जानते ही होंगे कि कंगना ने इस फ़िल्म में ना कि सिर्फ कैमरे के आगे काम किया बल्कि, कैमरा वर्क और डायरेक्शन में भी उनका पूरा हाथ है। फ़िल्म के क्रेडिट्स में भी कंगना का नाम डायरेक्टर क्रिश के साथ है जिन्होंने इस फ़िल्म का काम आधा ही छोड़ दिया था और इसे पूरा करने के लिए कंगना ख़ुद आगे आई थीं। इस बारे में बात करते हुए बॉलीवुड की क्वीन कंगना ने एक इंटरव्यू में कहा है कि मैं ख़ुद हैरान हूं कि मैं डायरेक्शन में इतनी अच्छी हूं और अब मुझे लगता है कि मेरे लिए एक्टिंग नहीं बल्कि डायरेक्शन सही है, यह मेरा पहला प्यार है। मुझे कभी नहीं लगा था कि डायरेक्शन में मैं इतनी कम्फर्टेबल रहूंगी, भले ही मैं उसके साथ एक्टिंग भी कर रही हूं, भले मैं पसीने से नहा चुकी हूं और सेट्स पर 500 लोग हैं जो एक साथ चिल्ला रहे हैं, मगर मैं इन सब के बीच भी आराम से अपना काम कर रही थी।

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कंगना ने आगे कहा कि डायरेक्शन की बात ही अलग है, हां ये बहुत मेहनत का काम है। एक्टर तो फ़िल्ममेकिंग का बस एक हिस्सा होता है डायरेक्शन फ़िल्ममेकिंग ही है, डायरेक्टर ही असली हीरो है। मुझे ऐसा फील होने लगा है कि एक क्रिएटिव पर्सन होने के नाते मैं बस सिर्फ एक एक्टर बन कर रह गई हूं, मैं समझ गई हूं कि मैं बहुत कुछ कर सकती हूं। खैर, इसका मतलब ये नहीं है कि मैं एक्टिंग छोड़ दूंगी। मैं फ़िलहाल अश्विनी अय्यर के साथ फ़िल्म 'पंगा' और प्रकाश कोवेलामुडी के साथ 'मेंटल है क्या' में एक्टिंग ही कर रही हूं। मगर, कहीं ना कहीं मुझे लगता है कि मैं अपने टैलेंट का सही इस्तेमाल नहीं कर रही और इसके लिए मैं मरे जा रही हूं। मैं अन्दर से टूट रही हूं कि मैं अपने आपको एक डायरेक्टर के रूप में एक्सप्रेस नहीं कर पा रही। मणिकर्णिका के लिए जब मैं एक्टिंग कर रही थी तो मेरे साथ बहुत कुछ हुआ, मैंने चोट खाई, दर्द हुआ लेकिन जब मैंने इस फ़िल्म को डायरेक्ट करना शुरू किया तो मुझे लगा कि मेरे पास सिर्फ goal है, कोई प्रेशर नहीं है। डायरेक्टिंग मेरा पहला प्यार है।

वैसे, आपको बता दें कि कंगना से पहले भी कई टैलेंटेड एक्ट्रेसेज़ ने कैमरे के पीछे की दुनिया में अपना हाथ आजमाया है। कुछ सफल रही और कुछ ने एक दो फ़िल्में बनाकर डायरेक्टर की कुर्सी की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा। जैसे, कि अभिनेत्री हेमा मालिनी! बता दें कि बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी ने साल 1992 में शाह रुख़ ख़ान और दिव्या भारती की फ़िल्म 'दिल आशना है' को डायरेक्ट किया था। इसके बाद अपनी बेटी ईशा देओल की फ़िल्में 'मोहिनी' और 'टेल मी ओ खुदा' को भी हेमा ने ही डायरेक्ट किया था।

फ़िल्म 'मिस्टर एंड मिसेज़ अय्यर' के लिए नेशनल अवार्ड जीतने वालीं कोंकणा सेन शर्मा ने अपने एक्टिंग करियर में 'पेज 3' 'अ मेट्रो', 'ओमकारा', 'लिपस्टिक अंडर माय बुरखा' जैसी कमाल की फ़िल्में की हैं। कोंकणा ने हाल ही में फ़िल्म 'डेथ ऑफ़ गूंज' से अपने डायरेक्टोरियल डेब्यू किया था।

'अर्थ', 'बवंडर' जैसी फ़िल्मों के लिए क्रिटिक्स की तारीफ़ों में शामिल रहने वाली नंदिता दास ने हाल ही में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी की फ़िल्म 'मंटो' को डायरेक्ट किया था। कान्स और टोरंटो फ़िल्म फेस्टिवल में इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग रखी गई थी और लोगों ने इसे बहुत पसंद किया था। हालांकि, पिछले साल सितम्बर में यह फ़िल्म भारत में भी रिलीज़ हुई मगर जनता ने इसे कुछ ख़ास पसंद नहीं किया। इससे पहले भी नंदिता ने साल 2008 में फ़िल्म 'फ़िराक' को डायरेक्ट किया था।

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पूजा भट्ट, बॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्री जिन्होंने अपने एक्टिंग करियर में 'डैडी', 'सड़क', 'बॉर्डर' जैसी कई फ़िल्मों में काम किया और इसके बाद अपने पिता महेश भट्ट के नक़्शे कदम पर चलते हुए डायरेक्शन की कुर्सी संभाली। साल 2003 में फ़िल्म 'पाप' से अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू करने एक बाद पूजा ने 'धोखा', 'कजरारे' और 'जिस्म 2' भी डायरेक्ट की।

मल्टीलैंग्वेज फ़िल्मों में अपनी एक्टिंग से सभीं को इम्प्रेस करने वालीं रेवती ने साल 2002 में फ़िल्म 'मित्र, माय फ्रेंड' से अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू किया था और इसके लिए उन्होंने नेशनल अवार्ड भी जीता। इसके बाद रेवती ने 'मुंबई कटिंग', 'फिर मिलेंगे', 'केरला कैफ़े' जैसी कई फ़िल्मों को डायरेक्ट किया। 

Posted By: Shikha Sharma

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